UPI Wrong Transfer: पैसे वापस मिलेंगे या नहीं? सबसे पहले जानें नियम

UPI में गलती से भेजे पैसे रिसीवर की माने जाते हैं। वापसी तभी संभव है जब रिसीवर सहमत हो, अन्यथा बैंक सीमित मदद कर सकता है।

गलत UPI ट्रांसफर के मामलों में नियम काफी सख्त हैं। एक बार पेमेंट सफल होने के बाद रकम कानूनी रूप से रिसीवर की मानी जाती है और बैंक बिना उसकी सहमति पैसा वापस नहीं ले सकता। पैसे वापसी की संभावना तभी बनती है, जब रिसीवर खुद सहमत हो।

UPI Wrong Transfer: देशभर में UPI यूजर्स के बीच यह सवाल आम है कि गलत अकाउंट में पैसे चले जाएं तो क्या वापसी संभव है। NPCI के नियमों के मुताबिक, जब ट्रांजैक्शन सफल हो जाता है, तब रकम सीधे रिसीवर के बैंक अकाउंट में पहुंच जाती है। यह नियम हर जगह लागू होता है और जिम्मेदारी पेमेंट भेजने वाले की होती है। पैसे वापस तभी मिल सकते हैं, जब रिसीवर सहमति दे, इसलिए सतर्कता जरूरी मानी जाती है।

गलत UPI ट्रांसफर के बाद क्या कहता है नियम

UPI सिस्टम में सफल ट्रांजैक्शन के बाद वह रकम कानूनी रूप से रिसीवर की मानी जाती है। बैंक बिना उसकी अनुमति अकाउंट से पैसा नहीं काट सकता, भले ही ट्रांसफर गलती से हुआ हो। इसलिए पैसे वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।

NPCI और बैंकों का कहना है कि पेमेंट से पहले सही UPI आईडी और रिसीवर का नाम चेक करना भेजने वाले की जिम्मेदारी है। यही वजह है कि यहां दूसरा मौका नहीं मिलता।

पैसे वापस पाने का सही तरीका

अगर गलती से गलत अकाउंट में UPI पेमेंट हो गया है तो सबसे पहला कदम उसी UPI ऐप में शिकायत दर्ज करना है। हर ट्रांजैक्शन के साथ Dispute या Wrong Transfer का विकल्प मिलता है, जहां शिकायत दर्ज की जा सकती है।

शिकायत के बाद आपका बैंक रिसीवर के बैंक से संपर्क करता है। अगर रिसीवर पैसा लौटाने के लिए सहमत हो जाता है तो कुछ दिनों में रकम वापस आ सकती है। लेकिन रिसीवर के मना करने पर बैंक भी सीमित मदद ही कर पाता है।

रिसीवर मना कर दे तो क्या विकल्प हैं

अगर सामने वाला व्यक्ति पैसे लौटाने से इनकार कर देता है तो बैंक जबरन रिकवरी नहीं कर सकता। ऐसी स्थिति में पुलिस शिकायत एक विकल्प हो सकता है, लेकिन इसमें भी पैसे मिलने की कोई पक्की गारंटी नहीं होती।

यही वजह है कि UPI को तेज और सुविधाजनक माना जाता है, लेकिन गलती होने पर यही स्पीड समस्या भी बन जाती है।

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