अतीक अहमद के रोल को लेकर बवाल, रुचि वीरा की चुप्पी बनी चर्चा का विषय

फिल्म धुरंधर 2 में अतीक अहमद का किरदार लेकर सपा सांसद रुचि वीरा ने चुप्पी साधी, जबकि बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने समर्थन किया।

फिल्म धुरंधर 2 में अतीक अहमद के किरदार को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सपा सांसद रुचि वीरा ने सवालों से बचते हुए कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जबकि बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने फिल्म का समर्थन किया। अन्य नेताओं ने सेंसर बोर्ड और मनोरंजन के पहलुओं पर अपनी राय दी। फिल्म की आलोचनात्मक और राजनीतिक प्रतिक्रिया दोनों सामने आ रही हैं।

Political Controversy: उत्तर प्रदेश और बिहार में हाल ही में रिलीज हुई फिल्म धुरंधर 2 में अतीक अहमद के किरदार को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। मुरादाबाद से सपा सांसद रुचि वीरा ने सवालों से बचते हुए चुप्पी साधी, जबकि बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने फिल्म का समर्थन किया। अन्य नेताओं ने सेंसर बोर्ड और फिल्म के उद्देश्य पर अपनी राय साझा की। इस विवाद ने मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर चर्चा तेज कर दी है, जिससे फिल्म की राजनीतिक और सामाजिक छवि पर सवाल उठ रहे हैं।

सांसद रुचि वीरा ने साधी चुप्पी

सपा की मुरादाबाद सांसद रुचि वीरा से फिल्म पर सवाल किया गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि आज खुशी और त्योहार की बात करनी चाहिए, और वहीं से चली गईं। उनकी चुप्पी ने मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर चर्चा को और तेज कर दिया।

इसके विपरीत, कुछ नेता इस विषय पर खुले तौर पर बोल रहे हैं। फिल्म में दिखाए गए किरदारों और घटनाओं को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की राय सामने आई है।

नेताओं की प्रतिक्रियाएं और समर्थन

बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि फिल्में समाज में हो रही घटनाओं को दिखाती हैं और जनता तक सच पहुंचाने का काम करती हैं। उन्होंने फिल्म के डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और कलाकारों को शुभकामनाएं दी। वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने आरोप लगाया कि ऐसी फिल्में राजनीतिक प्रोपेगेंडा का हिस्सा हो सकती हैं।

जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने सेंसर बोर्ड की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि बोर्ड तय करे कि क्या दिखाना सही है। शिवसेना की प्रवक्ता शाइना एनसी ने कहा कि फिल्म का उद्देश्य मनोरंजन है और किसी की भावनाओं को आहत नहीं करना चाहिए। उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी साफ किया कि फिल्में सरकार नहीं बनाती, बल्कि फिल्ममेकर दर्शकों को पसंद आने वाली कहानी पेश करते हैं।

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