उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) से जुड़े पूर्व कुलसचिव और एक प्रोफेसर पर हमला किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि दोनों लोग संस्थान की स्टाफ कॉलोनी के पास टहल रहे थे, तभी कार से पहुंचे पिता-पुत्र ने उनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने और मोबाइल से घटना का वीडियो बनाने का प्रयास करने पर कथित तौर पर मारपीट की गई। हमले में दोनों के घायल होने और जान से मारने की धमकी दिए जाने का आरोप है। मामले में शिवकुटी थाने में शिकायत के आधार पर दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।
मिली जानकारी के अनुसार, घटना 12 अक्टूबर की शाम करीब साढ़े सात बजे की बताई जा रही है। एमएनएनआईटी की स्टाफ कॉलोनी में रहने वाले प्रोफेसर रमेश पांडेय का कहना है कि वह पूर्व कुलसचिव रवि प्रकाश के साथ टहल रहे थे। इससे पहले दोनों काली मंदिर में सुंदरकांड के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। कार्यक्रम के बाद जब वे सड़क पर टहल रहे थे, उसी दौरान एक कार वहां पहुंची। आरोप है कि कार में इंडस्ट्रियल स्टेट की एक कंपनी के निदेशक उत्कर्ष तिवारी अपने पिता प्रोफेसर राम प्रकाश तिवारी के साथ आए थे। शिकायत के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई और इसके बाद गाली-गलौज शुरू हो गई।
प्रोफेसर रमेश पांडेय के अनुसार, विवाद के दौरान उन्होंने मोबाइल फोन से वीडियो बनाने का प्रयास किया। आरोप है कि इसी बात पर सामने वाले पक्ष ने मारपीट शुरू कर दी। शिकायत में कहा गया है कि सुरक्षा गार्ड का डंडा लेकर हमला किया गया और दोनों लोगों को जमीन पर गिराकर पीटा गया। इस दौरान पूर्व कुलसचिव रवि प्रकाश और प्रोफेसर रमेश पांडेय को चोटें आईं। आरोप यह भी है कि मारपीट के बाद हमलावरों ने दोनों को जान से मारने की धमकी दी और वहां से चले गए।
घटना के बाद प्रोफेसर रमेश पांडेय ने शिवकुटी थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उनकी तहरीर के आधार पर प्रोफेसर राम प्रकाश तिवारी और उनके बेटे उत्कर्ष तिवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायत में हमले, मारपीट और धमकी दिए जाने की बात कही गई है। पुलिस अब घटना के पूरे क्रम, विवाद की वजह और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
शिकायतकर्ता ने यह आरोप भी लगाया है कि संबंधित पक्ष की ओर से पहले भी कई बार दुर्व्यवहार किया गया था। पुलिस इस पहलू की भी पड़ताल कर सकती है कि दोनों पक्षों के बीच पहले से कोई विवाद चल रहा था या नहीं और घटना के दिन कहासुनी किस वजह से शुरू हुई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल मामले में दर्ज शिकायत और पुलिस की विवेचना के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने संस्थान की स्टाफ कॉलोनी के आसपास सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर विवाद के दौरान हिंसा की स्थिति को लेकर सवाल खड़े किए हैं। शिकायत के अनुसार, घटना उस समय हुई जब दोनों लोग मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम के बाद टहल रहे थे। यदि किसी बात को लेकर असहमति थी, तो उसका समाधान कानूनी तरीके से किया जा सकता था, लेकिन मारपीट और जान से मारने की धमकी जैसे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
शिवकुटी पुलिस के अनुसार, तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना की जा रही है। जांच के दौरान घटना से जुड़े तथ्यों, दोनों पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस मामले में किसी पक्ष के आरोपों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद कैसे शुरू हुआ, मारपीट में किसकी क्या भूमिका रही और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं।









