अरुणाचल प्रदेश में फर्जी किडनैपिंग रैकेट का खुलासा, पुलिस ने दो लोगों को बचाया

अरुणाचल प्रदेश के क्रा-दादी में पुलिस ने फर्जी अपहरण और फिरौती मामले का खुलासा किया। तकनीकी जांच के बाद दो लोगों को बरामद कर मामले की जांच शुरू की गई।

अरुणाचल प्रदेश के क्रा-दादी जिले में पुलिस ने फर्जी अपहरण और फिरौती मांगने के मामले का खुलासा किया है। पुलिस ने दो लोगों को बरामद किया। जांच में सामने आया कि कथित पीड़ित ने खुद अपहरण की कहानी रची और भाई से पैसे मांगने की कोशिश की।

क्रा-दादी: अरुणाचल प्रदेश के क्रा-दादी जिले में पुलिस ने एक ऐसे मामले का खुलासा किया है, जिसमें अपहरण की पूरी कहानी कथित तौर पर खुद रची गई थी। पुलिस के अनुसार, एक व्यक्ति के लापता होने के बाद उसके परिवार को फिरौती के लिए फोन किया गया। जांच आगे बढ़ी तो मामला वास्तविक अपहरण के बजाय कथित तौर पर पैसे हासिल करने के लिए बनाई गई साजिश निकला।

यह मामला असम के तेजपुर स्थित बोर्गहाट पुलिस थाने में दर्ज किया गया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, केस संख्या MMR-63/2026 में प्रदीप भट्टराई के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई गई थी। परिवार ने बताया था कि वह 2 अगस्त को गुवाहाटी से लापता हो गए थे। इसके बाद मामले में नया मोड़ तब आया जब उनके भाई, जो दुबई में काम करते हैं, को फिरौती के लिए फोन आया।

भाई को फोन कर मांगी गई थी फिरौती

पुलिस के मुताबिक, 14 अगस्त को प्रदीप भट्टराई के भाई को एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि प्रदीप का अपहरण कर लिया गया है और उसे छोड़ने के बदले UPI के जरिए पैसे भेजने की मांग की।

अगले दिन यानी 15 अगस्त को भी इसी तरह का एक और फोन किया गया। लगातार दो फिरौती कॉल आने के बाद परिवार ने मामले को गंभीरता से लिया और पुलिस को इसकी जानकारी दी। पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और फोन कॉल से जुड़े नंबरों की लोकेशन का पता लगाने का प्रयास किया।

जांच के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिला। तकनीकी ट्रैकिंग से दोनों कॉलों की लोकेशन अरुणाचल प्रदेश के पालिन क्षेत्र में सामने आई। इसके बाद पुलिस टीम ने संदिग्ध स्थानों की निगरानी और रेकी शुरू की।

तकनीकी जांच से पालिन तक पहुंची पुलिस

कॉल की लोकेशन मिलने के बाद पालिन पुलिस ने इलाके में अभियान चलाया। पुलिस ने संभावित ठिकानों की पहचान की और आसपास के निर्माण स्थलों की जानकारी जुटाई। जांच में पता चला कि प्रदीप भट्टराई एक निर्माण स्थल पर काम कर रहे थे।

16 अगस्त को पुलिस टीम ने संबंधित निर्माण स्थल पर छापा मारा। यहां से प्रदीप भट्टराई और लकी कांता पायंग को बरामद किया गया। दोनों निर्माण मजदूर के रूप में वहां काम कर रहे थे।

पुलिस के लिए यह बरामदगी महत्वपूर्ण थी, क्योंकि जिस व्यक्ति को परिवार अपहृत समझ रहा था, वह सुरक्षित मिला। इसके बाद पुलिस ने दोनों से पूछताछ शुरू की और कथित फर्जी अपहरण की पूरी कहानी सामने आई।

