कांग्रेस ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बजट सत्र को लेकर उनकी टिप्पणियों को लेकर हमला बोला। पार्टी ने कहा कि वे हर सत्र की शुरुआत से पहले "देश को अपना वही पाखंडी संदेश" देते हैं और आज का प्रदर्शन इसी कड़ी का हिस्सा है।
नई दिल्ली: बजट सत्र 2026 की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान और आर्थिक सर्वे को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने पीएम मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए उन पर “देश को पाखंड से भरा संदेश” देने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि हर सत्र से पहले प्रधानमंत्री वही बातें दोहराते हैं, जबकि संसदीय परंपराओं और विपक्ष की भूमिका को लगातार कमजोर किया जा रहा है।
कांग्रेस के प्रभारी महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने गुरुवार को बयान जारी कर कहा कि बजट सत्र के दौरान भी सरकार का रवैया लोकतांत्रिक नहीं रहने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री न तो राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्ष को विश्वास में लेते हैं और न ही सर्वदलीय बैठकें बुलाने की पहल करते हैं।
कांग्रेस का आरोप: बिना चर्चा के पास कराए जाते हैं विधेयक
जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद के हर सत्र की शुरुआत में “देश के नाम संदेश” देते हैं, लेकिन वह संदेश जमीनी हकीकत से कोसों दूर होता है। उनके मुताबिक, सरकार अक्सर आखिरी समय में अहम विधेयक पेश कर देती है और बिना पर्याप्त बहस व संसदीय जांच के उन्हें पारित करा लिया जाता है।
उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री संसद में बैठकर विपक्ष के सवालों और चिंताओं का जवाब देने से बचते हैं। इसके बजाय, वह संसद की कार्यवाही के दौरान भी राजनीतिक रैलियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाषण देने में ज्यादा रुचि दिखाते हैं। जयराम रमेश ने कहा, हर सत्र से पहले प्रधानमंत्री संसद को पृष्ठभूमि बनाकर वही पाखंड से भरा देश के नाम संदेश देते हैं। आज का बयान भी उसी श्रृंखला का हिस्सा है।

बजट सत्र 2026 से पहले क्यों बढ़ा विवाद?
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट सत्र की शुरुआत से पहले संसद भवन परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए आर्थिक सर्वे और सरकार की नीतियों पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत अब लंबे समय से लंबित समस्याओं से बाहर निकल रहा है और देश को दीर्घकालिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
पीएम मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि अब “समाधान खोजने का समय है, बाधाएं पैदा करने का नहीं।” उन्होंने यह भी दोहराया कि उनकी सरकार केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि योजनाओं की अंतिम-मील डिलीवरी सुनिश्चित करने पर फोकस कर रही है।
भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते पर पीएम मोदी का जोर
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे महत्वाकांक्षी भारत के लिए एक बड़ा अवसर बताया और देश के निर्माताओं से आग्रह किया कि वे नए खुले वैश्विक बाजारों का पूरा लाभ उठाएं। पीएम मोदी के मुताबिक, यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था, निर्यात और रोजगार के लिहाज से बेहद अहम साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास से भरा भारत आज दुनिया के लिए “आशा की किरण” बनकर उभरा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता हमेशा मानव-केंद्रित विकास रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के सर्वांगीण विकास के लिए उठाए जाने वाले हर कदम के केंद्र में आम नागरिक होता है। पीएम ने यह भी कहा कि सरकार ने बीते वर्षों में कई संरचनात्मक सुधार किए हैं और अब भारत वैश्विक मंच पर एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभर रहा है।










