अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले के क्यिडफेल सर्किल में 25 किसान परिवारों को वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के तहत बागवानी किट प्रदान की गई। सहायता से जैविक सब्जी उत्पादन, टिकाऊ कृषि, स्थानीय खाद्य सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती तवांग जिले में ग्रामीण आजीविका और टिकाऊ कृषि को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। क्यिडफेल सर्किल के 25 किसान परिवारों को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम (VVP) के तहत बागवानी से जुड़ी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई। इस पहल का उद्देश्य दूरदराज के सीमावर्ती क्षेत्र में किसानों को आधुनिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ना तथा स्थानीय स्तर पर सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देना है।
क्यिडफेल सर्किल में आयोजित जागरूकता एवं कृषि सामग्री वितरण कार्यक्रम के दौरान किसानों को जैविक खेती और टिकाऊ सब्जी उत्पादन के बारे में जानकारी दी गई। यह कार्यक्रम मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत आयोजित किया गया। अधिकारियों ने किसानों को खेती में रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल धीरे-धीरे कम करने और पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
25 किसान परिवारों को मिली पूरी बागवानी किट
कार्यक्रम के तहत क्यिडफेल सर्किल के प्रत्येक 25 किसान परिवार को बागवानी संबंधी सामग्री का पूरा पैकेज दिया गया। इसमें गर्मी और सर्दी के मौसम में उगाई जाने वाली सब्जियों के बीज, जैविक खाद, पौध संरक्षण सामग्री, पावर स्प्रेयर और खेती के लिए जरूरी बुनियादी कृषि उपकरण शामिल हैं।
इन संसाधनों से किसानों को अपनी जरूरत के अनुसार अलग-अलग मौसम में सब्जियों की खेती करने में मदद मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की सहायता दूरस्थ इलाकों में किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर ताजा सब्जियों की उपलब्धता भी मजबूत कर सकती है।
जैविक और रसायन-मुक्त खेती पर जोर
कार्यक्रम में किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए जागरूक किया गया। अधिकारियों ने कहा कि लंबे समय में टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल खेती से मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
जैविक खेती के माध्यम से स्थानीय स्तर पर उत्पादित सब्जियों की गुणवत्ता और बाजार में उनकी संभावनाओं को भी बेहतर किया जा सकता है। सीमावर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों में परिवहन की चुनौतियों को देखते हुए स्थानीय खाद्य उत्पादन बढ़ाना ग्रामीण परिवारों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है।
किसानों की आय और स्थानीय खाद्य सुरक्षा बढ़ाने की कोशिश
क्यिडफेल जैसे दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों में कृषि सिर्फ रोजगार का साधन नहीं है, बल्कि स्थानीय खाद्य सुरक्षा से भी सीधे जुड़ी है। सब्जियों का स्थानीय उत्पादन बढ़ने से बाहर से खाद्य सामग्री लाने पर निर्भरता कम हो सकती है।
सरकार की इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य किसानों को अपनी कृषि गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित और उत्पादक बनाने में मदद करना है। यदि किसान स्थानीय जरूरत से अधिक उत्पादन करने में सफल होते हैं, तो अतिरिक्त उपज को आसपास के बाजारों में बेचकर परिवार की आय बढ़ाने का अवसर भी मिल सकता है।
कार्यक्रम में अधिकारियों ने किसानों को किया प्रोत्साहित
जागरूकता और सामग्री वितरण कार्यक्रम में क्यिडफेल के सहायक आयुक्त सेंग नोरबू तथा जिला परिषद सदस्य तेनजिन मोनपा सहित स्थानीय प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने किसानों से टिकाऊ और हरित कृषि पद्धतियों को अपनाने की अपील की।
अधिकारियों ने मिट्टी के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने और जैविक उत्पादन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। साथ ही किसानों को बेहतर बाजार संपर्क विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। इसका उद्देश्य कृषि को केवल घरेलू जरूरत तक सीमित रखने के बजाय किसानों को संभावित बाजारों से जोड़ना है।

वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम क्या है?
वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम भारत की उत्तरी सीमा से लगे गांवों के समग्र विकास पर केंद्रित केंद्र सरकार की पहल है। इसका उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों के लिए बेहतर आजीविका के अवसर पैदा करना, बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना और इन क्षेत्रों में स्थायी आबादी तथा आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
अरुणाचल प्रदेश जैसे सीमावर्ती राज्य में इस कार्यक्रम का महत्व और बढ़ जाता है। राज्य के कई गांव भौगोलिक रूप से दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित हैं। ऐसे इलाकों में कृषि, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार और अन्य जरूरी सुविधाओं को मजबूत करना ग्रामीण विकास के साथ-साथ क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
सीमावर्ती गांवों में आत्मनिर्भरता पर फोकस
वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के तहत कृषि और बागवानी को बढ़ावा देने का लक्ष्य सीमावर्ती समुदायों को स्थानीय स्तर पर आर्थिक रूप से मजबूत बनाना भी है। क्यिडफेल में 25 परिवारों को बागवानी सामग्री उपलब्ध कराना इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
स्थानीय स्तर पर सब्जियों का उत्पादन बढ़ने से ग्रामीण परिवारों को रोजगार और आय का अतिरिक्त स्रोत मिल सकता है। इसके साथ ही क्षेत्र में खाद्य पदार्थों की उपलब्धता बढ़ने से स्थानीय खाद्य सुरक्षा को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
दूरदराज के इलाकों के लिए टिकाऊ कृषि क्यों जरूरी?
पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में खेती कई प्राकृतिक और भौगोलिक चुनौतियों के बीच होती है। सीमित कृषि भूमि, कठिन परिवहन व्यवस्था और बाजारों से दूरी किसानों के लिए बड़ी चुनौतियां हो सकती हैं। ऐसे में कम लागत वाली, टिकाऊ और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल कृषि पद्धतियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
जैविक खाद, बेहतर बीज, पौध संरक्षण उपकरण और आधुनिक कृषि औजार किसानों को उपलब्ध कराने से उत्पादन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। साथ ही मिट्टी के स्वास्थ्य और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर ध्यान देकर खेती को लंबे समय तक टिकाऊ बनाया जा सकता है।
सीमावर्ती विकास के लिए कृषि बनी अहम कड़ी
क्यिडफेल में शुरू की गई पहल यह दिखाती है कि सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास में कृषि और बागवानी को महत्वपूर्ण स्थान दिया जा रहा है। किसानों को केवल आर्थिक सहायता देने के बजाय उन्हें बीज, उपकरण, जैविक खाद और कृषि संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है।
आने वाले समय में यदि इस तरह की योजनाओं के साथ किसानों को प्रशिक्षण, भंडारण, परिवहन और बाजार की बेहतर सुविधाएं भी मिलती हैं, तो दूरस्थ सीमावर्ती गांवों में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिल सकती है। क्यिडफेल के 25 किसान परिवारों को मिली यह सहायता इसी व्यापक लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।











