बोकारो/रांची: झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। इसी बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सरकार जांच को लेकर ईमानदार है तो उसे CBI से जांच कराने में पीछे नहीं हटना चाहिए।
JPSC और JSSC की परीक्षाओं को लेकर पिछले कई दिनों से अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों का आंदोलन जारी रहा है। छात्रों की प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता शामिल रही है। आंदोलन के दबाव के बीच राज्य सरकार ने विवादित परीक्षाओं को रद्द करने समेत कई मांगों पर फैसला लिया, लेकिन CBI जांच को लेकर छात्रों का एक वर्ग अब भी संतुष्ट नहीं है।
अर्जुन मुंडा ने इसी मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना है कि सरकारी नौकरी की परीक्षा में शामिल होने वाले युवा वर्षों तक तैयारी करते हैं। परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर सबसे ज्यादा नुकसान उन्हीं अभ्यर्थियों का होता है। ऐसे में जांच ऐसी एजेंसी से होनी चाहिए, जिस पर सभी पक्षों को भरोसा हो।
भाजपा नेता ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि यदि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और वह वास्तव में पारदर्शी जांच चाहती है तो CBI जांच से परहेज क्यों किया जा रहा है। उनके बयान के बाद भर्ती विवाद को लेकर झारखंड की राजनीति और गरमा गई है।
दरअसल, JPSC-JSSC भर्ती विवाद को लेकर छात्रों ने लंबे समय तक आंदोलन किया। धरना, भूख हड़ताल और विधानसभा घेराव जैसे कदमों के जरिए अभ्यर्थियों ने सरकार पर दबाव बनाया। 24 दिनों तक चले आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने JSSC-CGL समेत TDPL द्वारा आयोजित कई विवादित भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। हालांकि, छात्रों के एक वर्ग ने कहा कि केवल परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं है और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी है।
इस विवाद का एक बड़ा मुद्दा 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा भी है। सरकार की ओर से विवादित परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला सामने आने के बाद भी कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर सवाल बने हुए हैं। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित है।
छात्रों का तर्क है कि सिर्फ परीक्षा रद्द करने से उन अभ्यर्थियों की समस्या खत्म नहीं होगी, जिन्होंने लंबे समय तक तैयारी की और परीक्षा में शामिल हुए। वे चाहते हैं कि यह भी सामने आए कि आखिर परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी कैसे हुई, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए क्या व्यवस्था बनाई जाएगी।
राज्य सरकार ने अपनी ओर से जांच और परीक्षा सुधार की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। सरकार के स्तर पर भर्ती परीक्षाओं की व्यापक जांच के लिए समिति और जांच तंत्र की चर्चा सामने आई है। वहीं JPSC-JSSC मामलों की जांच के लिए राज्य की एजेंसियां भी सक्रिय हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के लिए सात IPS अधिकारियों समेत बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों की टीम बनाई गई है।
लेकिन विपक्ष का कहना है कि राज्य की एजेंसियों से जांच कराने के बजाय केंद्रीय एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए, ताकि जांच पर राजनीतिक प्रभाव का सवाल न उठे। भाजपा इसी मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रही है।
अर्जुन मुंडा के बयान को इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। उन्होंने सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामले में किसी तरह की अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए। भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच के जरिए दोषियों की पहचान होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
वहीं कांग्रेस और सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से भाजपा नेताओं के आरोपों का जवाब भी दिया गया है। कांग्रेस प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने अर्जुन मुंडा समेत भाजपा नेताओं पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा नेताओं को वर्तमान सरकार पर सवाल उठाने से पहले अपने शासनकाल के भर्ती विवादों का भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने पूर्व के JPSC विवादों का उल्लेख करते हुए भाजपा नेताओं के आरोपों पर सवाल उठाए।
इस तरह JPSC-JSSC भर्ती विवाद अब सिर्फ परीक्षा और अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहा है। मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का भी केंद्र बन गया है। एक तरफ भाजपा सरकार से CBI जांच की मांग कर रही है, वहीं सत्ता पक्ष भाजपा के पुराने शासनकाल से जुड़े भर्ती विवादों का हवाला देकर पलटवार कर रहा है।
इस पूरे विवाद के बीच सबसे ज्यादा चिंता उन अभ्यर्थियों की है, जिन्होंने सरकारी नौकरी की उम्मीद में वर्षों तक तैयारी की। परीक्षा रद्द होने के बाद उनके सामने दोबारा परीक्षा देने की चुनौती है। कई उम्मीदवारों के लिए उम्र सीमा और भर्ती कैलेंडर भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। ऐसे में नई परीक्षा कब होगी और चयन प्रक्रिया कितने समय में पूरी होगी, इस पर भी सरकार को स्पष्टता देनी होगी।
छात्रों का आंदोलन इस बात का संकेत है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर युवाओं की चिंता कितनी गंभीर है। आंदोलन के दौरान छात्रों ने बार-बार मांग की कि परीक्षा प्रक्रिया में शामिल हर स्तर की जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि कहीं पेपर लीक, प्रश्नपत्र या परिणाम से जुड़ी अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
फिलहाल विवाद का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव जांच को लेकर है। राज्य सरकार की जांच प्रक्रिया और CBI जांच की मांग के बीच राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर मामला आगे बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट में भी JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई का रास्ता खुला है।
अर्जुन मुंडा के बयान से साफ है कि भाजपा इस मुद्दे को युवाओं और सरकारी भर्ती की पारदर्शिता से जोड़कर सरकार को घेरने की तैयारी में है। दूसरी ओर सरकार ने विवादित परीक्षाओं को रद्द करने और जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के कदम उठाए हैं। अब निगाह इस बात पर है कि जांच किस एजेंसी से होती है, उसकी रिपोर्ट में क्या सामने आता है और प्रभावित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर सरकार क्या ठोस कदम उठाती है।











