राहुल गांधी के सामने छात्रों ने लगाए दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप, अदिरा बोलीं- एक कान से सुनने में परेशानी

राहुल गांधी के सामने छात्रों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत में ज्यादती के आरोप लगाए। अदिरा, ऋतु बराला और अन्य प्रदर्शनकारियों ने सुनाई आपबीती।

राहुल गांधी के सामने प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत में दुर्व्यवहार के आरोप लगाए। दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने सुनने की क्षमता प्रभावित होने का दावा किया। राहुल ने प्रदर्शनकारियों से वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा।

नई दिल्ली: केंद्र सरकार की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट तथा हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सामने आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के कार्यकर्ताओं, छात्रों और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने अनुभव साझा किए। प्रदर्शनकारियों में शामिल दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उनके एक कान की सुनने की क्षमता प्रभावित हुई। एक अन्य छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उनके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी गई। वहीं, कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों ने डंडे से पीटने, चेहरे पर चोट पहुंचाने और हिरासत में दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए।

राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों से घटनाओं के वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। हालांकि, प्रदर्शनकारियों के आरोपों पर दिल्ली पुलिस का पक्ष और उनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध कराई गई जानकारी में शामिल नहीं है।

राहुल गांधी ने छात्रों से क्या कहा?

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों के आरोप सुनने के बाद उनसे घटनाओं से संबंधित वीडियो और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तक, जिन लोगों को जिम्मेदार माना जाता है, उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।

राहुल गांधी ने कहा, "ये हिंदुस्तान है, अमित शाह जी यहां कोई हिंदू-मुस्लिम नहीं है, इनकी कोई जात नहीं है। आप इस आवाज के सामने खड़े नहीं हो सकते।"

उन्होंने छात्रों से कहा कि वे वीडियो बनाकर रखें, ताकि कथित घटनाओं से संबंधित साक्ष्य उपलब्ध रहें। राहुल गांधी के मुताबिक, इन सबूतों के आधार पर जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने की मांग की जाएगी।

उन्होंने प्रदर्शनकारियों के आरोपों को लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिकों की आवाज से जुड़ा मुद्दा बताया।

अदिरा का आरोप- चेहरे पर मारा, कान को भी नुकसान पहुंचा

केरल की रहने वाली और दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली छात्रा अदिरा ने हिरासत के दौरान कथित दुर्व्यवहार का विवरण दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बस में बैठाया गया, तब वहां कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी।

अदिरा के मुताबिक, उन्होंने केवल यह पूछा था कि बस में महिला पुलिस अधिकारी या महिला कांस्टेबल क्यों नहीं है। उनका कहना था कि महिलाओं को हिरासत में लेते समय महिला पुलिसकर्मी की मौजूदगी जरूरी है।

अदिरा ने दावा किया कि इसके बाद बस कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन के सामने पहुंची, जहां पुलिसकर्मियों ने उनके चेहरे पर कई बार मारा। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे उनकी आंख और कान को नुकसान पहुंचा तथा एक कान से सुनने में परेशानी होने लगी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन स्थानों पर CCTV कैमरे नहीं थे, वहां प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की गई। राहुल गांधी ने भी अदिरा की सुनने की क्षमता प्रभावित होने का दावा दोहराया।

इन आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र मेडिकल रिपोर्ट, CCTV फुटेज और पुलिस का पक्ष उपलब्ध कराई गई सामग्री में शामिल नहीं हैं।

ऋतु बराला ने लगाए चेहरे पर खरोंचने के आरोप

NSUI से जुड़ी ऋतु बराला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि 13 अक्टूबर को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान कई कार्यकर्ताओं को तीन बसों में हिरासत में लिया गया था। उनके अनुसार, प्रत्येक बस में लगभग 30 से 40 प्रदर्शनकारी मौजूद थे।

