महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। Rupali Chakankar ने महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा उस समय आया है जब नासिक के कथित फर्जी बाबा Ashok Kharat से उनकी नजदीकियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया था।
मुंबई: रुपाली चाकणकर, जो एनसीपी अजीत पवार गुट की नेता हैं और महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष भी थीं, ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब नासिक के फर्जी बाबा अशोक खरात कांड और उनके राजनीतिक हस्तियों के साथ नजदीकियों के खुलासे के बाद लगातार उनके इस्तीफे की मांग उठ रही थी।
खरात के कई नेताओं के साथ तस्वीरें सामने आई हैं, और उनके पास से कुछ आपत्तिजनक वीडियो भी मिले हैं। इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक दबाव बढ़ता जा रहा था। रुपाली चाकणकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजे अपने इस्तीफे में कहा कि वह व्यक्तिगत कारणों से पद से हट रही हैं। इस इस्तीफे के बाद महाराष्ट्र महिला आयोग और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
इस्तीफे में क्या कहा
रुपाली चाकणकर ने अपना इस्तीफा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis को भेजा। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि वह व्यक्तिगत कारणों से पद छोड़ रही हैं। उन्होंने लिखा कि उन्हें 15 अक्टूबर 2024 को महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष नियुक्त किया गया था और इस दौरान उन्हें सरकार और सहयोगियों का पूरा समर्थन मिला।
उन्होंने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी वह समाज सेवा और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहेंगी। हालांकि राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि उनका इस्तीफा अशोक खरात विवाद के बढ़ते दबाव के कारण आया है।

अशोक खरात मामला क्या है
पुलिस के अनुसार अशोक खरात को 18 मार्च को नासिक जिले से गिरफ्तार किया गया था। उस पर आरोप है कि उसने एक महिला का कई वर्षों तक यौन शोषण किया। जांच के दौरान उसके कई नेताओं और प्रभावशाली लोगों के साथ फोटो और वीडियो भी सामने आए, जिससे मामला और विवादित हो गया। आरोप है कि वह खुद को आध्यात्मिक गुरु बताकर लोगों का विश्वास जीतता था और बाद में उनका शोषण करता था।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि आरोपी ने आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को निशाना बनाया और कथित तौर पर उन्हें इलाज, उपाय और धार्मिक सलाह के नाम पर अपने जाल में फंसाया।
विपक्ष ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
मामले के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के प्रवक्ता Atul Londhe ने मांग की कि पूरे मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) से कराई जाए और जांच का नेतृत्व वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी को दिया जाए। वहीं शिवसेना (उद्धव गुट) की प्रवक्ता Sushma Andhare ने आरोप लगाया कि मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए सभी संबंधित लोगों से कड़ी पूछताछ की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि आरोपी के प्रभाव में आकर कई लोगों ने अजीब हरकतें कीं, जिनकी जांच जरूरी है।
इस मामले में कई राजनीतिक नेताओं के साथ आरोपी की तस्वीरें सामने आने के बाद विवाद और बढ़ गया है। विपक्ष का आरोप है कि आरोपी को राजनीतिक संरक्षण मिला, जबकि सत्तारूढ़ दल ने इन आरोपों को खारिज किया है।










