सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दिल्ली में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान युवाओं की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से रिहाई की मांग करते हुए चुनाव आयोग पर बीजेपी के पक्ष में काम करने और वोट कटवाने के आरोप लगाए।
उत्तर प्रदेश: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान छात्रों और युवाओं को हिरासत में लिए जाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने सरकार से गिरफ्तार लोगों को रिहा करने की मांग की। अखिलेश ने चुनाव आयोग पर बीजेपी के पक्ष में काम करने और कथित फर्जी दस्तखत के जरिए मतदाताओं के नाम कटवाने के आरोप भी लगाए। ये आरोप सपा प्रमुख ने मीडिया से बातचीत के दौरान लगाए।
गिरफ्तार छात्रों और युवाओं की रिहाई की मांग
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सरकार से गिरफ्तार किए गए छात्रों और युवाओं को रिहा करने की मांग की। अखिलेश ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले युवाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

मीडिया से बातचीत में सपा अध्यक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस सरकार को सत्ता से हटने का डर होता है, वह अन्याय का सहारा लेती है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि आयोग बीजेपी के पक्ष में काम कर रहा है।
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग को लेकर कई तीखी टिप्पणियां कीं। हालांकि, आयोग के संबंध में लगाए गए ये आरोप सपा प्रमुख के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित मामलों के दस्तावेजों और आयोग की प्रतिक्रिया को देखना जरूरी है।
फर्जी दस्तखत और फॉर्म-7 को लेकर लगाए आरोप
अखिलेश यादव ने मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया का मुद्दा उठाते हुए नंदलाल निषाद का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नंदलाल निषाद, जो उनके मुताबिक दस्तखत करना नहीं जानते, उनके नाम से कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर करके फॉर्म भरा गया और मतदाता सूची से वोट कटवाने की कोशिश की गई।
सपा प्रमुख ने दशरथ का मामला उठाते हुए फॉर्म-7 के इस्तेमाल पर भी सवाल किए। उनके अनुसार, नियमों के तहत एक व्यक्ति पांच से अधिक फॉर्म-7 नहीं भर सकता, लेकिन कथित तौर पर 100 से ज्यादा फॉर्म भरवाए गए। उन्होंने पूछा कि ऐसे मामलों में चुनाव आयोग ने क्या कार्रवाई की।
फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी नाम को हटाने या नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया में किया जाता है। अखिलेश के आरोपों के संदर्भ में यह स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित मामलों में कितने फॉर्म जमा किए गए, उनकी जांच किस स्तर पर हुई और आयोग ने क्या निर्णय लिया।
वोट डालने से रोकने के आरोप पर भी उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने पिछले उपचुनावों का उल्लेख करते हुए मतदान प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर मतदाताओं को वोट डालने से रोकने की घटनाएं हुई थीं। उन्होंने एक तस्वीर का जिक्र करते हुए दावा किया कि उसमें एक अधिकारी महिलाओं को मतदान करने से रोकता दिखाई दिया।
सपा प्रमुख ने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना और अधिक से अधिक मतदाताओं को वोट डालने का अवसर देना है। उनके मुताबिक, पहली बार ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है, जहां लोगों को मतदान से रोकने की कोशिशों के आरोप सामने आ रहे हैं।
अखिलेश यादव के बयान के बाद मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, फॉर्म-7 के इस्तेमाल तथा मतदान केंद्रों पर निष्पक्षता जैसे मुद्दे फिर चर्चा में आ गए हैं। हालांकि, फर्जी दस्तखत, वोट कटवाने और मतदान से रोकने से जुड़े आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित शिकायतों की जांच और आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।












