दिल्ली में CEC के इस्तीफे की मांग पर प्रदर्शन तेज, CJP के दो नेता 5 दिन की न्यायिक हिरासत में

दिल्ली में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR वापस लेने की मांग पर प्रदर्शन तेज। CJP के दो नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत, 23 अक्टूबर को देशव्यापी आंदोलन

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR वापस लेने की मांग पर प्रदर्शन जारी हैं। CJP के दो नेताओं को जंतर-मंतर मामले में पांच दिन की न्यायिक हिरासत मिली, जबकि संगठनों ने 23 अक्टूबर को देशव्यापी आंदोलन घोषित किया।

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया वापस लेने की मांग को लेकर दिल्ली में 14 अक्टूबर 2026 को विरोध प्रदर्शन जारी रहे। संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कार्रवाई की गई। वहीं, जंतर-मंतर के पास स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के सदस्यों ने भी प्रदर्शन किया।

इसी बीच, जंतर-मंतर क्षेत्र में कथित तौर पर अनधिकृत प्रवेश के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रंका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ FIR दर्ज की है। दूसरी ओर, SIR का विरोध कर रहे 100 से अधिक युवा, श्रमिक और किसान संगठनों ने 23 अक्टूबर को देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की।

CJP के दो नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सौरव दास और आशुतोष रंका को पहले निवारक हिरासत में लिया गया था। इसके कुछ घंटे बाद बुधवार, 14 अक्टूबर को उन्हें जंतर-मंतर से जुड़े मामले में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उन्हें तिहाड़ जेल में रखा जाएगा।

दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं और अन्य लोगों के खिलाफ कथित तौर पर शांति भंग करने से संबंधित बॉन्ड के उल्लंघन, आपराधिक अतिक्रमण और आदेशों की अवज्ञा सहित विभिन्न आरोपों के तहत FIR दर्ज की है।

इसी मामले में निवारक हिरासत में लिए गए अजिंक्य शिंदे को व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा कर दिया गया। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में आरोपियों के विस्तृत पक्ष या मामले में आगे की सुनवाई का पूरा विवरण नहीं दिया गया है।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित किए जाने की स्थिति बदलने को लेकर भी विवाद जारी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 12 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया था।

संसद मार्ग के पास IYC कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया

बुधवार दोपहर दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के सामने प्रदर्शन कर रहे भारतीय युवा कांग्रेस के सदस्यों को हिरासत में लेना शुरू किया। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया के विरोध में अपनी मांगें उठा रहे थे।

इसी दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों के सड़क पर बैठ जाने से यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस ने क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू किए जाने की घोषणा भी की।

पुलिस ने पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों से प्रदर्शनकारियों तथा पुलिसकर्मियों की भीड़ से सुरक्षित दूरी बनाए रखने को कहा। घटनास्थल पर पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान भी मौजूद थे।

जंतर-मंतर के पास SFI और DYFI का प्रदर्शन

CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर SFI और DYFI के सदस्यों ने जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन किया। यह विरोध SIR प्रक्रिया और चुनावी सूची से नाम हटाए जाने से संबंधित चिंताओं के बीच हुआ।

प्रदर्शनकारियों की मांगों में SIR प्रक्रिया को वापस लेना, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और मतदाता सूची से हटाए गए नामों का ऑडिट शामिल है।

इन संगठनों का कहना है कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों की समीक्षा होनी चाहिए। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में हटाए गए नामों की संख्या या कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र पुष्टि से संबंधित आंकड़े नहीं दिए गए हैं।

100 से अधिक संगठनों ने 23 अक्टूबर को देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया

SIR का विरोध कर रहे संगठनों ने बुधवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक बैठक की। सामाजिक कार्यकर्ता तारा राव के मुताबिक, इस बैठक में विरोध को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त मंच बनाने का निर्णय लिया गया।

तारा राव ने जुलाई से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की और इसे कठोर बताया। उन्होंने SIR प्रक्रिया समाप्त करने तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई।

अखिल भारतीय किसान सभा के नेता राजन क्षीरसागर ने कहा कि बैठक में 100 से अधिक युवा, श्रमिक और किसान संगठनों ने हिस्सा लिया। उनके मुताबिक, ये संगठन 23 अक्टूबर 2026 से देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे।

आंदोलन की प्रमुख मांगों में SIR को वापस लेना, ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और मतदाता सूची से हटाए गए नामों का ऑडिट शामिल है। इस पहल का उद्देश्य विभिन्न संगठनों को एक साझा मंच पर लाकर विरोध को व्यापक बनाना है।

राहुल गांधी ने कहा- राजनीतिक प्रतिरोध जारी रहेगा

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस विवाद के बीच कहा कि कांग्रेस भारत के मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट और न्यायिक व्यवस्था का पूरा सम्मान करती है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक और सार्वजनिक विरोध जारी रहेगा और अंततः सफल होगा।

राहुल गांधी की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब प्रदर्शन स्थल की अधिसूचना, पुलिस कार्रवाई और CJP नेताओं की हिरासत को लेकर राजनीतिक बहस तेज है।

हालांकि, न्यायिक व्यवस्था के प्रति सम्मान और सरकार या चुनाव आयोग के फैसलों के खिलाफ राजनीतिक विरोध दो अलग-अलग विषय हैं। कांग्रेस की ओर से दिए गए बयान में इसी अंतर को रेखांकित किया गया।

रामलीला मैदान में अगले ढाई महीने तक जगह उपलब्ध नहीं

जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थानों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार, राजधानी में नए निर्धारित प्रदर्शन स्थलों में शामिल रामलीला मैदान में अगले ढाई महीने तक कोई खाली तारीख उपलब्ध नहीं है। वहां केवल 29, 30 और 31 दिसंबर की तारीखें बुकिंग के लिए उपलब्ध बताई गई हैं।

इस स्थिति से उन संगठनों के सामने आयोजन संबंधी चुनौती पैदा हो सकती है, जो आने वाले दिनों में प्रदर्शन करना चाहते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में बुकिंग की प्रक्रिया और अन्य संभावित स्थलों की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

प्रदर्शन और हिरासत पर आगे की नजर

दिल्ली में जारी घटनाक्रम में तीन प्रमुख मुद्दे सामने आए हैं—SIR प्रक्रिया का विरोध, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की उपलब्धता।

CJP के दो नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के साथ पुलिस की कार्रवाई भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी हुई है। दूसरी ओर, विभिन्न संगठनों ने 23 अक्टूबर को देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है।

आने वाले दिनों में आंदोलन की व्यापकता, प्रशासन की प्रतिक्रिया और जंतर-मंतर मामले की न्यायिक प्रक्रिया पर नजर रहेगी। फिलहाल, प्रदर्शनकारियों की मांगों और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े सभी दावों का निष्पक्ष आकलन संबंधित दस्तावेजों, आधिकारिक बयानों और न्यायिक रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना आवश्यक है।

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