बागेश्वर धाम में महाशिवरात्रि पर 300 बेटियों का कन्या विवाह, गरीब और अनाथों को मिलेगा नया जीवन

Bageshwar Dham Kanya Vivah: महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर बागेश्वर धाम में 300 बेटियों का कन्या विवाह आयोजित किया गया। इस आयोजन से गरीब और अनाथ लड़कियों को

बागेश्वर धाम में शिवरात्रि के अवसर पर पंडित धीरेंद्र शास्त्री 300 गरीब, अनाथ और जरूरतमंद बेटियों का विवाह करेंगे। यह सप्तम कन्या विवाह महोत्सव नेपाल समेत देश के 10 राज्यों की बेटियों के लिए आयोजित किया जा रहा है।

Bageshwar Dham Kanya Vivah: इस साल महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर बागेश्वर धाम में आयोजित होने जा रहे सप्तम कन्या विवाह महोत्सव की तैयारी जोरों पर है। पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने इस महोत्सव के लिए 300 बेटियों की सूची जारी कर दी है। इनमें कुछ बेटियां अनाथ हैं, कुछ गरीब परिवारों से हैं, और कई दिव्यांग माता-पिता की संतानें भी शामिल हैं। यह पहल सामाजिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इन बेटियों का विवाह पूर्ण रूप से दान पेटी की राशि से किया जाएगा, ताकि किसी भी बेटी को आर्थिक बोझ का सामना न करना पड़े।

10 राज्यों और नेपाल से शामिल बेटियां

इस कन्या विवाह महोत्सव में कुल 300 बेटियों को शिवरात्रि के दिन सात फेरे दिलाए जाएंगे। बेटियों का चयन देश के 10 राज्यों और 60 जिलों से किया गया है।

  • मध्य प्रदेश से सबसे अधिक 229 बेटियां शामिल होंगी।
  • उत्तर प्रदेश से 56 बेटियां इस आयोजन में शामिल होंगी।
  • इसके अलावा, नेपाल से भी एक बेटी बागेश्वर धाम पहुंचेगी।

यह आयोजन न केवल धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाता है, बल्कि सामाजिक रूप से भी बेटियों को सम्मान और सुरक्षा का संदेश देता है।

अनाथ और जरूरतमंद बेटियों की संख्या

300 चयनित बेटियों में कई अनाथ और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से हैं:

  • 60 बेटियां पूरी तरह अनाथ हैं।
  • 138 बेटियों के पिता नहीं हैं।
  • 28 बेटियों की माताएं नहीं हैं।
  • इसके अलावा, 8 दिव्यांग बेटियां और 23 दिव्यांग माता-पिता की बेटियां इस महोत्सव में शामिल होंगी।
  • कुल 39 बेटियां अत्यंत गरीब परिवारों से हैं।

इस प्रकार यह महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक उत्थान का एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

दान पेटी से उठाए जा रहे खर्च

बागेश्वर धाम में इस आयोजन का संपूर्ण खर्च दान पेटी से उठाया जाएगा। पंडित धीरेंद्र शास्त्री का मानना है कि अगर देशभर के मठ-मंदिर और धार्मिक संस्थान इस तरह की पहल करें, तो हर गरीब और अनाथ बेटी को सम्मानपूर्वक विवाह का अवसर मिल सकेगा। बेटियों और वर पक्ष से 1 दिसंबर से 15 दिसंबर के बीच सभी दस्तावेज और फॉर्म जमा करवाए गए थे। चयन इसी आधार पर किया गया। इस कार्यक्रम में शामिल बेटियों के लिए मेहंदी, श्रृंगार और पारंपरिक तैयारियां पहले से शुरू कर दी गई हैं। कुछ चयनित कन्याओं के नाम इस प्रकार हैं:

रंजीता सेन, नीलू कुशवाहा, रानू रघुवंशी, सपना विश्वकर्मा, मांसी श्रीवास्तव, मासूम प्रजापति, ज्योति, शिवानी कुशवाहा, राधिका खेंगर, नीलम कोरोची, शशि, अंजो सेन, लक्ष्मी अनुरागी, पूजा बंसल, साधना आदिवासी, अनमोल रैकवार, धनवंती नगपुरे, आरती रैकवार, गायत्री अहिरवार, हिरिया बाई कोंदर, वर्षा अहिरवार, मीनू सेन, प्रिया देवी विश्वकर्मा, रक्षा देवी कचेरे, वंदना अहिरवार, पूजा यादव, पूजा विश्वकर्मा, माया अहिरवार, रानी नामदेव, लक्ष्मी सोनी, पदमनी रैकवार, देवकुमारी, कुमकुम पुष्पकार, कु. रानी कुशवाहा।

इन बेटियों के लिए यह धार्मिक और सामाजिक सम्मान का अनोखा अवसर है। बागेश्वर धाम का यह महोत्सव गरीब और अनाथ बेटियों को सम्मान देने का प्रतीक बन चुका है। 

Leave a comment