AIADMK प्रमुख ई. पलानीस्वामी ने तमिलनाडु सरकार पर लंबे बिजली कटौती को लेकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि खराब योजना के कारण राज्य में बिजली संकट बढ़ा है, जिससे घरों और उद्योगों दोनों पर गंभीर असर पड़ रहा है।
चेन्नई: तमिलनाडु में कथित बिजली कटौती और आपूर्ति में बाधाओं को लेकर राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। AIADMK के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि खराब योजना और प्रशासनिक अस्थिरता के कारण राज्य के कई हिस्सों में लंबे समय तक बिजली कटौती हो रही है, जिससे आम जनता और उद्योग दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि गर्मियों के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने के बावजूद सरकार समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठा पाई, जिसके कारण हालात बिगड़ते जा रहे हैं।
गर्मियों में बढ़ती मांग और प्रबंधन पर सवाल
पलानीस्वामी ने अपने बयान में कहा कि तमिलनाडु में हर साल गर्मियों के दौरान घरेलू खपत और औद्योगिक गतिविधियों के कारण बिजली की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार इस बढ़ती मांग को संभालने में असफल रही है।
उन्होंने कहा कि दिन के समय बढ़ते उपयोग और उद्योगों में बिजली की खपत के कारण राज्य की ऊर्जा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिसे प्रभावी योजना के जरिए नियंत्रित किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
AIADMK सरकार का दावा: बिजली संकट से उबारा गया था राज्य
पलानीस्वामी ने अपनी पार्टी के शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि 2011 में जब AIADMK सरकार सत्ता में आई थी, तब राज्य कई क्षेत्रों में 10 घंटे से अधिक की बिजली कटौती का सामना कर रहा था। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता के नेतृत्व में सरकार ने इस संकट को नियंत्रित किया और तमिलनाडु को बिजली सरप्लस राज्य में बदल दिया।
उन्होंने कहा कि उस समय सरकार ने ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए थे, जिनमें थर्मल, सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन का विस्तार शामिल था।
ऊर्जा उत्पादन और खरीद रणनीति पर जोर
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि AIADMK सरकार ने केवल उत्पादन बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार और निजी कंपनियों से अल्पकालिक बिजली खरीदकर आपूर्ति को संतुलित किया।

उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के कारण राज्य में बिजली आपूर्ति अपेक्षाकृत स्थिर रही और लोगों को अनियोजित कटौती का सामना नहीं करना पड़ा।
वर्तमान सरकार पर “अस्थिर और सतही” नीति का आरोप
पलानीस्वामी ने मौजूदा प्रशासन पर सीधा हमला करते हुए कहा कि सरकार की नीतियां सतही और अस्थिर हैं। उनके अनुसार, यही कारण है कि राज्य में अब लगातार और बिना पूर्व सूचना के बिजली कटौती की शिकायतें बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि इस स्थिति ने आम नागरिकों के दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई क्षेत्रों में लोग रातों की नींद हराम होने और दिन के समय आवश्यक कार्यों में बाधा आने की शिकायत कर रहे हैं।
आम जनता पर असर: घरों से लेकर उद्योग तक प्रभावित
AIADMK नेता ने दावा किया कि बिजली कटौती का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) तथा बड़े उद्योग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उत्पादन में रुकावट, समय पर काम पूरा न हो पाना और बढ़ती लागत के कारण आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि लगातार बिजली बाधा ने सामान्य जीवन को प्रभावित किया है।
चेन्नई और उपनगरीय क्षेत्रों में प्रदर्शन के आरोप
पलानीस्वामी ने विशेष रूप से चेन्नई के उपनगरीय इलाकों का उल्लेख करते हुए कहा कि थंडैयारपेट जैसे क्षेत्रों में लोगों ने बार-बार बिजली कटौती के खिलाफ प्रदर्शन किया है।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति सरकार की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है और प्रशासन को तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।
“तुरंत कार्रवाई जरूरी” की अपील
AIADMK महासचिव ने राज्य सरकार से अपील की कि वह यह बहाना न बनाए कि उसने हाल ही में कार्यभार संभाला है। उन्होंने कहा कि जनता को तत्काल राहत देने के लिए युद्ध स्तर पर कदम उठाने की जरूरत है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थिति को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।
राजनीतिक विश्लेषण: बिजली संकट बन सकता है बड़ा मुद्दा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु में बिजली कटौती का मुद्दा आने वाले समय में एक बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है। गर्मियों में ऊर्जा मांग बढ़ने के साथ-साथ विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सरकार आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बनाने में विफल रहती है, तो यह जनता के बीच असंतोष को और बढ़ा सकता है।












