कच्चे तेल की महंगाई से शेयर बाजार पर दबाव, अक्टूबर में ₹53,337 करोड़ की बिकवाली

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से शेयर बाजार पर दबाव है। अक्टूबर में FPI ने ₹53,337 करोड़ के शेयर बेचे। जानें विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बाजार का हाल।

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है। अक्टूबर में एफपीआई ने एक्सचेंजों के जरिए 53,337 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और रुपये की मजबूती से हाल में बिकवाली की रफ्तार धीमी हुई है।

Business: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश पर दिखाई दे रहा है। अक्टूबर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने बड़ी मात्रा में शेयर बेचे हैं। लगातार दस सप्ताह की बिकवाली के बाद पिछले कारोबारी सप्ताह में कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन बाजार पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने तक विदेशी निवेशकों का रुख सतर्क रह सकता है।

अक्टूबर में विदेशी निवेशकों ने कितने शेयर बेचे?

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अक्टूबर 2026 में अब तक भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों के जरिए 53,337 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। हालांकि, इसी दौरान उन्होंने आईपीओ बाजार में 5,281 करोड़ रुपये का निवेश भी किया है।

कच्चे तेल की महंगाई से शेयर बाजार पर दबाव, अक्टूबर में ₹53,337 करोड़ की बिकवाली

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार, इस साल एक्सचेंजों के जरिए विदेशी निवेशकों की कुल बिकवाली 3,69,164 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

यह आंकड़ा बताता है कि विदेशी निवेशक काफी समय से भारतीय शेयरों में अपनी हिस्सेदारी घटा रहे हैं। हालांकि, आईपीओ में पैसा लगाने से संकेत मिलता है कि उनकी दिलचस्पी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

इस बीच, पीटीआई की एक अन्य रिपोर्ट में डिपॉजिटरी आंकड़ों के आधार पर अक्टूबर की शुद्ध इक्विटी निकासी 48,056 करोड़ रुपये बताई गई है। दोनों आंकड़ों में अंतर का कारण रिपोर्टिंग का अलग आधार है। 

कच्चे तेल की महंगाई क्यों बढ़ा रही चिंता?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ता है। इसका असर रुपये, महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है।

ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजार को लेकर सतर्क हैं। तेल के दाम ऊंचे बने रहने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ने का खतरा भी रहता है।

विश्लेषकों के मुताबिक, जब तक कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी राहत नहीं मिलती, तब तक विदेशी निवेशकों की बिकवाली दोबारा तेज होने की आशंका बनी रहेगी।

लगातार दसवें सप्ताह बिकवाली, फिर कैसे मिली थोड़ी राहत?

विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार दसवें सप्ताह शुद्ध बिकवाल रहे। हालांकि, 23 अक्टूबर को समाप्त कारोबारी सप्ताह में उनकी बिकवाली पहले के मुकाबले काफी कम रही। इस दौरान दो कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों ने शुद्ध खरीदारी भी की।

इस बदलाव के पीछे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट को एक अहम वजह माना जा रहा है। अमेरिका के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 5.36 प्रतिशत से घटकर करीब 5 प्रतिशत पर आ गई।

इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये का मजबूत होकर 94.94 के स्तर पर पहुंचना भी मददगार रहा। बड़े शेयरों के मूल्यांकन में आई नरमी ने विदेशी निवेशकों के लिए कुछ कंपनियों को आकर्षक बनाया है। 

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बड़ी गिरावट

पिछले सप्ताह शेयर बाजार में सबसे ज्यादा नुकसान छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में देखने को मिला। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 7.3 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप 100 में 5.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।

इसके मुकाबले निफ्टी 50 इंडेक्स 2.35 प्रतिशत नीचे आया। इससे पता चलता है कि बड़ी कंपनियों के शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।

विश्लेषकों का मानना है कि मिडकैप और स्मॉलकैप में तेज गिरावट की एक संभावित वजह मार्जिन पर खरीदे गए शेयरों की जबरन बिकवाली हो सकती है। जब गिरावट बढ़ने पर निवेशक जरूरी मार्जिन नहीं दे पाते, तो उनकी पोजीशन काटनी पड़ सकती है। इससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनता है। 

घरेलू निवेशकों की खरीदारी से बड़ी कंपनियों को सहारा

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बावजूद कई लार्जकैप शेयरों में गिरावट सीमित रही। इसकी एक वजह घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी है।

म्यूचुअल फंड और दूसरे घरेलू निवेश संस्थान बाजार में पैसा लगा रहे हैं। इससे विदेशी पूंजी निकलने के असर को कुछ हद तक कम करने में मदद मिली है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, जिन बड़ी कंपनियों के शेयरों का मूल्यांकन गिरावट के बाद उचित स्तर पर पहुंचा है, उनमें घरेलू निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।

अगले सप्ताह शेयर बाजार में किन बातों पर रहेगी नजर?

सोमवार, 26 अक्टूबर से शेयर बाजार में नया कारोबारी सप्ताह शुरू होगा। इस दौरान निवेशकों की नजर सबसे ज्यादा कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर रहेगी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में होने वाला बदलाव भी बाजार के लिए अहम होगा। खासकर यह देखना होगा कि विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से पैसा निकालना जारी रखते हैं या फिर खरीदारी की ओर लौटते हैं।

अमेरिका में फेडरल रिजर्व की बैठक भी इस सप्ताह अहम रहेगी। ब्याज दरों को लेकर आने वाले फैसले से भारतीय बाजार में हलचल बढ़ सकती है। वहीं, कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे आने हैं। इन नतीजों के आधार पर संबंधित कंपनियों के शेयरों में खरीदारी या बिकवाली देखने को मिल सकती है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव से जुड़ी खबरों पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

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