अमेरिकी टैरिफ पर शशि थरूर की बड़ी चिंता: कहा- ‘75 फीसदी शुल्क के साथ कोई भी भारतीय कंपनी निर्यात नहीं कर पाएगी’

अमेरिकी टैरिफ पर शशि थरूर की बड़ी चिंता: कहा- ‘75 फीसदी शुल्क के साथ कोई भी भारतीय कंपनी निर्यात नहीं कर पाएगी’

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले ने वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की है।

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा एलान किया है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा। इस फैसले पर भारत में चिंता व्यक्त की गई है। विदेश मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वे शुरू से ही अमेरिकी टैरिफ से परेशान हैं। शशि थरूर ने कहा, 75 फीसदी टैरिफ पर कोई भी भारतीय कंपनी अमेरिका को निर्यात करने में सक्षम नहीं होगी।

शशि थरूर ने क्यों जताई गहरी चिंता?

समाचार एजेंसी से बातचीत में शशि थरूर ने कहा कि वह शुरू से ही अमेरिकी टैरिफ नीति को लेकर चिंतित रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, अगर टैरिफ बढ़कर 75 फीसदी तक पहुंच जाता है, तो कोई भी भारतीय कंपनी अमेरिका को निर्यात करने में सक्षम नहीं होगी। थरूर के मुताबिक, अमेरिका द्वारा भारत पर पहले से लगाए गए 25 फीसदी टैरिफ ही भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में नए प्रतिबंध भारतीय उद्योगों पर दोहरी मार साबित हो सकते हैं।

शशि थरूर ने इस मुद्दे को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के नजरिए से भी समझाया। उन्होंने बताया कि भारत के कई प्रतिस्पर्धी देशों पर अमेरिका अपेक्षाकृत कम टैरिफ लगा रहा है। उन्होंने कहा, दक्षिण-पूर्व एशिया के देश जैसे वियतनाम, थाईलैंड, इंडोनेशिया, यहां तक कि पाकिस्तान और बांग्लादेश पर भी अमेरिका सिर्फ 15 से 19 फीसदी टैरिफ लगा रहा है, जबकि भारत पर 25 फीसदी। ये सभी देश भारत के साथ श्रम-प्रधान उद्योगों में सीधी प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे भारतीय कंपनियों की स्थिति और कमजोर हो जाती है।

किन उद्योगों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

थरूर के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ का सीधा असर भारत के उन उद्योगों पर पड़ेगा जो बड़े पैमाने पर अमेरिका को निर्यात करते हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • रत्न और आभूषण उद्योग
  • समुद्री उत्पाद, खासकर झींगा (श्रिंप)
  • चमड़ा उद्योग
  • अन्य श्रम-प्रधान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर

इन क्षेत्रों में भारत पहले ही कड़ी वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है। यदि टैरिफ में और बढ़ोतरी होती है, तो भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे और उनकी मांग घट सकती है।

75 फीसदी टैरिफ कैसे बनेगा?

शशि थरूर ने विस्तार से बताया कि 75 फीसदी टैरिफ का आंकड़ा कैसे सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि:

  • भारत पर पहले से 25 फीसदी अमेरिकी टैरिफ लागू है।
  • रूस से जुड़े प्रतिबंधों के कारण इसमें 25 फीसदी और जुड़ चुका है, जिससे कुल टैरिफ 50 फीसदी हो गया है।
  • यदि ईरान से जुड़े प्रतिबंधों के तहत एक और 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया, तो यह आंकड़ा 75 फीसदी तक पहुंच जाएगा।
  • उनके मुताबिक, इतनी ऊंची दर पर व्यापार करना किसी भी भारतीय कंपनी के लिए व्यावहारिक रूप से असंभव होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी टैरिफ इसी तरह बढ़ता रहा, तो इसका असर भारत के निर्यात, रोजगार और विदेशी मुद्रा आय पर भी पड़ सकता है। अमेरिका भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। ऐसे में निर्यात में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

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