BCCI Retirement Policy पर मंथन: विदेशी लीगों में भागीदारी को लेकर बढ़ी बहस

BCCI की रिटायरमेंट पॉलिसी और भारतीय खिलाड़ियों की विदेशी T20 लीगों में भागीदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जानें क्या हैं मौजूदा नियम, संभावित बदलाव और क्रिकेट

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (Board of Control for Cricket in India) भारतीय खिलाड़ियों के लिए एक नई सेवानिवृत्ति नीति पर विचार कर रहा है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य उन मामलों को नियंत्रित करना है, जहां खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट से संन्यास लेने के तुरंत बाद विदेशी टी20 लीगों में खेलने लगते हैं।

स्पोर्ट्स न्यूज़: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) भारतीय क्रिकेटरों के लिए एक नई सेवानिवृत्ति (Retirement) नीति तैयार करने पर विचार कर रहा है। इस नीति का उद्देश्य उन खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करना है जो अंतरराष्ट्रीय या घरेलू क्रिकेट से संन्यास लेने के तुरंत बाद विदेशी टी20 लीगों में हिस्सा लेने लगते हैं। हालांकि, इस संवेदनशील विषय पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

गुरुवार को आयोजित BCCI की एपेक्स काउंसिल बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई, लेकिन बोर्ड किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका। क्रिकेट प्रशासन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस विषय पर आगे भी विचार-विमर्श जारी रहेगा क्योंकि यह भारतीय क्रिकेट के दीर्घकालिक हितों से जुड़ा मामला माना जा रहा है।

विदेशी लीगों में भागीदारी को लेकर बढ़ी बहस

हाल के वर्षों में कई भारतीय क्रिकेटरों ने सक्रिय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद विदेशी फ्रेंचाइजी लीगों में खेलना शुरू किया है। इससे BCCI के मौजूदा नियमों और भविष्य की नीतियों को लेकर बहस तेज हुई है। इस चर्चा का ताजा कारण भारतीय क्रिकेटर विजय शंकर का मामला है। उन्होंने हाल ही में भारतीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की और इसके तुरंत बाद श्रीलंका की लंका प्रीमियर लीग (LPL) के लिए खुद को उपलब्ध कराया। बाद में उन्हें 2026 सीजन के लिए कैंडी रॉयल्स टीम ने अनुबंधित भी कर लिया।

विजय शंकर से पहले भी कई भारतीय खिलाड़ी इसी राह पर चल चुके हैं। इनमें दिनेश कार्तिक, युवराज सिंह, उन्मुक्त चंद, प्रवीण तांबे और इरफान पठान जैसे अनुभवी क्रिकेटरों के नाम शामिल हैं, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट से दूरी बनाने के बाद विभिन्न अंतरराष्ट्रीय लीगों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

मौजूदा नियम क्या कहते हैं?

वर्तमान BCCI नियमों के अनुसार कोई भी सक्रिय भारतीय क्रिकेटर विदेशी लीगों में हिस्सा नहीं ले सकता। यह प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ-साथ घरेलू क्रिकेट और इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में सक्रिय खिलाड़ियों पर भी लागू होता है। बोर्ड का मानना रहा है कि इस नीति से भारतीय घरेलू क्रिकेट और आईपीएल की प्रतिस्पर्धात्मक गुणवत्ता को बनाए रखने में मदद मिलती है। हालांकि, खिलाड़ियों के करियर विकल्पों और वैश्विक टी20 लीगों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अब इस नीति की समीक्षा की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

एपेक्स काउंसिल बैठक में केवल रिटायरमेंट नीति ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर क्रिकेट के विस्तार से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए। BCCI ने फिजी और मालदीव के क्रिकेट बोर्डों को खेल के विकास के लिए तकनीकी और प्रशिक्षण सहायता देने का निर्णय लिया है। इसके तहत भारतीय बोर्ड इन देशों में प्रशिक्षकों (कोच) को भेजेगा और क्रिकेट संरचना को मजबूत बनाने के लिए अन्य संभावित सहयोग भी उपलब्ध कराएगा।

पहले भी कर चुका है सहयोग

BCCI का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट विकास में सहयोग का लंबा इतिहास रहा है। वर्ष 2019 में भारतीय बोर्ड ने पूर्व भारतीय क्रिकेटर सबा करीम और पूर्व राष्ट्रीय फील्डिंग कोच अभय शर्मा को मालदीव भेजा था, जहां उन्होंने स्थानीय क्रिकेट ढांचे का आकलन किया था। इसके अलावा भारत पहले भी अफगानिस्तान और नेपाल जैसे देशों के क्रिकेट विकास कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है। अफगानिस्तान क्रिकेट टीम ने कई वर्षों तक भारत में अपने घरेलू मैच खेले थे, जबकि नेपाल को भी प्रशिक्षण और संरचनात्मक सहायता प्रदान की गई थी।

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