Azhimala Shiva Temple की पहचान बनी इसकी विशाल शिव प्रतिमा, जानें मंदिर से जुड़ी खास बातें

Azhimala Shiva Temple की पहचान बनी इसकी विशाल शिव प्रतिमा, जानें मंदिर से जुड़ी खास बातें

केरल के तिरुवनंतपुरम के पास स्थित आझिमाला शिव मंदिर अपनी 58 फीट ऊँची गंगाधरेश्वर शिव प्रतिमा के कारण आस्था और पर्यटन का बड़ा केंद्र बन गया है। समुद्र किनारे स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम पेश करता है।

Shiva Temple: केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के पास स्थित आझिमाला शिव मंदिर इन दिनों अपनी 58 फीट ऊँची गंगाधरेश्वर शिव प्रतिमा के कारण चर्चा में है। यह भव्य प्रतिमा अरब सागर के बिल्कुल किनारे चट्टानों पर स्थापित है, जहां समुद्र की लहरों के बीच खड़े होकर श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन करते हैं। यह मूर्ति 2014 में बनना शुरू हुई थी और 2020 में जनता के लिए खोली गई। मंदिर आध्यात्मिक शांति, प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक पर्यटन के लिए खास पहचान बना चुका है।

समुद्र किनारे आस्था का विराट स्वरूप

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के पास स्थित आझिमाला शिव मंदिर इन दिनों अपनी 58 फीट ऊँची गंगाधरेश्वर शिव प्रतिमा को लेकर देशभर में चर्चा में है। अरब सागर के बिल्कुल किनारे चट्टानों पर बनी यह प्रतिमा समुद्र की लहरों के बीच खड़े होकर श्रद्धालुओं को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव देती है। यहां दर्शन के लिए आने वाले भक्त शिव भक्ति के साथ प्रकृति की विराट सुंदरता का भी अनुभव करते हैं।

यह मंदिर अपनी खास लोकेशन की वजह से एक अनोखा तीर्थ स्थल बन गया है। समुद्र की गूंज, ठंडी हवा और विशाल शिव प्रतिमा का दृश्य मिलकर यहां आने वाले हर व्यक्ति को भीतर तक प्रभावित करता है। यही कारण है कि आझिमाला शिव मंदिर आज धार्मिक पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्रों में गिना जा रहा है।

मंदिर की बनावट और कला का अनूठा संगम

आझिमाला शिव मंदिर का निर्माण पारंपरिक द्रविड़ शैली में किया गया है, जिसकी झलक इसके गोपुरम और बाहरी दीवारों पर साफ दिखाई देती है। मंदिर की दीवारों पर गणेश, विष्णु, कार्तिकेय, अय्यप्पन और हनुमान की रंगीन मूर्तियां उकेरी गई हैं। भीतर की दीवारों पर बनी नक्काशी और भित्ति चित्र मंदिर की कलात्मक भव्यता को और बढ़ाते हैं।

मंदिर का प्रबंधन आझिमाला देवस्वम ट्रस्ट द्वारा किया जाता है, जो यहां की दैनिक पूजा, साफ-सफाई और वार्षिक उत्सवों की जिम्मेदारी संभालता है। मलयालम माह मकरम में होने वाला वार्षिक उत्सव यहां विशेष श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

गंगाधरेश्वर प्रतिमा बनी मंदिर की पहचान

इस मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण भगवान शिव की 18 मीटर यानी 58 फीट ऊँची गंगाधरेश्वर प्रतिमा है। इस भव्य मूर्ति का निर्माण स्थानीय कलाकार पी. एस. देवदथन द्वारा किया गया था। इसका निर्माण कार्य वर्ष 2014 में शुरू हुआ और 2020 में इसे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया।

यह प्रतिमा भारत की सबसे ऊँची गंगाधरेश्वर शिव प्रतिमाओं में गिनी जाती है। समुद्र की लहरों के बीच खड़ी यह विशाल मूर्ति श्रद्धा, शक्ति और शांति का एक सजीव प्रतीक बन चुकी है। यहां आने वाले पर्यटक इसे सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव के रूप में देखते हैं।

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