बेलडांगा में झारखंडी मजदूर हत्या के बाद भड़की हिंसा पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने केंद्रीय बलों की प्रभावी तैनाती का आदेश दिया और प्रशासन को नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
Jharkhand: मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में हाल ही में भड़की हिंसा और अशांति के बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए तुरंत कदम उठाए हैं। झारखंड में एक बंगाली प्रवासी मजदूर की कथित हत्या के बाद बेलडांगा में तनाव बढ़ गया था, जिससे स्थानीय जनता की सुरक्षा और आजीविका प्रभावित होने लगी। इस पर मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया।
केंद्रीय बलों की तैनाती
उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि मुर्शिदाबाद जिले में पहले से मौजूद केंद्रीय बलों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने कहा कि हिंसाग्रस्त बेलडांगा में किसी भी अप्रिय स्थिति को बेकाबू होने से पहले नियंत्रण में लाना आवश्यक है। पीठ ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बलों की तैनाती का उद्देश्य केवल कानून और व्यवस्था बनाए रखना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
प्रशासन को निर्देश
अदालत ने पुलिस अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे जनता की सुरक्षा, आजीविका और संपत्ति की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएं। पीठ ने कहा कि बेलडांगा जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना अनिवार्य है। अदालत ने टिप्पणी की कि स्थानीय प्रशासन को स्थिति पर सतत नजर रखनी चाहिए और किसी भी समय पैदा होने वाली चुनौती का तुरंत सामना करना चाहिए।
राज्य सरकार की जवाबदेही
अदालत ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया। इसके तहत सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि मुर्शिदाबाद जिले और आसपास के क्षेत्रों में केंद्रीय बलों की तैनाती कितनी प्रभावी रही और कौन-कौन से उपाय किए गए। अदालत ने कहा कि अगले चार सप्ताह में इस मामले की पुनः सुनवाई होगी, ताकि स्थिति का लगातार मूल्यांकन किया जा सके।
हिंसा में एनआईए जांच
बेलडांगा हिंसा की जांच के संबंध में कलकत्ता हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को स्वतंत्र कदम उठाने का अधिकार दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार कानून के अनुसार अपनी जिम्मेदारी निभाए। सरकार ने अदालत को बताया कि सुरक्षा बलों की पांच कंपनियों में से अब तक केवल एक ही तैनात की गई है। इसके अलावा 16 जनवरी की दोपहर को 90 मिनट और 17 जनवरी को दो घंटे से अधिक समय तक रूट मार्च कराया गया।
क्षेत्रीय तैनाती का विवरण
केंद्र और राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि बेलडांगा और उसके आसपास के क्षेत्रों में पांच कंपनियां, जंगीपुर क्षेत्र में आठ कंपनियां और समसेरगंज क्षेत्र में चार कंपनियां तैनात हैं। अदालत ने कहा कि यह जरूरी है कि इन बलों का प्रभावी उपयोग किया जाए और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। पीठ ने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना किसी भी लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। बेलडांगा जैसी घटनाएं न केवल स्थानीय लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं, बल्कि पूरे जिले में शांति और सामाजिक सामंजस्य को भी प्रभावित करती हैं। अदालत ने प्रशासन और पुलिस को निर्देश दिया कि वे किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तत्पर रहें।











