उत्तर प्रदेश के मथुरा में वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में सावन मास के दौरान कुछ वीआईपी लोगों द्वारा कुर्सी पर बैठकर ठाकुर जी के दर्शन करने का मामला सामने आया। हिंदू महासभा ने इसे मंदिर की मर्यादा और अदालत के आदेश का उल्लंघन बताया। अदालत ने मंदिर प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
Mathura Controversy: उत्तर प्रदेश के मथुरा में वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में सावन मास के दौरान कुछ वीआईपी लोगों ने कुर्सी पर बैठकर ठाकुर जी के दर्शन किए, जिसके साथ उनके सुरक्षाकर्मी भी हथियारों से लैस थे और पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग हुई। हिंदू महासभा ने याचिका दायर कर इसे मंदिर की मर्यादा और कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया। अदालत ने मंदिर प्रबंधन, जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और मामले की जांच जारी है।
बांके बिहारी मंदिर में वीआईपी दर्शन विवाद
उत्तर प्रदेश के मथुरा में वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में सावन मास के दौरान कुछ वीआईपी लोगों द्वारा कुर्सी पर बैठकर ठाकुर जी के दर्शन करने का मामला सामने आया है। हिंदू महासभा ने आरोप लगाया कि इस घटना ने मंदिर की मर्यादा और अदालत के आदेश का उल्लंघन किया। घटना के दौरान वीआईपी लोगों के साथ सुरक्षाकर्मी हथियारों से लैस थे और पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया गया, जिससे मंदिर की गरिमा को ठेस पहुंची।
अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष पंडित संजय हरियाणा और वकील दीपक शर्मा ने इस मामले में अदालत में संयुक्त याचिका दाखिल की। याचिका में कहा गया कि सावन मास में मंदिर के जगमोहन क्षेत्र में ठाकुर जी का सिंहासन विराजमान होता है, और इसी दौरान कुछ वीआईपी लोगों ने विशेष सुविधा के तहत कुर्सी पर बैठकर दर्शन किए। अदालत ने याचिका पर मंदिर प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और मामले की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
भक्त बनकर खुद को बड़ा दिखाने की कोशिश
संयुक्त पिटीशन सिविल जज (जूनियर डिवीजन) मथुरा की अदालत ने 29 अगस्त को सुनवाई करते हुए मंदिर के प्रबंधक, जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक समेत मंदिर प्रबंधन को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। हिंदू महासभा के पंडित संजय हरियाणा ने कहा कि ठाकुर जी से बड़ा कोई नहीं हो सकता, लेकिन कुछ वीआईपी लोगों ने खुद को भगवान से ऊपर दिखाने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि भक्त बनकर दर्शन करने वाली इन हरकतों ने मंदिर की मर्यादा और आस्था को ठेस पहुंचाई, इसलिए कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।
अदालत के आदेश की अवमानना
वकील दीपक शर्मा ने कहा कि मंदिर के सिंहासन पर कुर्सी लगाना, हथियारों का प्रदर्शन करना और वीडियो रिकॉर्डिंग करना न केवल भक्तों की आस्था का अपमान है, बल्कि यह अदालत के आदेश की खुली अवमानना भी है। उनका कहना है कि यह मामला कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट की श्रेणी में आता है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और आदेश को मिसाल के रूप में देखा जा सके।