इटली की मेलोनी सरकार ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लगाने वाला डिक्री-लॉ मंजूर किया है। नियम तोड़ने पर 1,000 यूरो तक जुर्माना होगा। भाषा में कमजोर छात्रों की एक कक्षा में संख्या 30% तक सीमित करने का भी प्रावधान है।
रोम: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने स्कूलों में एक नया डिक्री-लॉ मंजूर किया है, जिसके तहत बुर्का और नकाब जैसे पूरे चेहरे को ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध लगाया गया है। नियम का उल्लंघन करने पर 1,000 यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके साथ ही सरकार ने उन छात्रों की संख्या को एक कक्षा में 30 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रावधान किया है, जिन्हें इतालवी भाषा का पर्याप्त ज्ञान नहीं है। सरकार का कहना है कि नए उपायों का उद्देश्य स्कूलों में बेहतर एकीकरण, इतालवी भाषा सीखने में मदद और ऐसी कक्षाओं के बनने से रोकना है जहां बड़ी संख्या में छात्र भाषा के कारण मुख्यधारा की शिक्षा से अलग रह जाएं। हालांकि, इन फैसलों को लेकर विपक्ष, शिक्षक संगठनों और स्कूल प्रशासकों की ओर से सवाल भी उठाए गए हैं।
डिक्री-लॉ को 60 दिनों में संसद की मंजूरी जरूरी
इटली की कैबिनेट ने 24 सितंबर 2026 को शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इस डिक्री-लॉ को मंजूरी दी। डिक्री-लॉ तत्काल प्रभाव से लागू हो सकता है, लेकिन इसे स्थायी कानून का रूप देने के लिए 60 दिनों के भीतर संसद से मंजूरी हासिल करनी होगी।
सरकार ने बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध के साथ भाषा संबंधी उपाय भी शामिल किए हैं। प्रधानमंत्री मेलोनी ने कहा कि ये कदम ऐसे स्कूल सिस्टम की दिशा में हैं जो विद्यार्थियों को एकीकृत करे, लेकिन उसके नियमों को छोड़े नहीं। सरकार के मुताबिक इसका उद्देश्य छात्रों को समान अवसर उपलब्ध कराना है।
बुर्का और नकाब पर रोक, हिजाब पर नहीं
नए नियम का मुख्य प्रावधान पूरे चेहरे को ढकने वाले परिधानों, विशेष रूप से बुर्का और नकाब, से संबंधित है। इसका अर्थ यह है कि सिर और बाल ढकने वाला सामान्य हिजाब इस प्रतिबंध के दायरे में नहीं आता।
सरकार का तर्क है कि स्कूल में छात्रों और शिक्षकों के बीच संवाद तथा पहचान स्पष्ट रहना शिक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है। नियम तोड़ने पर 200 से 1,000 यूरो तक की प्रशासनिक सजा का प्रावधान बताया गया है। यदि चेहरा ढकने वाला व्यक्ति नाबालिग है, तो जुर्माना उसके माता-पिता पर लगाया जा सकता है।
इतालवी मीडिया के अनुसार, डिक्री में कुछ अन्य स्थितियों में चेहरे को ढकने से संबंधित नियम भी शामिल किए गए हैं। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक बहस का केंद्र बुर्का और नकाब पर स्कूलों में प्रतिबंध है।
30% की सीमा सभी विदेशी छात्रों पर लागू नहीं
नए नियम का दूसरा बड़ा हिस्सा कक्षाओं में छात्रों की संख्या से जुड़ा है। सरकार ने इसे सामान्य अर्थ में “हर विदेशी छात्र पर 30% सीमा” के रूप में लागू नहीं किया है।
प्रावधान उन छात्रों पर केंद्रित है जिन्हें इतालवी भाषा का पर्याप्त ज्ञान नहीं है। सरकार के मुताबिक, एक कक्षा में ऐसे छात्रों की संख्या 30 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। शिक्षा मंत्री के अनुसार, इसका उद्देश्य छात्रों के अत्यधिक एकाग्रण से बनने वाली ऐसी कक्षाओं को रोकना है जहां भाषा सीखने और दूसरे छात्रों के साथ एकीकरण में कठिनाई पैदा हो सकती है।
सरकार के अनुसार, स्थानीय स्कूल प्रशासन छात्रों के दाखिले और कक्षा आवंटन में समन्वय करेगा। जिन स्कूलों में इस सीमा को लागू करना व्यावहारिक रूप से मुश्किल होगा, उन्हें कुछ परिस्थितियों में छूट और अतिरिक्त भाषा-सहायता मिल सकती है।
करीब 1,000 कक्षाओं पर असर पड़ने का अनुमान
इटली के शिक्षा मंत्री के अनुसार, नया 30 प्रतिशत नियम देशभर की करीब 1,000 कक्षाओं को प्रभावित कर सकता है। यह पूरे देश की कुल कक्षाओं का लगभग 0.3 प्रतिशत है।
उपलब्ध शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 शैक्षणिक वर्ष में इटली के स्कूलों में गैर-इतालवी नागरिकता वाले छात्रों की हिस्सेदारी 11.2 प्रतिशत थी। वहीं 30 प्रतिशत से अधिक विदेशी छात्रों वाली कक्षाओं की हिस्सेदारी लगभग 7.6 प्रतिशत बताई गई थी।
