अलीगढ़ में बेमौसम बारिश से किसानों को भारी नुकसान, मंडियों में भीगा लाखों कट्टा धान; करोड़ों की चपत लगने की आशंका

अलीगढ़ में बेमौसम बारिश से खैर और हरदुआगंज मंडियों में धान भीग गया। खैर मंडी में करीब 10 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका, खेतों की फसलों पर भी संकट।
अलीगढ़ में बेमौसम बारिश से किसानों को भारी नुकसान, मंडियों में भीगा लाखों कट्टा धान; करोड़ों की चपत लगने की आशंका
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अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान की फसल तैयार होने और मंडियों में उपज पहुंचने के बीच हुई झमाझम बारिश से खेतों से लेकर मंडी परिसरों तक नुकसान की आशंका पैदा हो गई है। खुले में रखे धान के बोरे बारिश के पानी से भीग गए, जबकि कई किसानों की उपज बिक्री से पहले ही खराब होने के खतरे में पड़ गई है। अचानक बदले मौसम ने उन किसानों की परेशानी बढ़ा दी है, जो महीनों की मेहनत के बाद अपनी फसल बेचकर घर-परिवार के खर्च और अगली खेती की तैयारी करना चाहते थे। मंडियों में धान की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने की शिकायतों के बीच किसानों और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब 6:30 बजे अलीगढ़ जिले में आसमान पर काले बादल छा गए और तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश का असर धनीपुर, हरदुआगंज, छर्रा, अतरौली, इगलास, खैर और गभाना की मंडियों तक पहुंची धान की उपज पर पड़ा। कई जगह खुले में रखे धान के बोरे भीग गए। फसल बेचने के लिए मंडी पहुंचे किसानों के सामने अब उपज को सुखाने, सुरक्षित रखने और सही कीमत मिलने की चुनौती खड़ी हो गई है। बारिश के कारण धान की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है, जिसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ सकता है।

खैर कृषि उत्पादन मंडी समिति में बारिश से हुए नुकसान को लेकर चिंता सबसे अधिक बताई जा रही है। मंडी के पूर्व अध्यक्ष हमबीर सिंह के अनुसार, यहां नुकसान का अनुमान करीब 10 करोड़ रुपये तक लगाया गया है। रविवार को मंडी में धान के लगभग 2.50 लाख कट्टे पहुंचे थे। सोमवार सुबह तक करीब 10 प्रतिशत धान की उतराई और सौदे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी। ऐसे में खुले में रखे बोरे बारिश की चपेट में आ गए। हमबीर सिंह ने भीगे हुए धान में लगभग 20 प्रतिशत तक नुकसान होने की आशंका जताई है। हालांकि, नुकसान की वास्तविक मात्रा का आकलन जांच और उपज की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही किया जा सकेगा।

बारिश के बाद मंडी में व्यापारी और पल्लेदार भीगे हुए धान के बोरों को संभालने में जुटे दिखाई दिए। जिन बोरों में पानी पहुंच गया था, उन्हें बचाने और धान को सुरक्षित रखने की कोशिश की गई। लेकिन अचानक तेज बारिश होने के कारण सभी बोरों को समय रहते ढक पाना आसान नहीं रहा। मंडी के गेट बंद होने के कारण कुछ किसान बाहर ही रह गए और उनकी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में रखी उपज भी बारिश में भीग गई। किसानों की परेशानी इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि भीगे धान को बेचने से पहले उसे सुखाना पड़ सकता है और उसकी गुणवत्ता में कमी आने पर उचित भाव मिलना मुश्किल हो सकता है।

धान की खेती करने वाले किसानों के लिए फसल का मंडी तक पहुंचना आम तौर पर मेहनत के बाद मिलने वाले आर्थिक लाभ की उम्मीद से जुड़ा होता है। बुआई, सिंचाई, खाद, दवा, मजदूरी और कटाई पर खर्च करने के बाद किसान उपज बेचकर अपनी लागत निकालने की कोशिश करते हैं। ऐसे में बिक्री के ठीक पहले बारिश से फसल भीग जाने पर उनकी पूरी आर्थिक गणना बिगड़ सकती है। यदि धान में नमी बढ़ जाती है या दाने की गुणवत्ता प्रभावित होती है, तो खरीद के दौरान कीमत कम मिलने का खतरा रहता है। किसानों को आशंका है कि बारिश से हुए नुकसान का असर इस सीजन की कमाई पर लंबे समय तक पड़ सकता है।

