बदरीनाथ धाम में सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर विवाद जारी, पुरोहित महापंचायत ने उठाए सवाल

बदरीनाथ धाम में ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026’ को लेकर विवाद जारी है। पुरोहित महापंचायत ने प्रस्तुतियों पर आपत्ति जताई, प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की।

बदरीनाथ धाम में आयोजित ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026’ के सांस्कृतिक कार्यक्रमों को लेकर विवाद जारी है। चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने कार्यक्रम के स्वरूप पर आपत्ति जताई है, जबकि जिला प्रशासन ने आयोजन को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।

गोपेश्वर: बदरीनाथ धाम में आयोजित ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026’ को लेकर विवाद अभी थमा नहीं है। उत्तराखंड चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने कार्यक्रम की कुछ प्रस्तुतियों और स्वरूप पर नाराजगी जताई है। महापंचायत का कहना है कि बदरीनाथ धाम की धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं को ध्यान में रखकर ही सांस्कृतिक कार्यक्रम होने चाहिए। वहीं, जिला प्रशासन ने कहा कि कार्यक्रम की प्रस्तुतियों का चयन सेना की ओर से किया गया था।

कार्यक्रम की प्रस्तुतियों पर पुरोहित महापंचायत की आपत्ति

बदरीनाथ धाम स्थित टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में आयोजित दो दिवसीय ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026’ की कुछ प्रस्तुतियों को लेकर विवाद सामने आया है। उत्तराखंड चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के स्वरूप और प्रस्तुति पर नाराजगी जताई है।

महापंचायत का कहना है कि बदरीनाथ धाम की धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए ही ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। महापंचायत ने संगीत के जरिए होने वाले शोर को धाम की धार्मिक गरिमा के अनुरूप नहीं बताया है।

वहीं, कुछ सामाजिक संगठनों ने भी कार्यक्रम में शामिल कुछ गायकों की प्रस्तुतियों पर आपत्ति जताई है। संगठनों की ओर से आरोप लगाया गया कि कुछ प्रस्तुतियों में फूहड़ता दिखाई गई, जिसके बाद यह मामला इंटरनेट मीडिया पर भी चर्चा में आया।

‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ थी महोत्सव की थीम

सेना की ओर से हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बदरीनाथ में ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026’ का आयोजन किया गया। दो दिवसीय महोत्सव की थीम ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ रखी गई थी।

आयोजन का उद्देश्य क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय परंपराओं और प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराना था। इसके साथ ही सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम में वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत चयनित सीमांत गांवों बामणी और माणा की लोक संस्कृति, पारंपरिक रीति-रिवाजों और स्थानीय परंपराओं को दर्शाने वाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं।

सेना के अनुरोध पर जिला प्रशासन की ओर से विभिन्न जनोपयोगी और जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित स्टॉल भी लगाए गए थे।

प्रशासन ने कहा- प्रस्तुतियों का चयन सेना ने किया

विवाद बढ़ने के बाद जिला प्रशासन ने गुरुवार को आयोजन को लेकर स्थिति स्पष्ट की। प्रशासन ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत किए गए विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रस्तुतियों और उनके स्वरूप का चयन एवं निर्धारण सेना की ओर से किया गया था।

प्रशासन के अनुसार, सेना के स्थानीय अधिकारियों को बदरीनाथ धाम की धार्मिक आस्था, पौराणिक एवं आध्यात्मिक महत्व और स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुरूप कार्यक्रम आयोजित करने की सलाह दी गई थी।

प्रशासन ने इंटरनेट मीडिया को लेकर की अपील

जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित किसी भी सूचना या पोस्ट के आधार पर बिना तथ्यों की पुष्टि किए कोई धारणा न बनाएं।

प्रशासन ने कहा कि किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसके तथ्यों की पुष्टि करना जरूरी है। साथ ही लोगों से भ्रामक और तथ्यहीन प्रचार-प्रसार से बचने की अपील की गई है।

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