Anthropic Report: AI से बढ़े साइबर अटैक, रूसी जासूसी से लेकर निगरानी और फ्रॉड तक बढ़ा दुरुपयोग

Anthropic की सितंबर 2026 रिपोर्ट में AI के बढ़ते दुरुपयोग का खुलासा हुआ। साइबर अटैक, रूसी जासूसी, निगरानी और फ्रॉड में AI एजेंट्स का इस्तेमाल बढ़ा।

Anthropic की सितंबर 2026 रिपोर्ट में दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच AI के दुरुपयोग के मामलों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में साइबर हमले, जासूसी, निगरानी, फ्रॉड और अन्य गतिविधियां शामिल हैं।

Anthropic Report: Anthropic की नई रिपोर्ट बताती है कि AI का इस्तेमाल अब सिर्फ कोड लिखने या तकनीकी सलाह लेने तक सीमित नहीं है। हमलावर AI एजेंट्स की मदद से साइबर हमलों के कई चरणों को स्वचालित कर रहे हैं। रिपोर्ट में रूसी-लिंक्ड जासूसी गतिविधियों, राजनीतिक निगरानी, ऑनलाइन फ्रॉड और अन्य खतरनाक इस्तेमाल के मामलों का भी उल्लेख किया गया है।

AI एजेंट्स से साइबर हमलों का तरीका बदल रहा

Anthropic की ‘Detecting and Countering Misuse of AI: September 2026’ रिपोर्ट दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कंपनी की Threat Intelligence Team द्वारा पहचाने गए मामलों पर आधारित है। यह Anthropic की चौथी ऐसी रिपोर्ट है, जिसमें Claude के दुरुपयोग के बदलते तरीकों का विश्लेषण किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक पहले हमलावर AI से मैलवेयर तैयार करने, किसी तकनीकी कमजोरी को समझने या फिशिंग ईमेल लिखने में मदद लेते थे। इसके बाद इंसान खुद हमले के अगले चरण पूरे करता था। अब यह तरीका बदल रहा है। AI एजेंट्स को एक साथ कई काम सौंपे जा रहे हैं।

Anthropic के अनुसार रिपोर्ट में शामिल ज्यादातर साइबर ऑपरेशंस में AI का इस्तेमाल सीधे संचालन के लिए किया गया। मल्टी-एजेंट सिस्टम को लक्ष्य की जानकारी जुटाने, सिस्टम में सेंध लगाने और चोरी किए गए डेटा को व्यवस्थित करने जैसे कामों में लगाया गया, जबकि इंसानों की भूमिका मुख्य रूप से लक्ष्य तय करने और नतीजों की समीक्षा तक सीमित रही।

कम तकनीकी क्षमता वाले हमलावरों को भी मिल रही मदद

रिपोर्ट की एक अहम बात यह है कि AI ने जटिल साइबर हमलों के लिए जरूरी तकनीकी विशेषज्ञता और संसाधनों की जरूरत को कम कर दिया है। Anthropic ने बताया कि राज्य समर्थित समूहों, आर्थिक लाभ के लिए काम करने वाले अपराधियों और व्यक्तिगत ऑपरेटरों ने ऐसी गतिविधियां कीं, जिनके लिए पहले विशेषज्ञों की पूरी टीम की जरूरत पड़ सकती थी।

AI की मदद से लक्ष्य की पहचान, टूल तैयार करना, बड़ी मात्रा में डेटा को प्रोसेस करना और उसे बाहर निकालना जैसे काम तेजी से किए जा सकते हैं। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध एजेंट फ्रेमवर्क और offensive AI tools की बढ़ती उपलब्धता इस खतरे को और बढ़ा रही है।

इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण असर यह है कि किसी साइबर हमले की तकनीकी जटिलता से हमलावर की वास्तविक विशेषज्ञता का अनुमान लगाना पहले जितना आसान नहीं रह जाएगा। कम अनुभव वाला व्यक्ति भी AI की मदद से अपेक्षाकृत जटिल गतिविधियां अंजाम दे सकता है।

रूसी-लिंक्ड समूह ने AI का इस्तेमाल कैसे किया

रिपोर्ट में GTG-20006 नाम से पहचाने गए एक threat actor का भी उल्लेख है। Anthropic के आकलन के मुताबिक इसकी गतिविधियां सार्वजनिक रिपोर्टिंग में रूसी-लिंक्ड Midnight Blizzard से जोड़ी गई हैं।

