जम्मू-कश्मीर के बांडीपोरा जिला अस्पताल से रेफर की गई गर्भवती महिला ने एम्बुलेंस में बच्चे को जन्म दिया। घटना के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि अस्पताल प्रशासन ने जांच समिति गठित कर दो डॉक्टरों से जवाब मांगा है।
Jammu-Kashmir: जम्मू-कश्मीर के बांडीपोरा जिला अस्पताल में कथित लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां रेफर की गई गर्भवती महिला ने अस्पताल परिसर से निकलने के कुछ मिनट बाद एम्बुलेंस में ही बच्चे को जन्म दे दिया। घटना के बाद परिवार ने डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
अस्पताल से रेफर होने के बाद एम्बुलेंस में हुआ प्रसव
उत्तरी कश्मीर के बांडीपोरा जिले के लहरवालपोरा निवासी आज़ाद अहमद डार अपनी पत्नी कुलसूमा बेगम को गर्भावस्था संबंधी दिक्कतों के कारण जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल में महिला को प्रसव कक्ष में भर्ती कर जांच की गई, लेकिन बाद में डॉक्टरों ने उन्हें आगे के इलाज के लिए श्रीनगर रेफर कर दिया।
परिजनों का आरोप है कि महिला को पहले से प्रसव पीड़ा हो रही थी और उसकी स्थिति नाजुक थी। इसके बावजूद अस्पताल में प्रसव कराने के बजाय उन्हें एम्बुलेंस से दूसरे अस्पताल भेज दिया गया।
अस्पताल परिसर से एम्बुलेंस निकलने के कुछ ही मिनट बाद महिला ने वाहन के अंदर ही सामान्य प्रसव कर दिया। घटना के बाद परिवार के सदस्यों में भारी नाराजगी देखने को मिली।
परिजनों ने डॉक्टरों पर लगाए गंभीर आरोप
परिवार के लोगों ने आरोप लगाया कि अगर महिला का प्रसव एम्बुलेंस में हो सकता था, तो जिला अस्पताल में ही डिलीवरी क्यों नहीं कराई गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि मरीज की स्थिति का सही आकलन किए बिना रेफर किया गया।
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।
अस्पताल प्रशासन ने शुरू की जांच
मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रशासन ने ड्यूटी पर मौजूद दो डॉक्टरों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। इनमें डा. फेंसी बुलबुल और डा. बाजिला शामिल हैं। दोनों को तीन दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि डॉक्टरों को यह स्पष्ट करना होगा कि मरीज को किन परिस्थितियों में रेफर किया गया और एम्बुलेंस में प्रसव होने तक क्या स्थिति रही।
इसके अलावा पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति का भी गठन किया गया है। समिति की अध्यक्षता डा. जावेद अहमद भट करेंगे। जांच टीम को तीन दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
घटना के बाद स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल
इस घटना ने जिला अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं के मामलों में समय पर और सही निर्णय बेहद जरूरी होता है।
अब सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि मामले में वास्तव में लापरवाही हुई थी या नहीं।












