आंध्र प्रदेश शराब परिवहन मामले में पूर्व मंत्री करुमुरी नागेश्वर राव से SIT की पूछताछ
आंध्र प्रदेश के कथित शराब परिवहन घोटाले में SIT ने पूर्व मंत्री करुमुरी नागेश्वर राव से पूछताछ की। पांच दिन की हिरासत में जांच अधिकारी उनके बैंक लेनदेन, कथित धन प्रवाह और अन्य आरोपियों से संबंधों की जानकारी जुटा रहे हैं।
विजयवाड़ा: आंध्र प्रदेश के कथित शराब परिवहन घोटाले की जांच में नया घटनाक्रम सामने आया है। YSR Congress Party (YSRCP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री करुमुरी वेंकट नागेश्वर राव से मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को विशेष जांच दल यानी SIT ने पूछताछ की। जांच अधिकारियों ने उनसे बैंक लेनदेन, कथित धन के प्रवाह और मामले में शामिल अन्य आरोपियों के साथ उनके संबंधों को लेकर सवाल किए।
नागेश्वर राव को हैदराबाद की चंचलगुडा जेल से पुलिस हिरासत में लेकर विजयवाड़ा लाया गया था। इसके बाद उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया और SIT ने कथित शराब परिवहन अनियमितताओं को लेकर पूछताछ शुरू की। एक अदालत ने उन्हें 5 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक पांच दिन की SIT हिरासत में देने की अनुमति दी है।
यह मामला आंध्र प्रदेश State Beverages Corporation Limited (APSBCL) के शराब परिवहन ठेकों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ED भी इसी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रहा है।
बैंक खातों और धन के लेनदेन पर SIT की नजर
SIT की पूछताछ का मुख्य फोकस कथित वित्तीय लेनदेन और आरोपियों के बीच पैसों के प्रवाह पर है। जांच अधिकारी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि शराब परिवहन के ठेकों से जुड़े पैसों का कथित तौर पर किस तरह इस्तेमाल या हस्तांतरण किया गया।
रिपोर्टों के अनुसार, नागेश्वर राव से उनके बैंक खातों में हुए लेनदेन के अलावा अन्य आरोपियों के साथ उनके कथित कारोबारी और वित्तीय संबंधों के बारे में भी सवाल किए गए। जांच का एक अहम पहलू यह पता लगाना है कि परिवहन ठेकों और बाद में हुए कथित sub-contracting के बीच धन का प्रवाह किस तरह हुआ।
ED ने अपनी जांच में आरोप लगाया है कि APSBCL के शराब परिवहन ठेकों में कथित तौर पर ऐसी शर्तें तैयार की गईं, जिनसे कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचा। एजेंसी के अनुसार, इसके बाद sub-contracting के जरिए कथित तौर पर धन का diversion हुआ।
₹195.33 करोड़ के सरकारी नुकसान का आरोप
मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ED ने अपनी जांच में सरकारी खजाने को करीब ₹195.33 करोड़ के नुकसान का आरोप लगाया है। कुछ रिपोर्टों में इसे लगभग ₹200 करोड़ का शराब परिवहन घोटाला बताया गया है।
ED के अनुसार, जांच की शुरुआत आंध्र प्रदेश CID द्वारा दर्ज FIR और राज्य सरकार के Vigilance विभाग की शिकायत से हुई। एजेंसी ने जून 2026 में इस मामले में तलाशी अभियान भी चलाया था। हैदराबाद में कई परिसरों पर हुई कार्रवाई के दौरान दस्तावेज, नकदी और अन्य कथित आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई थी।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ₹195.33 करोड़ का आंकड़ा जांच एजेंसियों द्वारा लगाए गए नुकसान के आरोप से संबंधित है। मामले में अंतिम वित्तीय नुकसान और आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा।
ED ने अगस्त में किया था नागेश्वर राव को गिरफ्तार
करुमुरी नागेश्वर राव को 23 अगस्त 2026 को Enforcement Directorate ने Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया था। ED ने उन्हें मामले में एक कथित “key facilitator” बताया है।
एजेंसी के मुताबिक, नागेश्वर राव उस समय आंध्र प्रदेश की पिछली YSRCP सरकार में Civil Supplies Minister थे। शराब परिवहन ठेकों से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच में उनकी भूमिका एजेंसी के रडार पर आई।
ED ने गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष PMLA अदालत के सामने पेश किया था। बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और वह चंचलगुडा जेल में थे।
बेटे को भी ED ने गिरफ्तार किया था
इस मामले में नागेश्वर राव के बेटे करुमुरी सुनील कुमार की भूमिका भी जांच के दायरे में है। ED ने जून 2026 में सुनील कुमार को गिरफ्तार किया था।
ED के अनुसार, पिता-पुत्र से जुड़े परिसरों पर तलाशी के दौरान कई दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड मिले थे। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि कथित अपराध से हासिल धन का इस्तेमाल महंगी संपत्तियों, वाहनों और घड़ियों सहित अन्य खर्चों के लिए किया गया। इन आरोपों को नागेश्वर राव की कानूनी टीम ने चुनौती दी है।
जांच एजेंसी का कहना है कि कथित money trail को समझने के लिए परिवार से जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।
शराब परिवहन टेंडर में कथित गड़बड़ी क्या है?
