Bank of Baroda Q1 Results: NMC विवाद से मुनाफे में 48% की गिरावट, ₹5,680 करोड़ भुगतान का असर

Bank of Baroda Q1 Results में मुनाफा 48% घटा है। NMC विवाद से जुड़े ₹5,680 करोड़ के भुगतान का असर बैंक के तिमाही नतीजों पर पड़ा। जानें पूरी जानकारी।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। बैंक ने शुक्रवार को बताया कि अप्रैल-जून तिमाही में उसका एकीकृत शुद्ध लाभ 48 प्रतिशत घटकर 1,783 करोड़ रुपये रह गया।

Bank of Baroda Q1 Results: सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। अप्रैल से जून 2026 के बीच बैंक के एकीकृत शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर 48 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर ₹1,783 करोड़ रह गया। बैंक के अनुसार, मुनाफे में गिरावट का मुख्य कारण संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के NMC ग्रुप से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद को खत्म करने के लिए किया गया बड़ा भुगतान है।

बैंक ने बताया कि NMC मामले में अदालत के बाहर समझौते के तहत करीब ₹5,680 करोड़ का भुगतान किया गया। इस एकमुश्त वित्तीय प्रभाव का असर तिमाही के शुद्ध लाभ पर पड़ा। हालांकि, बैंक के मुख्य कारोबार से जुड़े कई संकेतकों में सुधार देखने को मिला है।

NMC विवाद के निपटारे से घटा मुनाफा

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक (MD) देबदत्त चंद ने कहा कि NMC से जुड़े वर्षों पुराने और जटिल विवाद को समाप्त करने के लिए अदालत के बाहर समझौता करना बैंक के व्यावसायिक हित में उचित निर्णय था। यह विवाद अबू धाबी के साथ-साथ इंग्लैंड और वेल्स की अदालतों से भी जुड़ा हुआ था। बैंक ने 2 जुलाई को शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया था कि उसने NMC Health PLC, NMC Healthcare Ltd और NMC Holding Ltd के साथ समझौता किया है।

समझौते के तहत बैंक की अबू धाबी शाखा के माध्यम से लगभग 60 करोड़ डॉलर का भुगतान किया गया, जिसकी भारतीय मुद्रा में कीमत करीब ₹5,700 करोड़ के आसपास है। इस भुगतान का वित्तीय प्रभाव जून तिमाही के परिणामों में दिखाई दिया और बैंक के शुद्ध मुनाफे में तेज गिरावट दर्ज हुई।

शुद्ध ब्याज आय में करीब 10% की वृद्धि

मुनाफे में गिरावट के बावजूद बैंक के मुख्य परिचालन प्रदर्शन में कुछ सकारात्मक संकेत दिखाई दिए। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में बैंक की शुद्ध ब्याज आय (NII) लगभग 10 प्रतिशत बढ़कर ₹12,524 करोड़ हो गई। बैंक के लोन पोर्टफोलियो में भी सालाना आधार पर 17 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, वैश्विक स्तर पर बैंक का शुद्ध ब्याज मार्जिन (NIM) घटकर 2.77 प्रतिशत रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 2.91 प्रतिशत था।

NIM में गिरावट के बावजूद बैंक प्रबंधन ने भविष्य के कारोबार को लेकर सकारात्मक रुख बनाए रखा है। बैंक का कहना है कि वह चालू वित्त वर्ष में ऋण पोर्टफोलियो की वृद्धि को मजबूत बनाए रखने के लक्ष्य पर आगे बढ़ रहा है।

लोन पोर्टफोलियो में 12-14% वृद्धि का लक्ष्य

देबदत्त चंद के अनुसार, बैंक वित्त वर्ष 2026-27 में अपने कुल लोन पोर्टफोलियो में 12 से 14 प्रतिशत की वृद्धि के लक्ष्य पर कायम है। इसके साथ ही बैंक का लक्ष्य वैश्विक NIM को 2.75 प्रतिशत से 2.95 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखना है। बैंक के कुल प्रावधानों में भी उल्लेखनीय कमी आई है। जून तिमाही में कुल प्रावधान घटकर ₹643 करोड़ रह गए, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आंकड़ा ₹1,967 करोड़ था। 

कम प्रावधान बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता और क्रेडिट लागत के लिहाज से सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, हालांकि बैंक के समग्र वित्तीय प्रदर्शन पर NMC मामले का एकमुश्त प्रभाव काफी बड़ा रहा।

FCNR(B) जमा से फंड जुटाने पर जोर

बैंक ऑफ बड़ौदा विदेशी मुद्रा अनिवासी (FCNR(B)) जमा के जरिए भी संसाधन जुटाने पर ध्यान दे रहा है। बैंक के सीईओ ने बताया कि अब तक इस माध्यम से करीब 70 करोड़ डॉलर जुटाए जा चुके हैं। बैंक को उम्मीद है कि जुलाई के अंत तक FCNR(B) जमा के जरिए जुटाई गई राशि बढ़कर 1 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। इससे बैंक के विदेशी मुद्रा संसाधनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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