Ajmer में 19 मई को सर्वधर्म सम्मेलन आयोजित होगा। नसरुद्दीन चिश्ती और आचार्य श्याम सुंदर ने कहा कि युद्ध और नफरत के माहौल में समाज को शांति, भाईचारे और एकता का संदेश देना आज बेहद जरूरी हो गया है।
अजमेर: राजस्थान के ऐतिहासिक शहर Ajmer में एक बार फिर सामाजिक सौहार्द, धार्मिक एकता और विश्व शांति का संदेश देने की तैयारी की जा रही है। “सर्व धर्म-सर्व समाज” के तत्वावधान में 19 मई को आयोजित होने वाले सर्वधर्म सम्मेलन को लेकर गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न धर्मों के प्रमुख संतों और धर्मगुरुओं ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन का उद्देश्य देश और दुनिया में बढ़ती अशांति, युद्ध, नफरत और सामाजिक विभाजन के बीच प्रेम, भाईचारे और मानवता का संदेश फैलाना बताया गया। कार्यक्रम में प्रदेशभर से संत, धर्माचार्य, समाजसेवी और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
युद्ध और हथियारों की होड़ पर चिंता
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान Nasruddin Chishti ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दुनिया आज युद्ध, हिंसा और हथियारों की प्रतिस्पर्धा में उलझती जा रही है, जिसका सबसे बड़ा असर मानवता और युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि अजमेर हमेशा से मोहब्बत, इंसानियत और गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक रहा है। यहां से सदियों से अमन और भाईचारे का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचता रहा है।
चिश्ती ने कहा कि समाज को विभाजित करने वाले मुद्दों से ऊपर उठकर युवाओं के बेहतर भविष्य, शिक्षा, रोजगार और संस्कारों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
“मेरा मुल्क मेरी पहचान” अभियान पर जोर
Nasruddin Chishti ने बताया कि सम्मेलन “मेरा मुल्क मेरी पहचान” अभियान के तहत आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और धार्मिक सद्भाव के प्रति जागरूक करना है।
उन्होंने कहा कि भारत की पहचान विविधता में एकता और साझा संस्कृति से बनती है। ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और तनाव बढ़ रहा है, तब भारत जैसे देशों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे शांति और सह-अस्तित्व का उदाहरण पेश करें।
उन्होंने शहरवासियों और युवाओं से बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील भी की।
सभी धर्मों को एक मंच पर लाने की पहल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में Shyam Sundar ने कहा कि वर्तमान समय में विश्वभर में अशांति और सामाजिक असंतुलन का माहौल दिखाई दे रहा है। ऐसे समय में सभी धर्मों के लोगों को एक मंच पर लाकर संवाद और सद्भाव का संदेश देना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सम्मेलन में विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु अपने विचार रखेंगे और समाज को प्रेम, सहिष्णुता तथा एकजुटता का संदेश देंगे।
आचार्य श्याम सुंदर के अनुसार, धार्मिक और सामाजिक संवाद समाज को मजबूत बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
जवाहर रंगमंच में होगा आयोजन
सर्वधर्म सम्मेलन का आयोजन 19 मई को शाम 5 बजे Jawahar Rangmanch में किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में राजस्थान के विभिन्न जिलों से संत, मौलाना, धर्माचार्य, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और आम नागरिक शामिल होंगे।
सम्मेलन में राष्ट्रीय एकता, अखंड भारत की सुरक्षा, सामाजिक समरसता और विश्व शांति जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
अजमेर की गंगा-जमुनी संस्कृति फिर चर्चा में
Ajmer लंबे समय से धार्मिक सह-अस्तित्व और सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक माना जाता रहा है। यहां स्थित प्रसिद्ध Ajmer Sharif Dargah और विभिन्न मंदिरों में देशभर से लोग आते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अजमेर की पहचान केवल धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि विविध समुदायों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के उदाहरण के रूप में भी रही है।
इसी परंपरा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से इस तरह के सर्वधर्म सम्मेलनों का आयोजन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
युवाओं और समाज के लिए संदेश
सम्मेलन के आयोजकों ने कहा कि युवाओं को नफरत और विभाजनकारी विचारों से दूर रखते हुए सकारात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी की ओर प्रेरित करना समय की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना किसी भी समाज की स्थिरता और प्रगति के लिए जरूरी है।
धर्मगुरुओं का मानना है कि यदि समाज में संवाद और आपसी सम्मान बना रहे, तो कई सामाजिक तनावों को कम किया जा सकता है।
वैश्विक तनाव के बीच शांति की अपील
विश्व स्तर पर जारी संघर्षों और युद्धों के संदर्भ में भी सम्मेलन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोजकों ने कहा कि आज कई देशों में युद्ध, राजनीतिक तनाव और धार्मिक टकराव बढ़ रहे हैं।
ऐसे माहौल में भारत जैसे बहुसांस्कृतिक देश से शांति और भाईचारे का संदेश जाना वैश्विक स्तर पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि सामाजिक और धार्मिक नेतृत्व यदि एक मंच पर आकर शांति की बात करे, तो उसका असर आम लोगों तक भी पहुंचता है।
सामाजिक एकता पर रहेगा विशेष फोकस
सम्मेलन में सामाजिक एकता और सामुदायिक सद्भाव को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। आयोजकों का कहना है कि समाज को जाति, धर्म और क्षेत्रीय विभाजन से ऊपर उठकर एकजुट रहने की आवश्यकता है।
धर्मगुरु समाज में सकारात्मक ऊर्जा और आपसी विश्वास बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर देंगे।











