अलीगंज अग्निकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए लखनऊ के चिह्नित अवैध भवनों के निरीक्षण की तैयारी शुरू कर दी है। न्याय मित्र इसी महीने मौके पर पहुंचकर जांच करेंगे और रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप सकते हैं।
लखनऊ: अलीगंज के भीषण अग्निकांड के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया है। अदालत के न्याय मित्र इसी महीने लखनऊ पहुंचकर चिह्नित अवैध भवनों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। एलडीए ने 51 भवनों से जुड़ी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है, जिसमें निर्माण की अवधि, मंजिलों की संख्या, संबंधित अधिकारियों और अब तक हुई कार्रवाई का विवरण शामिल है।
अलीगंज अग्निकांड पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान
अलीगंज अग्निकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण में तैयारियां तेज हो गई हैं। अदालत के न्याय मित्र इसी महीने राजधानी पहुंचकर चिह्नित अवैध भवनों का मौके पर निरीक्षण कर सकते हैं।
एलडीए ने निरीक्षण से पहले संबंधित भवनों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार कराया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि न्याय मित्र के दौरे के दौरान किसी भी भवन से संबंधित जानकारी अधूरी न रहे।
51 भवनों का तैयार किया गया पूरा रिकॉर्ड
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 51 भवनों को चिह्नित किया गया है। एलडीए ने इन सभी संपत्तियों की मंजिलों की संख्या, निर्माण कब और किस अवधि में हुआ, उस समय कौन-कौन से अधिकारी तैनात थे और अवैध निर्माण के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, इसका विवरण जुटाया है।
जहां कार्रवाई नहीं हुई, वहां इसके कारणों की जानकारी भी रिकॉर्ड में शामिल की जा रही है। इसका उद्देश्य न्याय मित्र को निरीक्षण के दौरान पूरी तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराना है।
SIT रिपोर्ट में अधिकारियों की भूमिका भी होगी शामिल
सुप्रीम कोर्ट ने अलीगंज अग्निकांड को लेकर प्रदेश सरकार से विशेष जांच दल यानी SIT की रिपोर्ट मांगी है। जांच में यदि किसी अधिकारी की भूमिका या लापरवाही सामने आती है तो उसके नाम को भी रिपोर्ट में शामिल किए जाने की बात कही गई है।
मामले की सुनवाई सितंबर के मध्य प्रस्तावित है। इससे पहले न्याय मित्र द्वारा लखनऊ में स्थलीय निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखे जाने की संभावना है।
प्रभावशाली लोगों से जुड़ी संपत्तियां भी सूची में
चिह्नित 51 भवनों में कई प्रभावशाली लोगों से जुड़ी संपत्तियां भी शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें पूर्व राज्यपाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री, विधायक, कारोबारी और हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से जुड़े भवन शामिल बताए जा रहे हैं।
एक राज्य मंत्री से संबंधित भवन भी अवैध निर्माण की श्रेणी में पाए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में यदि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू होती है, तो यह राजधानी में अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
निरीक्षण से पहले एलडीए ने बढ़ाई तैयारी
न्याय मित्र के संभावित निरीक्षण को देखते हुए एलडीए अधिकारी चिह्नित भवनों से जुड़े दस्तावेजों को व्यवस्थित कर रहे हैं। जांच में निर्माण की अनुमति, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और पहले की गई कार्रवाई जैसे बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट में पेश होने वाली SIT रिपोर्ट और न्याय मित्र की निरीक्षण रिपोर्ट पर है। इन रिपोर्टों के आधार पर अवैध निर्माण के खिलाफ आगे की कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण दिशा तय हो सकती है।