ऋतु ने बताया कि उनकी बस में दो लड़कियां और करीब 20 से 30 अन्य NSUI कार्यकर्ता थे। उन्होंने चंचल यादव नाम की एक महिला पुलिस कांस्टेबल का भी उल्लेख किया।

ऋतु के मुताबिक, हिरासत में लिए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने बस से बाहर निकलकर अपना विरोध जारी रखने की कोशिश की। इसी दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ झड़प हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान उनके चेहरे को नाखूनों से खरोंचा गया और उन्हें चोटें आईं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदर्शनकारियों ने कथित चोटों की तस्वीरें भी दिखाईं।

हालांकि, तस्वीरों से चोटों की परिस्थितियों या उनके लिए जिम्मेदार व्यक्ति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती। इस मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों और अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।

रमित ने कहा- प्रदर्शन कवर करते समय हिरासत में लिया

प्रदर्शनकारी और कंटेंट क्रिएटर रमित ने आरोप लगाया कि 11 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में प्रदर्शन को कवर करते समय उन्हें हिरासत में लिया गया था।

रमित का दावा था कि RSS और भाजपा से जुड़े कुछ लोगों के कहने पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की और उनका फोन भी छीन लिया।

उन्होंने हिरासत के दौरान महिला पुलिस अधिकारियों की अनुपस्थिति का भी आरोप लगाया। हालांकि, कथित राजनीतिक हस्तक्षेप और हिरासत की परिस्थितियों को लेकर स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

प्रदर्शनकारियों के इन आरोपों पर संबंधित संगठनों और दिल्ली पुलिस की प्रतिक्रिया सामने आने पर मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

धर्मेंद्र ने भी मारपीट का आरोप लगाया

प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदर्शनकारी धर्मेंद्र ने दावा किया कि हिरासत के दौरान उन्हें बुरी तरह पीटा गया। उन्होंने अंकित कसाना नाम के एक पुलिसकर्मी पर धमकी देने और लात-घूंसे तथा थप्पड़ मारने का आरोप लगाया।

धर्मेंद्र के मुताबिक, पुलिसकर्मी ने उनसे कहा कि उनके समर्थन में कितने भी नेता आ जाएं, उन्हें बचाने कोई नहीं आएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन पर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पैसे लेने का आरोप लगाया गया।

धर्मेंद्र ने कहा कि घटना के दौरान उन्हें डर लगा, लेकिन इसके बावजूद वह अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेंगे।

इन आरोपों के संबंध में किसी आधिकारिक जांच या संबंधित पुलिसकर्मी का जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसलिए आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र जांच और साक्ष्यों का परीक्षण जरूरी होगा।

SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर प्रदर्शन

प्रदर्शनकारी SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से जुड़े लोगों ने 1 अक्टूबर से इस मुद्दे पर प्रदर्शन शुरू किए थे। खबर में अब तक पांच प्रदर्शनों का उल्लेख किया गया है।

प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने और पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर विवाद बढ़ा है। राहुल गांधी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्रों और कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए कार्रवाई की मांग उठाई।

यह मामला अब दो प्रमुख सवालों पर केंद्रित है: प्रदर्शनकारियों के साथ हिरासत के दौरान क्या हुआ और लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच किस तरह की जाएगी।

पुलिस का पक्ष और जांच के साक्ष्य अहम

प्रदर्शनकारियों के आरोप गंभीर हैं, लेकिन उनकी पुष्टि के लिए स्वतंत्र साक्ष्य और संबंधित अधिकारियों का पक्ष आवश्यक है। मेडिकल रिपोर्ट, CCTV फुटेज, उपलब्ध वीडियो, हिरासत के रिकॉर्ड और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान घटना की परिस्थितियों को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों से साक्ष्य सुरक्षित रखने की अपील की है। आगे की जांच और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं से यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ।

फिलहाल, यह मामला दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई, हिरासत में लिए गए लोगों के अधिकारों और राजनीतिक जवाबदेही से जुड़े सवालों को सामने लाता है।

Leave a comment