यह आंकड़ा यह भी स्पष्ट करता है कि नए नियम का उद्देश्य सभी गैर-इतालवी नागरिक छात्रों को अलग करना नहीं, बल्कि भाषा संबंधी कठिनाइयों वाले छात्रों के अत्यधिक संकेंद्रण को सीमित करना बताया गया है।
माता-पिता के लिए इतालवी भाषा सीखने का प्रावधान
सरकार ने भाषा एकीकरण से जुड़ा एक और प्रावधान रखा है। यदि किसी छात्र को इतालवी भाषा का पर्याप्त ज्ञान नहीं है और इससे उसकी पढ़ाई तथा सहपाठियों के साथ एकीकरण प्रभावित हो रहा है, तो उसके परिवार को इतालवी भाषा सीखने के लिए उपलब्ध कराए गए पाठ्यक्रम में भाग लेने के लिए कहा जा सकता है।
ANSA के अनुसार, यदि संबंधित अभिभावक निर्धारित भाषा पाठ्यक्रम में भाग नहीं लेते हैं तो 200 से 1,000 यूरो तक के जुर्माने का प्रावधान भी डिक्री में रखा गया है।
मेलोनी सरकार का एकीकरण पर जोर
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इन उपायों को स्कूलों में बेहतर एकीकरण से जोड़ा है। उनका कहना है कि भाषा सीखने के अधिक साधन उपलब्ध कराने और छात्रों को एक ही कक्षा में अत्यधिक संख्या में केंद्रित होने से रोकने का उद्देश्य शिक्षा में समान अवसर बढ़ाना है।
मेलोनी सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब इटली में आव्रजन और सामाजिक एकीकरण प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल हैं। 2027 में देश में आम चुनाव होने हैं और प्रवासन नीति पर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
रॉबर्टो वन्नाची की नेशनल फ्यूचर से भी चुनौती
मेलोनी की पार्टी Brothers of Italy (FdI) को दक्षिणपंथी राजनीति में पूर्व सेना जनरल रॉबर्टो वन्नाची की National Future (FN) से चुनौती मिल रही है। FN ने जुलाई में स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक की मांग की थी।
मेलोनी सरकार के फैसले को लेकर आलोचकों का कहना है कि सरकार प्रवासन और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दबाव के बीच अपनी स्थिति मजबूत कर रही है। वहीं सरकार इसे स्कूलों में एकीकरण और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की नीति के रूप में पेश कर रही है।
इटली में चेहरा ढकने को लेकर पहले से कानून
इटली में सार्वजनिक स्थानों पर चेहरे की पहचान मुश्किल बनाने वाले परिधानों को लेकर 1975 से कानून मौजूद है। हालांकि, इसमें “उचित कारण” की अवधारणा भी रही है।
2008 में इटली के Council of State ने एक मामले में माना था कि धार्मिक कारणों से पहना जाने वाला नकाब सामान्य रूप से पहचान छिपाने के उद्देश्य से नहीं होता और धार्मिक या सांस्कृतिक कारण कुछ परिस्थितियों में “उचित कारण” माने जा सकते हैं। हालांकि, पुलिस पहचान के लिए जरूरत पड़ने पर चेहरा दिखाने को कह सकती है।
इस पृष्ठभूमि में स्कूलों के लिए नया स्पष्ट प्रतिबंध मौजूदा कानून की तुलना में एक अलग और विशेष शिक्षा-संबंधी व्यवस्था तैयार करता है।
यूरोप में पहले भी हो चुका है बुर्का-नकाब पर विवाद
चेहरा ढकने वाले परिधानों को लेकर यूरोप में लंबे समय से कानूनी और मानवाधिकार बहस चलती रही है। फ्रांस और बेल्जियम सहित कुछ यूरोपीय देशों में सार्वजनिक स्थानों पर पूर्ण चेहरे के आवरण पर प्रतिबंध हैं।
यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स ने फ्रांस में सार्वजनिक स्थानों पर पूर्ण चेहरे के आवरण पर प्रतिबंध को बरकरार रखा था। मानवाधिकार संगठनों ने ऐसे प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों से जुड़े सवाल उठाए हैं।
इटली का नया प्रावधान फिलहाल विशेष रूप से स्कूलों पर केंद्रित है। इसे स्थायी कानून बनाने के लिए संसद की मंजूरी आवश्यक होगी।
आगे संसद की मंजूरी पर नजर
मेलोनी सरकार द्वारा मंजूर डिक्री-लॉ के बाद अब इस नीति की अगली बड़ी परीक्षा संसद में होगी। सरकार को इसे 60 दिनों के भीतर मंजूरी दिलानी होगी।
इस बीच स्कूल प्रशासकों और शिक्षक संगठनों ने इसके व्यावहारिक प्रभावों को लेकर सवाल उठाए हैं। कुछ स्कूलों का कहना है कि बड़ी संख्या में प्रवासी आबादी वाले इलाकों में 30 प्रतिशत सीमा लागू करना प्रशासनिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इस तरह इटली की नई शिक्षा नीति एक साथ दो मुद्दों को संबोधित करती है—स्कूलों में चेहरे को ढकने वाले परिधानों पर स्पष्ट प्रतिबंध और भाषा संबंधी कठिनाइयों वाले छात्रों के अत्यधिक संकेंद्रण को सीमित करना। अब इसका स्थायी कानूनी स्वरूप संसद की मंजूरी और आगे की राजनीतिक बहस पर निर्भर करेगा।











