अनिल अग्रवाल की वेदांता में बदलाव, NCLT ने दी पांच नई यूनिट्स बनाने की मंजूरी

अनिल अग्रवाल की वेदांता में बदलाव, NCLT ने दी पांच नई यूनिट्स बनाने की मंजूरी

वेदांता लिमिटेड को NCLT ने डीमर्जर की मंजूरी दी। कंपनी के कारोबार को पांच अलग यूनिट्स में बांटा जाएगा। इससे निवेशकों को अतिरिक्त शेयर और नए अवसर मिलेंगे, जबकि प्रत्येक यूनिट स्वतंत्र और अधिक प्रभावी ढंग से काम करेगी।

Business: अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली वेदांता लिमिटेड को मुंबई की नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने मंगलवार को बड़ा फैसला दिया। कोर्ट ने कंपनी को तेल, धातु और पावर सेक्टर के कारोबार को पांच अलग-अलग इकाइयों में बांटने की मंजूरी दे दी। इस मंजूरी के साथ वेदांता अपनी अलग-अलग बिजनेस यूनिट्स के लिए अलग रणनीति और पूंजी प्रबंधन कर सकेगी।

कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि डीमर्जर योजना लागू करने के लिए अब जरूरी कदम उठाए जाएंगे। उनका कहना है कि यह मंजूरी कंपनी के लिए बहुत अहम है क्योंकि इससे अलग-अलग सेक्टर में मजबूत और स्वतंत्र कंपनियां बनेंगी। वेदांता का लक्ष्य है कि यह पूरी प्रक्रिया 31 मार्च 2026 तक पूरी कर ली जाए।

शेयरहोल्डर्स और कर्जदारों से मिली पहले ही मंजूरी

वेदांता को इस योजना के लिए इस साल फरवरी में ही शेयरहोल्डर्स और कर्जदारों से मंजूरी मिल चुकी थी। असल में यह डीमर्जर प्लान 2023 में शुरू हुआ था। उस समय कंपनी ने 2020 में प्राइवेट बनाने की कोशिश की थी, जो सफल नहीं हो सकी। इसके बाद कंपनी ने नए प्लान के तहत अपने कारोबार को अलग-अलग यूनिट्स में बांटने की तैयारी शुरू की।

पांच नई कंपनियां बनेंगी

इस डीमर्जर के तहत वेदांता के कारोबार को पांच नई कंपनियों में बांटा जाएगा। इनमें शामिल हैं वेदांता एल्यूमिनियम, वेदांता ऑयल एंड गैस, वेदांता पावर, वेदांता आयरन एंड स्टील और वेदांता लिमिटेड। अंतिम कंपनी में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी जिंक उत्पादक और तीसरी सबसे बड़ी सिल्वर उत्पादक यूनिट शामिल होगी।

इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद हर वेदांता शेयरधारक को चार नई कंपनियों में से प्रत्येक में एक-एक अतिरिक्त शेयर मिलेगा। इसका मतलब यह है कि वर्तमान शेयरहोल्डर्स को अपने निवेश के मुकाबले नई यूनिट्स में भी हिस्सेदारी मिलेगी। इससे निवेशकों के लिए लाभ और शेयर की वैल्यू बढ़ने की संभावना है।

कंपनी की रणनीति

डीमर्जर योजना के बाद वेदांता की प्रत्येक यूनिट अपने बिजनेस सेक्टर में स्वतंत्र होकर काम करेगी। इसका मतलब है कि एल्यूमिनियम, पावर और तेल एवं गैस जैसी यूनिट्स अपने वित्तीय फैसले और निवेश रणनीति खुद तय करेंगी। इससे प्रत्येक सेक्टर की कार्यकुशलता बढ़ेगी और पूंजी का बेहतर उपयोग संभव होगा।

कंपनी का कहना है कि यह बदलाव निवेशकों के भरोसे को बढ़ाएगा और हर यूनिट के लिए प्रॉफिट की संभावना बढ़ेगी। स्वतंत्र यूनिट्स में ऑपरेशन होने से निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और मार्केट में प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलेगी।

निवेशकों के लिए अवसर

इस डीमर्जर से निवेशकों को नए अवसर मिलेंगे। प्रत्येक शेयरहोल्डर को अतिरिक्त शेयर मिलने के साथ-साथ भविष्य में यूनिट्स के प्रदर्शन पर भी लाभ मिलेगा। इससे निवेश की विविधता बढ़ेगी और अलग-अलग सेक्टर में संभावित रिटर्न का फायदा उठाया जा सकेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि डीमर्जर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वेदांता का मार्केट वैल्यू और शेयरधारकों का फायदा बढ़ सकता है। स्वतंत्र यूनिट्स के कारण कंपनियों के संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी और कॉर्पोरेट गवर्नेंस मजबूत होगा।

जानें समय सीमा

कंपनी का इरादा है कि यह डीमर्जर योजना 31 मार्च 2026 तक पूरी कर ली जाए। इसके लिए वेदांता अब आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कदम उठा रही है। प्रत्येक यूनिट के लिए अलग बोर्ड और प्रबंधन टीम तैयार की जाएगी। इसके अलावा शेयरहोल्डर्स को नई यूनिट्स में हिस्सेदारी का लेनदेन भी शुरू किया जाएगा।

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