बालूशाही एक पारंपरिक भारतीय मिठाई है, जो अपनी खस्ता बनावट और रसीले स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। यह दिखने में डोनट जैसी होती है, लेकिन इसका स्वाद पूरी तरह अलग और अनोखा होता है। इसे मैदे और घी के मेल से बनाया जाता है और फिर चीनी की चाशनी में डुबोया जाता है। बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम, यह मिठाई त्योहारों और शादियों की शान है।
सामग्री
- मैदा: 2 कप
- शुद्ध घी: ½ कप (मोयन के लिए)
- दही: ¼ कप
- बेकिंग सोडा: एक चुटकी
- चीनी: 1.5 कप (चाशनी के लिए)
- पानी: 1 कप
- इलायची पाउडर: ½ छोटा चम्मच
- घी/तेल: तलने के लिए
- सजावट: पिस्ता कतरन और केसर
बनाने का तरीका
- आटा तैयार करें: एक बर्तन में मैदा, घी, दही और बेकिंग सोडा मिलाएं। इसे हल्के हाथों से इकट्ठा करें (आटे की तरह गूंथना नहीं है, बस जोड़ना है ताकि परतें बनी रहें)। इसे 15 मिनट ढककर रखें।
- आकार दें: आटे की छोटी लोइयां तोड़ें, उन्हें गोल करें और बीच में अंगूठे से छेद (डिंपल) बना दें।
- तलना: कढ़ाई में घी गर्म करें। बालूशाही को बिल्कुल धीमी आंच पर सुनहरा होने तक तलें। धीमी आंच से ही यह अंदर तक खस्ता बनेगी।
- चाशनी: दूसरी तरफ चीनी और पानी उबालकर एक तार की चाशनी बना लें और इलायची पाउडर डालें।
- डुबोना: तली हुई गर्म बालूशाही को गुनगुनी चाशनी में 5-10 मिनट के लिए डाल दें ताकि वह रस सोख ले।
परोसने के तरीके
- गरम या ठंडा: इसे हल्का गुनगुना या ठंडा दोनों तरह से परोसा जा सकता है।
- सजावट: परोसते समय ऊपर से बारीक कटे पिस्ता या चांदी का वर्क लगाकर इसे शाही लुक दें।
- जोड़ी: इसे अक्सर रबड़ी के साथ परोसना लोग बहुत पसंद करते हैं।
खाने के फायदे
बालूशाही मुख्य रूप से ऊर्जा का एक बेहतरीन स्रोत है। इसमें मौजूद चीनी और मैदा शरीर को तत्काल ऊर्जा (Instant Energy) प्रदान करते हैं, जिससे थकान जल्दी दूर होती है। चूँकि इसे बनाने में शुद्ध घी का उपयोग होता है, इसलिए यह शरीर को आवश्यक वसा (Healthy Fats) भी देती है, जो सीमित मात्रा में जोड़ों और त्वचा के लिए फायदेमंद हो सकती है। इसके अलावा, इसका स्वादिष्ट और मीठा स्वाद 'फील-गुड' हार्मोन रिलीज करने में मदद करता है, जिससे तनाव कम होता है और मूड खुशनुमा बना रहता है।











