कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सत्ता संघर्ष बढ़ गया है। खड़गे ने शीर्ष नेताओं की बैठक बुलाकर संकेत दिया कि नेतृत्व परिवर्तन सहित सभी फैसले सामूहिक रूप से तय होंगे, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
Karnataka: कर्नाटक की राजनीति एक बार फिर हलचल के दौर से गुजर रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच बढ़ते सत्ता संघर्ष ने कांग्रेस आलाकमान को सक्रिय कर दिया है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने साफ कहा है कि यह मामला अकेले किसी एक नेता के फैसले से नहीं सुलझेगा, बल्कि सामूहिक चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
वरिष्ठ नेताओं की बैठक पर खड़गे का बड़ा संकेत
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को बताया कि उन्होंने इस विवाद को शांत करने के लिए एक विशेष बैठक बुलाई है। इस बैठक में राहुल गांधी, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी शामिल होंगे। खड़गे के अनुसार सभी पक्षों की बात सुनने के बाद ही आगे की रणनीति तय होगी। उन्होंने दो टूक कहा कि हाईकमान यानी एक टीम, और यह टीम मिलकर ही अंतिम फैसला लेगी। इससे यह साफ है कि पार्टी किसी भी तरह के एकतरफा कदम से बचना चाहती है।
खड़गे के बयान ने इस राजनीतिक चर्चा को और गहरा किया है कि कर्नाटक सरकार में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना पर गंभीर विचार चल रहा है। पार्टी आलाकमान के हस्तक्षेप को देखते हुए उम्मीद की जा सकती है कि अगले कुछ दिनों में बड़े निर्णय सामने आ सकते हैं।
डीके शिवकुमार का संदेश
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक रहस्यमय संदेश पोस्ट किया था जिसमें उन्होंने लिखा कि अपनी बात पर कायम रहना दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है। इस संदेश को मौजूदा सत्ता संघर्ष से जोड़कर देखा गया और राजनीतिक गलियारों में नई अटकलें तेज हो गईं।

उनके इस पोस्ट ने यह संकेत दिया कि वह अपने राजनीतिक रुख में दृढ़ हैं और नेतृत्व परिवर्तन से जुड़ी किसी भी चर्चा में पीछे हटने वाले नहीं हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी से जुड़े मुद्दों पर मीडिया में नहीं बल्कि इंटरनल चर्चा के जरिए ही समाधान निकाला जाएगा। यह बयान पार्टी की अंदरूनी रणनीति को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
बीजेपी का हमला
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस पूरे मामले पर कांग्रेस सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में सत्ता संघर्ष अब किसी भी तरह छिपा नहीं है बल्कि खुलेआम हो रहा है। जोशी का आरोप है कि मंत्री प्रशासन पर ध्यान देने के बजाय इस बात में उलझे हैं कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।
उन्होंने कहा कि यह कोई आंतरिक मतभेद नहीं बल्कि एक खुला संघर्ष है जिसमें सभी नेता सिर्फ पद की दौड़ में लगे हैं। जोशी ने दावा किया कि प्रशासन पूरी तरह से अस्थिर हो चुका है और मंत्रियों की प्राथमिकता बदल गई है। उनके अनुसार कांग्रेस नेतृत्व भी बार-बार कह रहा है कि फैसला आलाकमान करेगा, जबकि वे खुद इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
कर्नाटक सरकार में बदलाव की बढ़ती अटकलें
कांग्रेस सरकार ने हाल ही में अपने कार्यकाल का आधा समय पूरा किया है। इसी के साथ नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहें तेज हो गई हैं। परंपरागत तौर पर कुछ राज्यों में कांग्रेस पार्टी आधे कार्यकाल के बाद नेतृत्व परिवर्तन के विकल्प पर विचार करती रही है। इस पृष्ठभूमि में सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच बढ़ती खींचतान को संभावित बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
सिद्धारमैया एक अनुभवी और लोकप्रिय नेता माने जाते हैं, जबकि डीके शिवकुमार संगठन को मजबूत करने वाले प्रभावशाली चेहरे के रूप में देखे जाते हैं। दोनों की महत्वाकांक्षाओं और राजनीतिक ताकत का टकराव पिछले कई महीनों से चर्चा में है। अब जब आलाकमान ने खुलकर हस्तक्षेप किया है, आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।