काम की तलाश में गुवाहाटी से पहुंचे थे पालिन

पूछताछ में पुलिस के अनुसार, प्रदीप भट्टराई ने बताया कि वह 8 अगस्त को निर्माण कार्य की जानकारी मिलने के बाद गुवाहाटी से ट्रेन के जरिए नाहरलागुन पहुंचे थे। इसके बाद वह 10 अगस्त को पालिन पहुंचे, जहां उन्हें निर्माण कार्य मिला।

पुलिस के मुताबिक, भट्टराई ने अपने परिवार को यह नहीं बताया कि वह सुरक्षित रूप से अरुणाचल प्रदेश में काम कर रहे हैं। इसके बजाय कथित तौर पर उन्होंने अपने भाई से पैसे हासिल करने के लिए अपहरण की झूठी कहानी तैयार की।

पुलिस ने बताया कि फिरौती के लिए फोन करने में दूसरे व्यक्ति के मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया गया।

आवाज बदलकर भाई को किया फोन

जांच में सामने आए पुलिस के दावे के मुताबिक, भट्टराई ने लकी कांता पायंग के मोबाइल फोन का इस्तेमाल करके अपने भाई को फोन किया। कॉल के दौरान उन्होंने अपनी आवाज बदलने की कोशिश की और खुद को अपहरणकर्ताओं के कब्जे में बताया।

फोन करने का उद्देश्य कथित तौर पर भाई को यह विश्वास दिलाना था कि प्रदीप का अपहरण हो गया है और उसकी रिहाई के लिए पैसे की जरूरत है। पुलिस के अनुसार, इस तरह परिवार से आर्थिक मदद हासिल करने की योजना बनाई गई थी।

हालांकि, तकनीकी जांच के कारण पुलिस फोन की लोकेशन तक पहुंच गई और मामला जल्द ही सामने आ गया। पुलिस ने दोनों को बरामद करने के बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की।

17 अगस्त को असम पुलिस टीम को सौंपे गए दोनों

पुलिस के अनुसार, आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दोनों व्यक्तियों को 17 अगस्त को बोर्गहाट पुलिस थाने की टीम को सौंप दिया गया। अब मामले में आगे की जांच संबंधित पुलिस टीम द्वारा की जा रही है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि फर्जी अपहरण की योजना किस उद्देश्य से बनाई गई थी और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी। पुलिस मामले से जुड़े फोन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है।

पुलिस ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील

इस घटना के बाद पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अपहरण या आपात स्थिति से जुड़ी फोन कॉल पर तुरंत भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति किसी रिश्तेदार के अपहरण का दावा करते हुए पैसे मांगता है, तो रकम ट्रांसफर करने से पहले संबंधित व्यक्ति और पुलिस से जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।

पुलिस का कहना है कि साइबर तकनीक और मोबाइल लोकेशन जैसे साधनों की मदद से ऐसे मामलों की जांच में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। ऐसे मामलों में परिवारों को घबराने के बजाय तुरंत स्थानीय पुलिस से संपर्क करना चाहिए।

यह मामला इस बात का भी उदाहरण है कि फिरौती मांगने वाली हर कॉल वास्तविक अपहरण का संकेत नहीं होती। पुलिस के अनुसार, समय पर सूचना मिलने और तकनीकी जांच के कारण इस मामले में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हो सका।

फर्जी किडनैपिंग मामलों में बढ़ी सतर्कता की जरूरत

फर्जी अपहरण के मामलों में अपराधी या संदिग्ध व्यक्ति अक्सर परिवार की भावनात्मक स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में जल्दबाजी में पैसे भेजने से आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसलिए किसी भी संदिग्ध कॉल की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना बेहद जरूरी है।

अरुणाचल प्रदेश के क्रा-दादी जिले में सामने आया यह मामला भी इसी तरह की कथित साजिश की ओर इशारा करता है, जिसमें अपहरण की झूठी कहानी बनाकर परिवार से पैसे हासिल करने का प्रयास किया गया। पुलिस की कार्रवाई के बाद दोनों व्यक्तियों को बरामद कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है।

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