मामले की जड़ APSBCL द्वारा शराब के परिवहन के लिए जारी किए गए tender contracts में बताई जा रही है। ED की जांच के अनुसार, इन ठेकों की शर्तों में कथित तौर पर बदलाव किए गए, जिससे कुछ विशेष कंपनियों को लाभ मिल सके।
एजेंसी ने आरोप लगाया है कि transport contracts के लिए दरें बाजार में प्रचलित दरों से काफी अधिक रखी गईं। एक रिपोर्ट के अनुसार, जांच में लगभग ₹35 प्रति किलोमीटर की दर और करीब ₹13 प्रति किलोमीटर की कथित सामान्य दर के बीच अंतर की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि ठेके हासिल करने के बाद कंपनियों ने किस तरह दूसरे पक्षों को काम sub-contract किया और उससे संबंधित भुगतान किस दिशा में गया।
हालांकि, इन सभी आरोपों को अभी जांच का हिस्सा माना जाना चाहिए। अदालत ने मामले में अंतिम रूप से दोष तय नहीं किया है।
नागेश्वर राव का क्या पक्ष है?
नागेश्वर राव ने अपनी गिरफ्तारी को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया था। उनके पक्ष ने अदालत में यह दलील भी दी थी कि उन्हें राजनीतिक पृष्ठभूमि और अपने बेटे से संबंध के आधार पर मामले में फंसाया गया है।
जुलाई 2026 में सामने आए एक अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, उनकी ओर से यह तर्क दिया गया था कि उनके बैंक खाते में कथित अपराध की आय सीधे तौर पर नहीं पाई गई है और अभियोजन का मामला मुख्य रूप से बयानों तथा दस्तावेजों पर आधारित है। उनके वकील ने यह भी कहा था कि उन्होंने जांच में सहयोग किया है और हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है।
इससे मामले में जांच एजेंसियों के आरोप और आरोपी पक्ष के बचाव के बीच स्पष्ट अंतर सामने आता है। अंतिम निष्कर्ष अदालत की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद ही निकलेगा।
SIT की पांच दिन की हिरासत क्यों महत्वपूर्ण है?
SIT को अदालत से मिली पांच दिन की हिरासत जांच के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दौरान अधिकारी नागेश्वर राव से सीधे सवाल करके कथित वित्तीय नेटवर्क और अन्य आरोपियों के साथ उनके संबंधों की जानकारी जुटाने की कोशिश कर सकते हैं।
विशेष रूप से बैंक खातों, परिवहन कंपनियों, sub-contracting agreements और अन्य आरोपियों के साथ संपर्क की जानकारी जांच का हिस्सा हो सकती है। SIT पहले से मामले में कुछ अन्य संदिग्धों और कंपनियों से पूछताछ कर चुकी है।
आंध्र प्रदेश में इस मामले की जांच राज्य स्तर पर SIT और केंद्रीय स्तर पर ED द्वारा की जा रही है। दोनों एजेंसियों की जांच के दायरे और कानूनी प्रावधान अलग हैं, हालांकि दोनों का संबंध शराब परिवहन ठेकों में कथित वित्तीय अनियमितताओं से है।
आगे क्या होगा?
SIT की पांच दिन की हिरासत 9 अक्टूबर 2026 तक है। इस अवधि में जांच अधिकारी नागेश्वर राव से पूछताछ के साथ-साथ उपलब्ध दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड से उनके जवाबों का मिलान कर सकते हैं।
इसके बाद उन्हें अदालत के सामने पेश किया जाएगा। दूसरी ओर, ED की PMLA जांच भी जारी रहेगी। एजेंसी पहले ही मामले में नागेश्वर राव, उनके बेटे सुनील कुमार और अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है।
इस मामले में आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच एजेंसियां कथित धन के प्रवाह, tender प्रक्रिया और आरोपियों के बीच संबंधों के संबंध में क्या साक्ष्य अदालत के सामने पेश करती हैं।
फिलहाल नागेश्वर राव पर लगे आरोप अदालती रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। इसलिए मामले की रिपोर्टिंग में जांच एजेंसियों के आरोपों और न्यायिक रूप से स्थापित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।












