अगले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार की चाल कंपनियों के तिमाही नतीजों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। जियो प्लेटफॉर्म्स की प्रस्तावित लिस्टिंग और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर भी नजर रहेगी।
Business: पिछले सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी में आई तेज गिरावट के बाद सोमवार, 26 अक्टूबर से शुरू होने वाला कारोबारी सप्ताह निवेशकों के लिए अहम रहेगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार घरेलू कंपनियों के वित्तीय नतीजों के साथ अमेरिका से आने वाली खबरें भी बाजार को प्रभावित कर सकती हैं। खासकर फेडरल रिजर्व की ब्याज दर संबंधी बैठक और पश्चिम एशिया में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव पर निवेशकों की नजर रहेगी।
पिछले सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी गिरावट आई?
भारतीय शेयर बाजार के लिए 19 से 23 अक्टूबर का सप्ताह निराशाजनक रहा। छुट्टी के कारण केवल चार दिन कारोबार हुआ, लेकिन इस दौरान प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स 1,605.44 अंक यानी 2.15 प्रतिशत टूटकर 73,123.83 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 546.15 अंक यानी 2.36 प्रतिशत फिसलकर 22,600 के स्तर पर आ गया।
![]()
बाजार पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और पश्चिम एशिया के तनाव का दबाव दिखाई दिया। ऐसे में अगले सप्ताह निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि बाजार में गिरावट थमेगी या बिकवाली का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
कंपनियों के तिमाही नतीजों से तय होगी शेयरों की चाल
अगले सप्ताह कई बड़ी कंपनियां जुलाई से सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजे पेश करने वाली हैं। इनमें टीवीएस मोटर, एशियन पेंट्स, ट्रेंट, सन फार्मा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इंडियन ऑयल, बैंक ऑफ बड़ौदा और गेल इंडिया जैसे नाम शामिल हैं।
निवेशक इन कंपनियों के मुनाफे और आमदनी के साथ कारोबार की लागत और भविष्य की योजनाओं पर भी ध्यान देंगे। जिन कंपनियों के नतीजे बाजार की उम्मीदों से बेहतर रहेंगे, उनके शेयरों में खरीदारी देखने को मिल सकती है। कमजोर नतीजे आने पर संबंधित शेयर दबाव में रह सकते हैं।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा के मुताबिक, घरेलू आर्थिक आंकड़े भी महत्वपूर्ण होंगे। निवेशक 28 अक्टूबर को जारी होने वाले सितंबर के औद्योगिक और विनिर्माण उत्पादन के आंकड़ों का आकलन करेंगे। इससे देश में औद्योगिक गतिविधियों की स्थिति का संकेत मिलेगा।
अमेरिकी फेड के फैसले पर टिकी दुनियाभर के निवेशकों की नजर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक 27 और 28 अक्टूबर को निर्धारित है। ब्याज दरों को लेकर होने वाला फैसला भारतीय शेयर बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण रहेगा। निवेशक केवल दरों में बदलाव नहीं, बल्कि फेड के नीतिगत बयान पर भी ध्यान देंगे।
एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और सीईओ हरिसेल्वन राधाकृष्णन के अनुसार, बाजार फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम मान रहा है। इसलिए आगे की मौद्रिक नीति को लेकर मिलने वाले संकेत ज्यादा महत्वपूर्ण होंगे।
यदि फेडरल रिजर्व महंगाई पर सख्त रुख बनाए रखता है, तो अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती आ सकती है। इससे भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश प्रभावित होने की आशंका रहेगी। दूसरी तरफ, नरम नीतिगत संकेत मिलने पर शेयर बाजारों को कुछ राहत मिल सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ सकती है परेशानी
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें भारतीय बाजार के लिए बड़ी चिंता बनी हुई हैं। बीते सप्ताह ब्रेंट क्रूड की कीमत 117 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंची थी। तेल महंगा होने का असर भारत के आयात खर्च और कई उद्योगों की लागत पर पड़ सकता है।
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि तेल की कीमतों में लगातार तेजी रहने पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। इससे रुपये की स्थिति और कंपनियों के मुनाफे पर भी असर पड़ने की आशंका है।
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर एयरलाइंस, पेंट, केमिकल और परिवहन से जुड़ी कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। निवेशक पश्चिम एशिया की गतिविधियों के साथ तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव पर नजर रखेंगे।
जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग भी रहेगी चर्चा में
इन तीन बड़े कारणों के अलावा जियो प्लेटफॉर्म्स की प्रस्तावित शेयर बाजार लिस्टिंग भी निवेशकों का ध्यान खींचेगी। कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को होने की उम्मीद है। इस बड़े आईपीओ के प्रति निवेशकों की प्रतिक्रिया का असर प्राथमिक बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है।
इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी और बिकवाली भी महत्वपूर्ण रहेगी। लगातार बिकवाली होने पर बाजार पर दबाव बना रह सकता है, जबकि निवेश बढ़ने से प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिलने की संभावना है।
फिलहाल निवेशकों के लिए 26 से 30 अक्टूबर का कारोबारी सप्ताह महत्वपूर्ण रहेगा। तिमाही नतीजों, अमेरिकी फेड के फैसले और कच्चे तेल की चाल से बाजार की दिशा के संकेत मिलेंगे। शेयर बाजार से जुड़ी नई जानकारी और कंपनियों के वित्तीय नतीजों के लिए बीएसई, एनएसई तथा संबंधित कंपनियों की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखें।










