‘चूड़ा-मुढ़ी खाकर रात काट रहे हैं’: बरारी घाट पर फंसे यात्रियों की बेबसी, महिला बोली- नई जगह पर नींद नहीं आएगी

भागलपुर के बरारी घाट पर फंसे यात्रियों ने रात चूड़ा-मुढ़ी खाकर बिताई। महिला बोली- नई जगह है, पूरी रात जागकर काटनी पड़ेगी।
‘चूड़ा-मुढ़ी खाकर रात काट रहे हैं’: बरारी घाट पर फंसे यात्रियों की बेबसी, महिला बोली- नई जगह पर नींद नहीं आएगी
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भागलपुर के बरारी घाट पर इन दिनों यात्रियों की भारी भीड़ और परेशानियों का दर्दनाक दृश्य देखने को मिल रहा है। विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने के बाद बड़ी संख्या में लोग नाव और वैकल्पिक रास्तों के सहारे सफर करने को मजबूर हैं। इसी बीच घाट पर फंसे यात्रियों की बेबसी सामने आई है।

रातभर घाट पर बैठे लोगों के पास न तो खाने की समुचित व्यवस्था थी और न ही ठहरने का कोई इंतजाम। कई परिवार खुले आसमान के नीचे बैठकर रात काटने को मजबूर हो गए। एक महिला ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा, “चूड़ा-मुढ़ी खा के रात काट रहल छी… नया जगह छै, रातभर जागे पड़तै, नींद नै लागतै।”

घाट पर मौजूद लोग अपने छोटे-छोटे बच्चों और सामान के साथ घंटों से नाव का इंतजार करते दिखाई दिए। कई यात्री जमीन पर चादर बिछाकर बैठे रहे, जबकि कुछ लोग पूरी रात जागते रहे।

बरारी घाट पर सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को झेलनी पड़ रही है। कई यात्रियों ने बताया कि अचानक यात्रा व्यवस्था प्रभावित होने से उन्हें खाने-पीने और रहने की समस्या का सामना करना पड़ा।

स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि घाट पर अचानक भीड़ बढ़ने के कारण खाने-पीने का सामान भी जल्दी खत्म हो जा रहा है। कई लोग सिर्फ चूड़ा, मुढ़ी और बिस्कुट खाकर समय काट रहे हैं।

घाट पर मौजूद यात्रियों के चेहरों पर थकान और चिंता साफ दिखाई दे रही थी। कुछ लोग अपने घर पहुंचने की जल्दी में थे, जबकि कई मजदूर और कामकाजी लोग अगले दिन की चिंता में परेशान दिखे।

विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद हालात अचानक बदल गए हैं। पुल प्रभावित होने से हजारों लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हुई है। अब बड़ी संख्या में लोग नावों के जरिए नदी पार करने को मजबूर हैं।

रात के समय घाट पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी लोगों में चिंता दिखाई दी। कई महिलाओं ने कहा कि अपरिचित जगह होने के कारण उन्हें डर लग रहा था। कुछ परिवार पूरी रात जागकर अपने सामान और बच्चों की निगरानी करते रहे।

प्रशासन की ओर से घाट पर पुलिस और कुछ राहत इंतजाम किए गए हैं, लेकिन यात्रियों का कहना है कि भीड़ के मुकाबले व्यवस्था काफी कम है। कई लोगों ने पीने के पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायत की।

स्थानीय लोगों ने कुछ यात्रियों की मदद के लिए खाना और पानी भी उपलब्ध कराया। कई सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों ने भी घाट पर पहुंचकर लोगों की सहायता करने की कोशिश की।

खगड़िया और भागलपुर के बीच यात्रा करने वाले लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रोजाना काम पर आने-जाने वाले लोग घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं।

कुछ यात्रियों ने बताया कि नावों की संख्या सीमित होने के कारण लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई बार क्षमता से ज्यादा भीड़ जमा हो जाती है, जिससे हादसे का खतरा भी बना रहता है।

सोशल मीडिया पर घाट की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में बच्चे जमीन पर सोते, महिलाएं सामान संभालते और लोग रातभर इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में प्रशासन को अस्थायी राहत शिविर, भोजन और सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था करनी चाहिए ताकि यात्रियों को परेशानी न हो।

फिलहाल बरारी घाट पर हजारों यात्रियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द हालात सामान्य होंगे और उन्हें राहत मिलेगी।

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