AK-47 से मर्डर, पुलिस ने 8 साल कार्रवाई नहीं की: मोबाइल का CDR तक नहीं दिया; पूर्व मेयर की पत्नी-बेटे बोले- हत्यारों को बचाया, हाईकोर्ट जाएंगे

AK-47 से हत्या के मामले में पूर्व मेयर के परिवार ने पुलिस पर 8 साल तक कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। परिजन अब हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं।
AK-47 से मर्डर, पुलिस ने 8 साल कार्रवाई नहीं की: मोबाइल का CDR तक नहीं दिया; पूर्व मेयर की पत्नी-बेटे बोले- हत्यारों को बचाया, हाईकोर्ट जाएंगे
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बिहार। AK-47 से हुई हत्या के एक सनसनीखेज मामले में मृतक के परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पूर्व मेयर की पत्नी और बेटे ने आरोप लगाया है कि हत्या के करीब 8 साल बीत जाने के बावजूद पुलिस ने मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं की। परिवार का दावा है कि जांच के दौरान मोबाइल फोन का CDR तक उपलब्ध नहीं कराया गया और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। अब परिजनों ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।

परिजनों के मुताबिक, यह हत्या सामान्य आपराधिक वारदात नहीं थी। आरोप है कि हमलावरों ने AK-47 जैसे अत्याधुनिक हथियार का इस्तेमाल कर पूर्व मेयर की हत्या की थी। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की, लेकिन परिवार का कहना है कि समय बीतने के साथ मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

मृतक की पत्नी और बेटे का आरोप है कि उन्हें शुरुआत से ही पुलिस की जांच पर कई सवाल रहे हैं। उनका कहना है कि हत्या के मामले में जिन बिंदुओं पर जांच आगे बढ़नी चाहिए थी, वहां कार्रवाई नहीं की गई। परिवार का दावा है कि घटना से जुड़े मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR तक उपलब्ध नहीं कराया गया।

परिजनों का कहना है कि किसी हत्या की जांच में मोबाइल फोन और कॉल डिटेल महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। घटना के समय संबंधित लोगों की लोकेशन, आपसी संपर्क और बातचीत की जानकारी से जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती थी। परिवार का आरोप है कि इस दिशा में पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई।

परिजनों ने पुलिस पर हत्यारों को बचाने का भी गंभीर आरोप लगाया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की ओर से इस मामले में क्या कार्रवाई की गई और जांच में अब तक क्या तथ्य सामने आए हैं, इसकी आधिकारिक स्थिति अलग से स्पष्ट होना जरूरी है।

आठ साल का लंबा समय बीत जाने के बाद भी न्याय नहीं मिलने की शिकायत को लेकर परिवार अब कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी कर रहा है। परिजनों का कहना है कि वे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पूरे मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच की मांग करेंगे।

परिवार की मांग है कि मामले में उपलब्ध सभी साक्ष्यों की दोबारा समीक्षा की जाए। घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य, मोबाइल रिकॉर्ड, आरोपियों की गतिविधियां और घटना से पहले तथा बाद के घटनाक्रम की जांच नए सिरे से की जाए, ताकि हत्या के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आ सके।

परिजनों का यह भी कहना है कि समय बीतने के साथ कई साक्ष्यों के प्रभावित होने की आशंका रहती है। ऐसे में जांच एजेंसियों को उन सभी डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों को सुरक्षित करना चाहिए, जो अब भी उपलब्ध हैं।

परिवार के अनुसार, हत्या के बाद उन्हें लंबे समय तक न्याय की उम्मीद रही। पुलिस और जांच अधिकारियों से कार्रवाई की उम्मीद की गई, लेकिन उनका आरोप है कि अपेक्षित परिणाम नहीं मिला। अब परिवार ने न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है।

इस मामले में AK-47 के इस्तेमाल का आरोप भी इसे गंभीर बनाता है। ऐसे हथियार से हत्या की घटना में हथियार की बरामदगी, फोरेंसिक जांच, बैलिस्टिक रिपोर्ट और आरोपियों तक हथियार पहुंचने की कड़ी महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि हथियार बरामद हुआ है तो उसकी फोरेंसिक रिपोर्ट भी जांच में अहम भूमिका निभा सकती है।

परिजन चाहते हैं कि जांच के दौरान सामने आए सभी रिकॉर्ड को अदालत के सामने रखा जाए। उनका कहना है कि यदि पुलिस ने अब तक किसी स्तर पर जांच की है तो उसकी पूरी जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए, ताकि परिवार को यह पता चल सके कि मामले में क्या कार्रवाई हुई और किन कारणों से आगे की जांच नहीं बढ़ सकी।

वहीं, इतने लंबे समय बाद हाईकोर्ट जाने के फैसले से मामले में कानूनी प्रक्रिया फिर तेज होने की उम्मीद है। यदि अदालत मामले में जांच की निगरानी या किसी विशेष जांच के निर्देश देती है, तो पुलिस को भी पुराने रिकॉर्ड और साक्ष्यों की दोबारा समीक्षा करनी पड़ सकती है।

फिलहाल परिवार का मुख्य आरोप पुलिस की कथित निष्क्रियता और जांच में महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्यों को शामिल नहीं करने को लेकर है। पूर्व मेयर की पत्नी और बेटे का कहना है कि वे मामले को अब अंतिम स्तर तक ले जाएंगे और हत्यारों को सजा दिलाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

मामले में पुलिस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया और अब तक की जांच का पूरा विवरण सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आठ वर्षों के दौरान किन-किन बिंदुओं पर कार्रवाई की गई। फिलहाल परिजनों के आरोपों ने पुराने हत्याकांड की जांच और पुलिस की भूमिका को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

 
 

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