खैर मंडी में परेशानी केवल भीगे धान तक सीमित नहीं है। मंडी के लगातार तीन दिन बंद रहने से किसानों के सामने उपज बेचने की समस्या भी खड़ी हो सकती है। जानकारी के अनुसार, सोमवार और मंगलवार को आधिकारिक अवकाश था, जबकि बुधवार को मंडी का साप्ताहिक अवकाश पड़ने से कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में मंडी में पहले से पहुंची उपज को सुरक्षित रखना और नए धान की बिक्री की व्यवस्था करना किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। जो किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचे हैं, उन्हें बिक्री के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। इस बीच मौसम खराब रहा तो खुले में रखे धान को बचाना और मुश्किल हो सकता है।

हरदुआगंज उप मंडी में भी बारिश ने धान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। यहां खुले में रखा हजारों क्विंटल धान बारिश से भीग गया। बताया गया कि मौसम विभाग के पूर्वानुमान के बावजूद मंडी परिसर में धान को पूरी तरह सुरक्षित रखने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। बारिश शुरू होने के बाद कुछ व्यापारी मजदूरों के साथ पहुंचे और धान के बोरों को तिरपाल से ढकने का प्रयास किया। कुछ जगहों पर बोरियों को आसपास की दुकानों के बरामदों में रखवाकर बचाने की कोशिश की गई, लेकिन बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में धान भीगता रहा। राहत की बात यह बताई गई कि हरदुआगंज में भीगा हुआ धान किसानों से पहले ही खरीदा जा चुका था, हालांकि इससे उपज की गुणवत्ता और व्यापारिक नुकसान की चिंता समाप्त नहीं होती।

मंडी में उपज की सुरक्षा के लिए छत, पर्याप्त भंडारण स्थान, तिरपाल और पानी की निकासी जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण होती हैं। खासकर धान की आवक के समय यदि बड़ी मात्रा में उपज खुले परिसर में रखी जाती है, तो अचानक होने वाली बारिश से नुकसान का खतरा बढ़ जाता है। किसानों की मांग है कि मंडियों में फसल को बारिश से बचाने के लिए बेहतर इंतजाम होने चाहिए, ताकि मौसम बदलने पर उनकी महीनों की मेहनत पानी में न बह जाए। मंडी परिसर में उपज रखने की जगह और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना भी जरूरी है, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को नुकसान से बचाया जा सके।

बेमौसम बारिश का असर मंडियों के अलावा खेतों में खड़ी फसलों पर भी पड़ने की आशंका है। क्षेत्र में धान के साथ मक्का और बाजरा जैसी फसलें भी प्रभावित हो सकती हैं। बारिश के कारण खेतों में खड़ी या कटाई के लिए तैयार फसलों की गुणवत्ता और पैदावार पर असर पड़ने की चिंता किसानों को सता रही है। जिन किसानों ने अभी फसल नहीं काटी है, उनके लिए मौसम का लगातार खराब रहना अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकता है। वहीं, जिनकी फसल कटकर मंडी पहुंच चुकी है, उन्हें उसे सूखने और बिक्री के योग्य बनाए रखने की चिंता है।

धान में अधिक नमी होने पर उसकी खरीद और भंडारण में भी दिक्कत आ सकती है। भीगी उपज को समय पर सुखाना जरूरी होता है, अन्यथा उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है। किसानों को यह भी डर है कि बारिश से प्रभावित धान को बाजार में पहले जैसा भाव नहीं मिल पाएगा। यदि कीमत में कमी आती है तो उन्हें लागत निकालने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, हर किसान और हर मंडी में नुकसान एक जैसा नहीं होगा। वास्तविक स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि कितनी मात्रा में धान भीगा है, उसे कितनी जल्दी सुखाया जा सकता है और उसकी गुणवत्ता कितनी प्रभावित हुई है।

इस घटना ने फसल खरीद के मौसम में मंडियों की तैयारी और किसानों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। मौसम का पूर्वानुमान मिलने के बाद भी यदि मंडी में खुले में रखी उपज की सुरक्षा नहीं हो पाती, तो नुकसान का बोझ अंततः किसानों और व्यापारियों को उठाना पड़ सकता है। इसलिए बारिश के बाद भीगे धान का आकलन करना, सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था मजबूत करना और किसानों को बिक्री में अनावश्यक परेशानी से बचाना अहम होगा।

फिलहाल अलीगढ़ जिले में हुई बारिश के बाद किसानों और व्यापारियों की नजर नुकसान के वास्तविक आकलन और मौसम की आगे की स्थिति पर है। खैर मंडी में करीब 10 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका जताई गई है, जबकि हरदुआगंज सहित अन्य मंडियों में भी धान भीगने की खबर है। खेतों में खड़ी फसलों पर भी नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में मौसम कैसा रहता है और भीगी उपज को कितना सुरक्षित किया जा सकता है, इससे नुकसान की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी। फिलहाल बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत, उनकी कमाई और धान की बिक्री की उम्मीदों पर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है।

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