SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग के क्लाउड सिस्टम पर संकट, BSNL का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के करीब

SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग के क्लाउड सिस्टम को लेकर चिंता बढ़ी है। BSNL का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के करीब है। जानिए इस मामले से जुड़ी अहम जानकारी और आगे क्या

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विवादों में घिरा हुआ है। इसी बीच, आयोग के चुनावी कामकाज को सुचारु रूप से चलाने वाले क्लाउड-बेस्ड ऑपरेशंस पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

ECI Cloud Operations Crisis: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के सामने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चल रही बहस के बीच एक नई प्रशासनिक चुनौती सामने आई है। चुनाव आयोग के कई महत्वपूर्ण डिजिटल और क्लाउड-आधारित ऑपरेशंस के संचालन पर अनिश्चितता बढ़ गई है। इन सेवाओं का प्रबंधन फिलहाल सरकारी दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) कर रही है, लेकिन उसका मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट समाप्त होने के करीब है। दूसरी ओर, नई सेवा प्रदाता कंपनी के चयन की प्रक्रिया भी अंतिम रूप नहीं ले पाई है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नए टेंडर में योग्य बोलीदाताओं की संख्या और निर्धारित शर्तों को लेकर स्थिति जटिल हो गई है। ऐसे में आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि मौजूदा अनुबंध की अवधि समाप्त होने के बाद भी चुनाव से जुड़े डिजिटल सिस्टम बिना किसी रुकावट के काम करते रहें। कई राज्यों में मतदाता सूची के SIR से संबंधित गतिविधियां जारी होने के कारण इस मुद्दे को और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

SIR से जुड़े डिजिटल ऑपरेशंस भी चर्चा में

द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, क्लाउड सेवाओं से संबंधित टेंडर चुनाव आयोग के आईटी विभाग ने जारी किया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस प्रक्रिया में केवल एक बोलीदाता निर्धारित मूल्यांकन मानदंडों के तहत योग्य पाया गया, लेकिन वह एक जरूरी शर्त पूरी नहीं कर सका। इस स्थिति ने नए कॉन्ट्रैक्ट को अंतिम रूप देने में कठिनाई पैदा कर दी है।

चुनाव आयोग ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि टेंडर प्रक्रिया अभी जारी है और बोली को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। आयोग के अनुसार, उचित समय पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट की समयसीमा को देखते हुए निर्णय में देरी परिचालन संबंधी चिंताएं बढ़ा सकती है।रिपोर्ट के अनुसार, इस विषय पर उच्चस्तरीय चर्चा की योजना भी बनाई गई है, ताकि नियमों के अनुरूप समाधान निकालते हुए आईटी सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित की जा सके।

चुनाव आयोग के लिए क्यों अहम है क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर?

चुनाव आयोग के क्लाउड-आधारित सिस्टम केवल डेटा स्टोर करने तक सीमित नहीं हैं। इनका इस्तेमाल चुनावी तैयारियों, प्रशासनिक समन्वय, मतदाता सूची के प्रबंधन और चुनाव के बाद नतीजों से संबंधित रिपोर्टिंग जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों में होता है। इन सेवाओं के माध्यम से मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और अन्य संबंधित कार्यालयों के बीच डिजिटल समन्वय बनाए रखने में मदद मिलती है। इसलिए क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में किसी भी तरह की बाधा आने पर विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर असर पड़ने का जोखिम हो सकता है।

आयोग के टेंडर दस्तावेजों में सुरक्षित, मजबूत और भरोसेमंद आईटी तथा क्लाउड सेवाओं की जरूरत पर जोर दिया गया है। इनमें साइबर सुरक्षा, सूचना की गोपनीयता और सिस्टम की उपलब्धता को प्रमुख आवश्यकताओं के रूप में देखा गया है। चुनावी डेटा की संवेदनशील प्रकृति के कारण इन प्रणालियों का सुरक्षित और निर्बाध संचालन बेहद महत्वपूर्ण है।

नया टेंडर जारी करने पर बढ़ सकता है समय

रिपोर्ट के अनुसार, यदि पूरी टेंडर प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ती है, तो नए सेवा प्रदाता के चयन में पांच से छह महीने तक लग सकते हैं। इस दौरान मौजूदा सेवाओं को जारी रखने के लिए अंतरिम व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में BSNL के साथ मौजूदा अनुबंध को आगे बढ़ाने या किसी अन्य कानूनी रूप से स्वीकार्य विकल्प पर विचार करना पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को निर्धारित नियमों तथा अनुबंध की शर्तों के अनुसार लेना होगा।

BSNL लंबे समय से चुनाव आयोग की क्लाउड सेवाओं का संचालन कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने पहले इन सेवाओं के लिए सरकारी कंपनी को नामांकन के आधार पर अनुबंध दिया और समय-समय पर उसे नवीनीकृत भी किया। अब प्रतिस्पर्धी खरीद प्रक्रिया की ओर बढ़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे सेवा प्रदाताओं के बीच प्रतिस्पर्धा और सार्वजनिक धन के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सके।

टेंडर प्रक्रिया में क्या हुआ?

रिपोर्ट के अनुसार, क्लाउड सेवाओं को अधिक आधुनिक बनाने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए 13 मई को सीमित टेंडर के तहत प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के पैनल में शामिल क्लाउड सेवा प्रदाताओं में से उपयुक्त कंपनी का चयन करना था। बोली 20 जून को खोली गई थी।

पांच साल के प्रस्तावित अनुबंध के लिए RailTel, BSNL, NIC-NISCI और अन्य सूचीबद्ध सेवा प्रदाताओं के नाम संभावित प्रतिभागियों के रूप में सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, मूल्यांकन के बाद केवल एक बोलीदाता ही निर्धारित तकनीकी और लागत संबंधी मानदंडों के आधार पर योग्य रह पाया, लेकिन आवश्यक शर्त से जुड़ी समस्या के कारण चयन प्रक्रिया अटक गई।

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