Sridhar Vembu का AI पर बड़ा बयान, बोले- कुछ महीनों में गणित और कोडिंग पर पड़ सकता है बड़ा असर

Zoho फाउंडर Sridhar Vembu ने AI के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई। बोले, कुछ महीनों में गणित और कोडिंग का बड़ा हिस्सा AI के दायरे में आ सकता है।

Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बु ने AI के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में गणित और सॉफ्टवेयर कोडिंग का बड़ा हिस्सा AI के दायरे में आ सकता है और सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स को अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने पर विचार करना होगा।

Tech: Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बु ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि कुछ ही महीनों में गणित का बड़ा हिस्सा AI के दायरे में आ सकता है। वेम्बु ने सॉफ्टवेयर क्षेत्र में काम करने वाले लोगों से यह सोचने को कहा कि AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच वे अपनी अहमियत कैसे बनाए रख सकते हैं।

श्रीधर वेम्बु ने AI को लेकर क्या कहा

श्रीधर वेम्बु ने X पर एक पोस्ट में कहा कि लोगों को इस संभावना को स्वीकार करना होगा कि कुछ ही महीनों में पूरा गणित AI के दायरे में आ सकता है, भले ही यह संभावना परेशान करने वाली क्यों न हो।

Sridhar Vembu का AI पर बड़ा बयान, बोले- कुछ महीनों में गणित और कोडिंग पर पड़ सकता है बड़ा असर

उन्होंने गणित के उस हिस्से का भी जिक्र किया, जिसमें शतरंज की तरह लगातार बेहतर चाल या समाधान तलाशने की जरूरत होती है। उनके मुताबिक, ऐसे कामों में AI इंसानों को पीछे छोड़ सकता है।

वेम्बु ने सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में काम करने वाले लोगों को भी इस बदलाव को गंभीरता से लेने की सलाह दी। उनका कहना है कि सॉफ्टवेयर से जुड़े लोगों को अब यह विचार करना होगा कि AI के दौर में वे अपनी उपयोगिता और अहमियत किस तरह बनाए रख सकते हैं।

कोडिंग और प्रोग्रामिंग पर भी AI का असर

श्रीधर वेम्बु के मुताबिक, सॉफ्टवेयर कोड का एक बड़ा हिस्सा AI की मदद से सही तरीके से तैयार किया जा सकता है। इसके बाद AI द्वारा बनाए गए कोड को वेरिफाई करने के लिए भी AI का इस्तेमाल बढ़ सकता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि मुद्दा सिर्फ यह नहीं है कि AI कितना काम कर सकता है, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि ऐसे कामों को पूरा करने के लिए भविष्य में कितने इंसानों की जरूरत होगी। उनके अनुसार, इस सवाल का मौजूदा जवाब सोचने और चिंता करने पर मजबूर करता है।

वेम्बु ने कहा कि सॉफ्टवेयर क्षेत्र में काम करने वाले सभी लोगों को यह सोचना होगा कि वे बदलती तकनीक के बीच अपनी अहमियत कैसे बरकरार रखें।

क्या प्रोग्रामिंग की नौकरियों पर भी असर पड़ेगा?

वेम्बु ने उन लोगों की धारणा पर भी सवाल उठाया कि AI नए विचार पैदा नहीं कर सकता। उनका कहना है कि इंसान भी बहुत कम नए विचार खोज पाते हैं और AI इस स्तर तक पहुंच सकता है।

उन्होंने 'Lean' जैसे मैथमेटिकल वेरिफिकेशन टूल्स का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, ऐसे टूल्स की मदद से AI ऐसे कोड तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है, जिन्हें गणितीय रूप से वेरिफाई किया जा सके। इससे प्रोग्रामिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में इंसानी भूमिका पर भी सवाल उठ सकते हैं।

हालांकि, वेम्बु की टिप्पणियां AI के संभावित प्रभाव को लेकर उनका आकलन हैं। इन्हें इस रूप में नहीं देखा जाना चाहिए कि आने वाले कुछ महीनों में प्रोग्रामिंग या सॉफ्टवेयर से जुड़ी सभी नौकरियां समाप्त हो जाएंगी।

केरल में डीप टेक पर जोहो का फोकस

श्रीधर वेम्बु ने अपने एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में केरल सरकार का धन्यवाद भी किया। उन्होंने बताया कि जोहो डीप टेक इकोसिस्टम में निवेश कर रहा है।

इससे संकेत मिलता है कि AI और डीप टेक के तेजी से बदलते दौर में जोहो केवल मौजूदा सॉफ्टवेयर कारोबार तक सीमित रहने के बजाय नई तकनीकी क्षमताओं और इकोसिस्टम में भी निवेश पर ध्यान दे रहा है।

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