अरुणाचल की बोमजू रिराम का NSD में चयन, थिएटर जगत में राज्य की प्रतिभा को मिली नई पहचान

अरुणाचल प्रदेश की बोमजू रिराम का नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) के 2026-29 डिप्लोमा कोर्स में चयन हुआ। उनकी उपलब्धि से राज्य और रंगमंच जगत में खुशी की लहर है।

अरुणाचल प्रदेश के लेपराडा जिले की बोमजू रिराम का नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) के प्रतिष्ठित तीन वर्षीय डिप्लोमा कोर्स में चयन हुआ है। उनकी इस उपलब्धि पर राज्य और कमसा ड्रामैटिक्स सोसायटी ने खुशी जताते हुए इसे युवा कलाकारों के लिए प्रेरणादायक बताया।

ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश की उभरती रंगकर्मी बोमजू रिराम ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा - NSD), नई दिल्ली के प्रतिष्ठित तीन वर्षीय डिप्लोमा इन ड्रामेटिक आर्ट्स पाठ्यक्रम में प्रवेश प्राप्त किया है। वर्ष 2026–29 के शैक्षणिक सत्र के लिए हुए इस चयन ने न केवल बोमजू रिराम के व्यक्तिगत संघर्ष और प्रतिभा को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है, बल्कि अरुणाचल प्रदेश के रंगमंच और प्रदर्शन कला जगत के लिए भी यह गर्व का क्षण बन गया है।

उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि पूर्वोत्तर भारत के युवा कलाकार अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के कलाकारों को भी बड़े मंचों पर अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए प्रेरित करेगी।

बासर से राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय तक का प्रेरणादायक सफर

बोमजू रिराम अरुणाचल प्रदेश के लेपराडा जिले के बासर क्षेत्र की रहने वाली हैं। वह करबोम रिराम और गुंबी रिराम की पुत्री हैं। सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने रंगमंच के प्रति अपने जुनून को लगातार आगे बढ़ाया और वर्षों की मेहनत, अनुशासन तथा समर्पण के बल पर देश के सबसे प्रतिष्ठित नाट्य संस्थानों में स्थान बनाया।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में प्रवेश प्राप्त करना आसान नहीं माना जाता। यहां हर वर्ष देशभर से हजारों युवा कलाकार आवेदन करते हैं, जबकि चयन केवल सीमित सीटों पर ही होता है। ऐसे में बोमजू रिराम का चयन उनकी अभिनय क्षमता, रचनात्मक सोच और रंगमंच के प्रति गंभीर समर्पण को दर्शाता है।

कामसा ड्रामेटिक्स सोसाइटी की सक्रिय सदस्य हैं बोमजू रिराम

बोमजू रिराम लंबे समय से कामसा ड्रामेटिक्स सोसाइटी (Kamsa Dramatics Society - KDS) से जुड़ी हुई हैं। यह संस्था अरुणाचल प्रदेश में रंगमंच और प्रदर्शन कलाओं को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती है। संस्था के माध्यम से उन्होंने विभिन्न नाट्य प्रस्तुतियों, कार्यशालाओं और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेकर अपने अभिनय कौशल को लगातार निखारा।

सोसाइटी ने बोमजू की सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास का परिणाम है। संस्था ने यह भी दोहराया कि वह भविष्य में भी युवा कलाकारों को प्रोत्साहित करने और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास करती रहेगी।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का महत्व

नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय भारत का सबसे प्रतिष्ठित रंगमंच प्रशिक्षण संस्थान माना जाता है। यहां अभिनय, निर्देशन, मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था, नाट्य लेखन और रंगमंच की विभिन्न विधाओं का गहन प्रशिक्षण दिया जाता है।

इस संस्थान से प्रशिक्षित अनेक कलाकार भारतीय रंगमंच, सिनेमा, टेलीविजन और डिजिटल मनोरंजन उद्योग में महत्वपूर्ण योगदान दे चुके हैं। इसलिए एनएसडी में चयन किसी भी युवा कलाकार के लिए करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। तीन वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान करता है, जिससे वे पेशेवर कलाकार के रूप में अपने कौशल का विकास कर सकें।

अरुणाचल प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मिलेगा नया आयाम

बोमजू रिराम की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह अरुणाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और कलात्मक प्रतिभा को भी राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली घटना है।

पूर्वोत्तर भारत लंबे समय से अपनी विविध सांस्कृतिक विरासत, लोककलाओं, संगीत और पारंपरिक नृत्यों के लिए प्रसिद्ध रहा है। अब इस क्षेत्र के युवा कलाकार आधुनिक रंगमंच और प्रदर्शन कलाओं में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं। इससे राज्य की सांस्कृतिक पहचान और अधिक मजबूत हो रही है।

कामसा ड्रामेटिक्स सोसाइटी का योगदान

कामसा ड्रामेटिक्स सोसाइटी ने पिछले कई वर्षों में अरुणाचल प्रदेश के अनेक युवा कलाकारों को मंच प्रदान किया है। संस्था केवल नाट्य प्रस्तुतियों का आयोजन ही नहीं करती, बल्कि अभिनय प्रशिक्षण, सांस्कृतिक कार्यशालाओं और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से नई प्रतिभाओं को विकसित करने का भी कार्य करती है।

संस्था के कई सदस्य पहले भी देश के प्रमुख कला एवं फिल्म संस्थानों में प्रवेश प्राप्त कर चुके हैं। इनमें राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD), भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (FTII), पुणे, भारतेन्दु नाट्य अकादमी (BNA) तथा एफटीआई अरुणाचल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में चयन शामिल है। इन उपलब्धियों ने यह साबित किया है कि यदि युवाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।

युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा बनी सफलता

बोमजू रिराम की उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अभिनय, रंगमंच और प्रदर्शन कला के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने यह दिखाया कि समर्पण, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के बल पर बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सफलताएं क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी कला और संस्कृति के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। साथ ही यह संदेश भी देती हैं कि प्रतिभा किसी भौगोलिक सीमा की मोहताज नहीं होती।

पूर्वोत्तर भारत में बढ़ रही प्रदर्शन कलाओं की पहचान

हाल के वर्षों में पूर्वोत्तर भारत के कलाकार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। संगीत, रंगमंच, सिनेमा और लोककला जैसे क्षेत्रों में इस क्षेत्र के कलाकारों ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।

बोमजू रिराम का राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में चयन इसी सकारात्मक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक प्रतिभाएं अब देश की मुख्यधारा के कला संस्थानों में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं।

भविष्य की संभावनाएं

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद बोमजू रिराम के सामने रंगमंच, फिल्म, टेलीविजन, वेब सीरीज, नाट्य निर्देशन, शिक्षण और सांस्कृतिक अनुसंधान जैसे अनेक अवसर खुल सकते हैं। एनएसडी का प्रशिक्षण उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मजबूत आधार प्रदान करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी सफलता भविष्य में अरुणाचल प्रदेश के रंगमंच और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी नई दिशा दे सकती है, क्योंकि प्रशिक्षित कलाकार अपने अनुभव और ज्ञान से स्थानीय कला जगत को समृद्ध बनाते हैं।

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