बरवाअड्डा थाने में विधायक जयराम महतो और मुखिया समर्थक भिड़े: दोनों पक्षों ने दर्ज कराई FIR, सांसद प्रतिनिधि समेत कई पर आरोप

धनबाद के बरवाअड्डा थाने में विधायक जयराम महतो और मुखिया समर्थकों के बीच मारपीट हुई। दोनों पक्षों ने FIR दर्ज कराकर एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए।
बरवाअड्डा थाने में विधायक जयराम महतो और मुखिया समर्थक भिड़े: दोनों पक्षों ने दर्ज कराई FIR, सांसद प्रतिनिधि समेत कई पर आरोप
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धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले में बरवाअड्डा थाना परिसर में हुए हाईवोल्टेज विवाद के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। डुमरी विधायक जयराम महतो और बड़ा पिछरी पंचायत की मुखिया के समर्थकों के बीच थाने में ही मारपीट का मामला सामने आया है। विवाद एक ऐसे व्यक्ति की गिरफ्तारी को लेकर शुरू हुआ, जिस पर कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर और मुहर का इस्तेमाल कर जाति, आवासीय प्रमाणपत्र और वंशावली तैयार कराने का आरोप है। घटना के बाद दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

मामले में मुखिया के बेटे प्रदीप कुमार रजक की शिकायत पर विधायक जयराम महतो समेत कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। दूसरी तरफ विधायक जयराम महतो की ओर से भी सांसद प्रतिनिधि परमेश्वर उर्फ प्रेम महतो, प्रदीप रजक समेत कई लोगों के खिलाफ मारपीट और छिनतई के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। इस तरह थाने में हुआ विवाद अब दो अलग-अलग FIR के बाद कानूनी लड़ाई में बदल गया है।

पूरा विवाद बड़ा पिछरी पंचायत की मुखिया यशोदा देवी के कथित फर्जी हस्ताक्षर और मुहर से प्रमाणपत्र बनाए जाने के मामले से जुड़ा है। पुलिस ने इस मामले में गणेश दास नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। रिपोर्टों के अनुसार गणेश दास को जेएलकेएम से जुड़े नेता के तौर पर भी बताया गया है। उसकी गिरफ्तारी की जानकारी मिलने के बाद विधायक जयराम महतो बरवाअड्डा थाना पहुंचे थे।

बताया गया कि विधायक को सूचना मिली थी कि गिरफ्तार व्यक्ति के साथ थाने में मारपीट की जा रही है। इसके बाद उन्होंने थाना प्रभारी से फोन पर बात की और बाद में खुद थाने पहुंच गए। थाना परिसर में विधायक की पुलिस अधिकारियों के साथ काफी देर तक बातचीत और बहस हुई। इसी बीच मुखिया पक्ष के लोगों को भी विधायक के थाने पहुंचने की जानकारी मिली और बड़ी संख्या में लोग थाना परिसर पहुंच गए।

इसके बाद मामला अचानक बिगड़ गया। दोनों पक्षों के लोगों के बीच पहले कहासुनी हुई और देखते ही देखते हाथापाई शुरू हो गई। पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा। घटना में मुखिया के बेटे प्रदीप कुमार रजक के घायल होने की बात सामने आई है। प्रदीप ने विधायक जयराम महतो पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि विवाद के दौरान उनके गले पर हमला किया गया और गला दबाने की कोशिश की गई।

प्रदीप रजक ने इस मामले में थाना परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि घटना के दौरान जो कुछ हुआ, वह कैमरों में रिकॉर्ड हुआ होगा और फुटेज सामने आने के बाद आरोपों की सच्चाई स्पष्ट हो सकती है। इसलिए अब इस मामले में CCTV फुटेज जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

दूसरी ओर विधायक जयराम महतो ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों का दूसरा पक्ष रखा है। उनकी ओर से दर्ज शिकायत में सांसद प्रतिनिधि समेत कई लोगों पर मारपीट और छिनतई के आरोप लगाए गए हैं। विधायक का कहना है कि वह गिरफ्तार गणेश दास के मामले में जानकारी लेने और पुलिस से बातचीत करने के लिए थाना पहुंचे थे। उनके आवेदन पर छह नामजद लोगों समेत कई अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

विधायक के आवेदन में सांसद प्रतिनिधि परमेश्वर उर्फ प्रेम महतो के अलावा प्रदीप रजक, तारकेश्वर रजक, आशुतोष रजक, भीखु रजक और दिनेश रजक के नाम बताए गए हैं। दूसरी तरफ प्रदीप रजक की शिकायत में जयराम महतो समेत दिलीप चौधरी और सुशील मंडल के नाम दर्ज किए गए हैं। पुलिस दोनों शिकायतों के आधार पर जांच कर रही है।

इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। एक तरफ मुखिया पक्ष विधायक पर हमला और गंभीर दुर्व्यवहार का आरोप लगा रहा है, जबकि विधायक पक्ष ने खुद पर और अपने समर्थकों पर हुए कथित हमले और सामान छीने जाने की शिकायत की है। इसलिए पुलिस के सामने दोनों पक्षों के आरोपों की स्वतंत्र जांच करने की चुनौती है।

मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मूल आरोपों की जांच भी जारी है। पुलिस ने गणेश दास को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी दी है। इसके साथ ही थाने में हुए विवाद को लेकर दर्ज दोनों FIR की जांच भी अलग स्तर पर की जा रही है।

घटना के बाद धनबाद के राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक गिरफ्तार व्यक्ति की पैरवी को लेकर विधायक के थाने पहुंचने से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते दो राजनीतिक पक्षों के समर्थकों के टकराव में बदल गया। थाने जैसे संवेदनशील स्थान पर हुई मारपीट ने पुलिस व्यवस्था और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि विधायक के खिलाफ किसी साजिश के तहत यह पूरा घटनाक्रम किया गया था। उपलब्ध जानकारी में दोनों पक्षों की शिकायतें और एक-दूसरे पर लगाए गए आरोप सामने आए हैं, लेकिन साजिश की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच और CCTV फुटेज से ही यह पता चल सकेगा कि विवाद की शुरुआत किसने की और मारपीट के दौरान वास्तव में क्या हुआ।

घटना के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है। दोनों पक्षों की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब पुलिस आरोपों की जांच करेगी। CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और मौके पर मौजूद लोगों की जानकारी जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है।

थाना परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज इस मामले में सबसे अहम सबूत बन सकती है। यदि पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हुई है तो उससे यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि पहले कहासुनी किस बात पर हुई, किसने हाथापाई शुरू की और किस पक्ष के लोगों ने किसके साथ मारपीट की।

इस विवाद का असर इलाके की राजनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच तनाव को देखते हुए प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है। फिलहाल पुलिस का ध्यान मामले की जांच और दोनों पक्षों के आरोपों की सत्यता सामने लाने पर है।

बरवाअड्डा थाना परिसर में हुआ विवाद अब FIR तक पहुंच चुका है। विधायक जयराम महतो और मुखिया पक्ष दोनों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विधायक पक्ष ने सांसद प्रतिनिधि समेत कई लोगों पर केस कराया है, जबकि मुखिया के बेटे की शिकायत पर विधायक समेत अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है। अब CCTV फुटेज और पुलिस जांच से ही साफ होगा कि थाने में हुए इस बवाल की असली शुरुआत कैसे हुई और किसके आरोप में कितनी सच्चाई है।

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