बैसाखी 2026 पर आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की ऐतिहासिक घटना को याद किया जा रहा है। 1699 की सभा में गुरु गोविंद सिंह जी ने साहस और समर्पण की परीक्षा लेकर ‘पंज प्यारे’ का निर्माण किया। यह घटना समानता, निष्ठा और सिख पहचान की नींव मानी जाती है।
बैसाखी 2026 खालसा पंथ स्थापना: बैसाखी के अवसर पर देशभर में 1699 में हुई उस ऐतिहासिक घटना को याद किया जा रहा है, जब पंजाब के आनंदपुर साहिब में गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। यह घटना मुगल शासन काल में धर्म और समाज की रक्षा के उद्देश्य से हुई थी। उस समय हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में गुरु जी ने साहस की परीक्षा ली और पांच समर्पित अनुयायियों को ‘पंज प्यारे’ के रूप में चुना। यह घटना सिख पहचान, समानता और अनुशासन की नींव मानी जाती है।
आनंदपुर साहिब की सभा और विश्वास की परीक्षा
1699 में आनंदपुर साहिब के केशगढ़ में विशाल सभा आयोजित की गई थी, जहां हजारों श्रद्धालु मौजूद थे। उस समय मुगल शासन के अत्याचार के बीच धर्म और समाज की रक्षा की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
सभा के दौरान गुरु गोविंद सिंह जी ने नंगी तलवार लेकर उपस्थित लोगों से धर्म के लिए बलिदान की मांग की। इस अप्रत्याशित घोषणा से पूरे पंडाल में सन्नाटा छा गया, लेकिन इसी पल ने इतिहास की दिशा बदल दी।

पांच बलिदानी बने पंज प्यारे
पहले लाहौर निवासी दयाराम आगे आए और बलिदान के लिए तैयार हुए। इसके बाद एक-एक कर पांच श्रद्धालु आगे आए, जिन्होंने अपने समर्पण और साहस से इतिहास रच दिया।
इन पांचों को बाद में “पंज प्यारे” के रूप में जाना गया, जो सिख परंपरा में समानता और निष्ठा का प्रतीक बने। यह घटना सिख धर्म में जाति और भेदभाव से ऊपर उठकर एकता का संदेश देती है।
खालसा पंथ की स्थापना और नई पहचान
गुरु गोविंद सिंह जी ने बाद में इन पांचों को जीवित अवस्था में बाहर लाकर अमृत दीक्षा दी और खालसा पंथ की स्थापना की। इस प्रक्रिया ने अनुयायियों को एक संगठित और अनुशासित पहचान दी।
इसके बाद पंच ककार केश, कड़ा, कृपाण, कंघा और कछैरा को सिख पहचान का हिस्सा बनाया गया। यह परंपरा आज भी सिख धर्म की मूल पहचान और अनुशासन का प्रतीक है।
बैसाखी का धार्मिक और सामाजिक संदेश
बैसाखी केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और साहस का प्रतीक भी है। यह दिन नई फसल, नई शुरुआत और नई ऊर्जा का संदेश देता है।
सिख इतिहास में यह दिन उस परिवर्तन का प्रतीक है, जिसने एक साधारण जनसमूह को एक मजबूत, निडर और संगठित समुदाय में बदल दिया।








