इसरो अध्यक्ष वी नारायणन ने साफ किया है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का निजीकरण नहीं होगा। हालांकि, अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़े कुछ व्यावसायिक कार्य निजी कंपनियां संभालेंगी। उन्होंने कहा कि इससे देश में रोजगार और अंतरिक्ष उद्योग के विस्तार के अवसर बढ़ेंगे।
Tech: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के निजीकरण को लेकर चल रही चर्चाओं पर अध्यक्ष वी नारायणन ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इसरो भारत सरकार के अधीन ही काम करता रहेगा। अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी का मतलब यह नहीं है कि सरकारी अंतरिक्ष एजेंसी को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। उन्होंने बताया कि कुछ काम व्यावसायिक आधार पर निजी कंपनियों से कराए जाएंगे।
निजी कंपनियां काम करेंगी, लेकिन इसरो सरकारी ही रहेगा
इसरो अध्यक्ष वी नारायणन ने चेन्नई के पोरूर स्थित श्री रामचंद्र उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के दीक्षांत समारोह में अंतरिक्ष क्षेत्र में हो रहे बदलावों पर बात की। उन्होंने कहा कि सरकार निजी कंपनियों को अंतरिक्ष कार्यक्रम में अधिक अवसर दे रही है, लेकिन इससे इसरो की पहचान और सरकारी नियंत्रण पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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दरअसल, पिछले कुछ समय से इसरो के रॉकेट और सैटेलाइट निर्माण से जुड़े काम निजी कंपनियों को दिए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी पर नारायणन ने कहा कि व्यावसायिक गतिविधियों में कंपनियों की हिस्सेदारी को निजीकरण समझना गलत होगा।
उनके मुताबिक, इसरो नई तकनीक विकसित करने और देश के महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों पर काम करता रहेगा। निजी कंपनियां उन क्षेत्रों में योगदान देंगी, जहां बड़े पैमाने पर निर्माण और व्यावसायिक सेवाओं की जरूरत है।
रॉकेट लॉन्चिंग के बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा निजी उद्योगों को
नारायणन ने बताया कि भारत में अंतरिक्ष कार्यक्रम का दायरा काफी बढ़ चुका है। देश के पास फिलहाल 56 सैटेलाइट हैं, जबकि आने वाले समय में हजारों सैटेलाइट की जरूरत पड़ सकती है।
इतनी बड़ी मांग को पूरा करने के लिए केवल सरकारी संस्थानों पर निर्भर रहना आसान नहीं होगा। इसलिए निजी कंपनियों की निर्माण क्षमता का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जब इसरो का पीएसएलवी या जीएसएलवी रॉकेट लॉन्च होता है, तो उससे जुड़े बजट का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा निजी उद्योगों तक पहुंचता है। ये कंपनियां रॉकेट के लिए जरूरी उपकरण, पुर्जे और दूसरी तकनीकी सामग्री तैयार करने में योगदान देती हैं।
इसरो अध्यक्ष के अनुसार, इस व्यवस्था को सरकारी अंतरिक्ष एजेंसी के निजीकरण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
2023 की अंतरिक्ष नीति से निजी कंपनियों को मिले नए अवसर
भारत सरकार ने वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने के लिए सुधार शुरू किए थे। इसके बाद भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 लागू की गई। इसमें सरकारी संस्थानों और निजी कंपनियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट की गई हैं।
इस नीति के तहत निजी कंपनियों को सैटेलाइट बनाने, रॉकेट विकसित करने और अंतरिक्ष सेवाओं से जुड़े कारोबार में हिस्सा लेने की अनुमति मिली है।
निजी कंपनियों की गतिविधियों को बढ़ावा देने और जरूरी मंजूरी देने के लिए IN-SPACe की व्यवस्था है। वहीं, न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) अंतरिक्ष तकनीक और सेवाओं के व्यावसायिक इस्तेमाल से जुड़े कार्य संभालती है।
इसरो की जिम्मेदारी नई तकनीक विकसित करने, वैज्ञानिक अनुसंधान और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मिशनों को आगे बढ़ाने की रहेगी।
अंतरिक्ष क्षेत्र में युवाओं के लिए बढ़ सकते हैं रोजगार के अवसर
वी नारायणन ने कहा कि निजी कंपनियों और स्टार्टअप की भागीदारी से देश में अंतरिक्ष उद्योग का विस्तार होगा। इससे नई तकनीक विकसित करने के साथ रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है। इसरो की सितंबर 2026 में जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, देश में 450 से अधिक अंतरिक्ष स्टार्टअप काम कर रहे हैं।
ये कंपनियां सैटेलाइट, रॉकेट, संचार उपकरण, पृथ्वी की निगरानी और दूसरी अंतरिक्ष सेवाओं पर काम कर रही हैं। इसरो का मानना है कि निजी उद्योगों को पहले से विकसित तकनीक उपलब्ध कराने से बड़े पैमाने पर उत्पादन आसान होगा।
30 अक्टूबर को NVS-03 सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी
निजीकरण पर स्थिति स्पष्ट करने के साथ इसरो अध्यक्ष ने आगामी अंतरिक्ष अभियानों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 का प्रक्षेपण 30 अक्टूबर 2026 के लिए निर्धारित है।
नारायणन के मुताबिक, लॉन्च की तैयारियां तय कार्यक्रम के अनुसार चल रही हैं। 24 अक्टूबर को प्रक्षेपण यान लॉन्च पैड तक पहुंचा दिया गया था।
उन्होंने बताया कि इसरो ने गगनयान मिशन की तैयारियों में भी प्रगति की है। इसके रॉकेट और क्रू एस्केप सिस्टम को विकसित किया जा चुका है। अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी प्रणालियों पर भी काम हुआ है।
गगनयान के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले तीन मानवरहित उड़ानों की योजना है। नारायणन के अनुसार, मिशन की तैयारियों के सिलसिले में जमीन पर करीब आठ हजार परीक्षण किए जा चुके हैं।
चंद्रयान-4 को लेकर भी सामने आई जानकारी
इसरो अध्यक्ष ने चंद्रयान-4 मिशन के बारे में भी बताया। इस अभियान के जरिए चंद्रमा की सतह से नमूने एकत्र करके उन्हें पृथ्वी पर वापस लाने की योजना है।
उन्होंने कहा कि इस मिशन को वर्ष 2028 में अंजाम देने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, अंतरिक्ष अभियानों की अंतिम समयसीमा तकनीकी तैयारियों और जरूरी परीक्षणों पर निर्भर करती है।
नारायणन के बयान से स्पष्ट है कि भारत सरकार अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना चाहती है, लेकिन इसरो का सरकारी स्वरूप बरकरार रहेगा। सितंबर 2026 में भी इसरो ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा था कि न तो उसका निजीकरण किया जाएगा और न ही देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम में उसकी भूमिका कम होगी।