इस समूह ने यूक्रेन, यूरोप और कुछ अन्य स्थानों में सैन्य खुफिया संगठनों, सरकारी एजेंसियों, राजनयिक संस्थानों और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों को निशाना बनाया। रिपोर्ट के अनुसार ऑपरेशन के कई चरणों में AI का इस्तेमाल किया गया।

हमलावरों ने लक्ष्य की जानकारी जुटाने, फिशिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने, प्रभावित सिस्टम तक पहुंच बनाए रखने, डेटा निकालने और मैलवेयर में बदलाव करने के लिए AI का उपयोग किया। खास तौर पर मैलवेयर को सुरक्षा प्रणालियों से बचाने के लिए बदलना चिंता का विषय है।

Anthropic के मुताबिक AI एजेंट यह जांचने में मदद कर सकते थे कि सुरक्षा उत्पादों ने मैलवेयर को पहचान लिया है या नहीं। पहचान होने पर मैलवेयर में बदलाव करके उसे दोबारा तैयार करने की कोशिश की जाती थी। इस प्रक्रिया को जरूरत के अनुसार दोहराया जा सकता था।

AI से हमलों को बड़े पैमाने पर दोहराना आसान

Anthropic की रिपोर्ट में बताया गया है कि AI का एक बड़ा फायदा हमलावरों के लिए इसकी scalability है। अध्ययन किए गए एक समूह ने 20 से ज्यादा संगठनों को निशाना बनाया और लक्ष्य पर शोध करने से लेकर फिशिंग इंफ्रास्ट्रक्चर चलाने तथा चोरी किए गए डेटा को प्रोसेस करने तक कई गतिविधियों में AI का इस्तेमाल किया।

एक मामले में हमलावरों ने सैकड़ों गीगाबाइट चोरी किए गए डेटा को व्यवस्थित करने के लिए AI का इस्तेमाल किया। इसका मतलब यह है कि AI जरूरी नहीं कि किसी बिल्कुल नए तरह के साइबर हमले का आविष्कार करे। मौजूदा हमलों को तेज, सस्ता और बार-बार दोहराने योग्य बनाना भी उनके प्रभाव को काफी बढ़ा सकता है।

रिपोर्ट में साइबर हमलों के अलावा निगरानी, फ्रॉड, प्रभाव अभियान, जैविक जोखिम, पारंपरिक हथियारों और AI मॉडल की क्षमताओं को अवैध तरीके से निकालने के प्रयासों का भी जिक्र है। इसमें संदिग्ध राज्य समर्थित समूहों, अपराधियों, व्यावसायिक स्पाइवेयर कंपनियों और राजनीतिक रूप से प्रेरित लोगों सहित अलग-अलग तरह के अभिनेता शामिल थे।

निगरानी और फ्रॉड में भी AI का दुरुपयोग

रिपोर्ट में एक ऐसे फर्जी डेटिंग ऐप नेटवर्क का उल्लेख है, जिसका इस्तेमाल लोगों को ठगने के लिए किया गया। एक अन्य मामले में निगरानी प्रणालियों का इस्तेमाल असंतुष्ट लोगों की पहचान और निगरानी के लिए किए जाने की बात सामने आई।

इन मामलों में एक समान बात यह रही कि AI ने उन गतिविधियों की लागत और मानव प्रयास को कम कर दिया, जिनके लिए पहले ज्यादा विशेषज्ञता या संगठनात्मक संसाधनों की जरूरत होती थी।

Anthropic का कहना है कि इससे साइबर सुरक्षा के पारंपरिक तरीकों को भी बदलने की जरूरत होगी। सुरक्षा टीमों को AI का इस्तेमाल केवल हमलों का जवाब देने के लिए नहीं, बल्कि कमजोरियों की पहचान, संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने और सिस्टम को पहले से मजबूत करने के लिए भी करना होगा।

हालांकि रिपोर्ट यह नहीं कहती कि साइबर हमले पूरी तरह स्वायत्त हो चुके हैं। कई मामलों में इंसानों की भूमिका अभी भी बनी हुई है। फर्क इतना है कि हमलावर अब हर चरण खुद पूरा करने के बजाय लक्ष्य और निर्देश तय करके AI सिस्टम को बड़े हिस्से का काम सौंप सकता है। ऐसे में भविष्य में हमलावर की तकनीकी विशेषज्ञता से ज्यादा महत्वपूर्ण उसके पास उपलब्ध AI टूल्स और उन्हें प्रभावी ढंग से संचालित करने की क्षमता हो सकती है।

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