CJI सूर्यकांत ने भूटान न्यायपालिका में तकनीकी सुधार और युवाओं के लिए भारत आने के अवसरों पर दिया जोर

CJI सूर्यकांत ने भूटान न्यायपालिका में तकनीकी सुधार और युवाओं के लिए भारत आने के अवसरों पर दिया जोर

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने गुरुवार को भूटान के रॉयल यूनिवर्सिटी, थिम्पू में आयोजित एक कार्यक्रम में भूटानी न्यायपालिका में तकनीकी सुधार और न्याय तक पहुँच को आसान बनाने के लिए अपने सुझाव साझा किए। 

नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश Suryakant ने गुरुवार को भूटान की न्यायिक प्रणाली में प्रौद्योगिकी-आधारित सुधारों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि न्याय तक पहुंच बढ़ाने के लिए तकनीकी प्रगति का अधिक उपयोग जरूरी है। उन्होंने Thimphu, Bhutan में भूटान के रॉयल विश्वविद्यालय में ‘21वीं सदी में न्याय तक पहुंच: प्रौद्योगिकी, कानूनी सहायता और जनकेंद्रित न्यायालय’ विषय पर भाषण दिया। 

इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री Shering Tobgay से कहा कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय उच्च न्यायालयों के साथ मिलकर भूटानी छात्रों को इंटर्नशिप का मौका देगा, तो उन्हें बेहद खुशी होगी।

तकनीकी सुधार पर जोर

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि प्रौद्योगिकी केवल एक आधुनिक माध्यम है, न्याय का मूल उद्देश्य हमेशा सुलभ और पारदर्शी सेवा होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालय की कार्यप्रणाली का डिजिटलीकरण सिर्फ प्रक्रियाओं को तेज करने का माध्यम नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के लोकतंत्रीकरण का जरिया भी होना चाहिए।

सूर्यकांत ने बताया कि भारतीय न्यायपालिका ने पहले हस्तलिखित दलीलें, मौखिक गवाहों के बयान और भारी फाइलों पर आधारित पारंपरिक सिस्टम अपनाया था। इन पारंपरिक तरीकों में रिकॉर्ड रखने में कठिनाई थी और न्यायिक अधिकारी अक्सर फाइलों के पीछे दबे रहते थे। लेकिन 21वीं सदी में तकनीकी बदलाव ने कानूनी पेशेवरों और नागरिकों दोनों के लिए न्याय तक पहुंच को पुनर्परिभाषित किया। 

उन्होंने कहा कि डिजिटलाइजेशन ने ई-फाइलिंग, आभासी सुनवाई और ऑनलाइन विवाद समाधान के जरिए भूगोल या परिस्थितियों से स्वतंत्र न्याय सुनिश्चित किया है।

युवाओं के लिए अवसर

CJI सूर्यकांत ने भूटानी छात्रों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे को आश्वस्त किया कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय भूटानी छात्रों को इंटर्नशिप और प्रशिक्षण का अवसर प्रदान करेंगे, ताकि वे भारतीय न्यायिक प्रणाली और अदालतों के कामकाज का अनुभव ले सकें।

सूर्यकांत ने कहा, अदालत की कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष अनुभव गुणवत्तापूर्ण कानूनी शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा है। यह अनुभव युवाओं को न्याय के मूल सिद्धांतों और व्यावहारिक पहलुओं से जोड़ता है।

न्यायिक सुधारों का सामाजिक प्रभाव

मुख्य न्यायाधीश ने जोर देते हुए कहा कि न्याय केवल अदालतों के दरवाजों तक सीमित नहीं रह सकता। यह संपूर्ण समाज में, बाजारों और घरों तक पहुँचने योग्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीकी सुधारों के माध्यम से न्यायपालिका पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही बनाए रखते हुए नागरिकों तक न्याय की पहुँच सुनिश्चित कर रही है।

सूर्यकांत ने बताया कि शुरुआत में कागजी कार्रवाई के डिजिटलीकरण से काम शुरू हुआ, लेकिन अब यह न्यायिक प्रक्रियाओं के डिज़ाइन और निष्पादन में बदलाव का हिस्सा बन गया है।

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