पश्चिम बंगाल समेत चार राज्यों की छह विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के दौरान सियासी हलचल तेज है। मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर को पुलिस ने हिरासत में लिया, जबकि नंदीग्राम में कांग्रेस ने पोलिंग एजेंट्स को धमकाने और जबरन हटाने का आरोप लगाया है।
नंदीग्राम: देश के चार राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में छह विधानसभा सीटों पर मंगलवार को उपचुनाव के लिए मतदान हो रहा है। मतदान के बीच पश्चिम बंगाल की दो अहम सीटों नंदीग्राम और रेजीनगर से राजनीतिक तनाव और आरोप-प्रत्यारोप की खबरें सामने आई हैं। मुर्शिदाबाद में आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर को पुलिस ने उनके पार्टी कार्यालय से हिरासत में लिया है। पुलिस की ओर से फिलहाल हिरासत में लिए जाने की वजह स्पष्ट नहीं की गई है।
दूसरी ओर, नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान ने आरोप लगाया है कि उनके पोलिंग एजेंट्स को कथित तौर पर जबरन हटाया जा रहा है, धमकाया जा रहा है और उनके दस्तावेज भी छीने गए हैं। BJP ने इन आरोपों के बीच नंदीग्राम में अपनी जीत का अंतर पिछली बार की तुलना में कई गुना बढ़ने का दावा किया है।
मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर हिरासत में
रेजीनगर विधानसभा सीट से चुनावी मुकाबले के बीच AJUP प्रमुख हुमायूं कबीर को पुलिस ने मुर्शिदाबाद स्थित उनके पार्टी कार्यालय से हिरासत में लिया। हालांकि, पुलिस ने अभी तक यह नहीं बताया है कि उन्हें किस मामले या किस वजह से हिरासत में लिया गया है।
हुमायूं कबीर के बेटे गोलाम नबी आजाद रेजीनगर से चुनाव मैदान में हैं। हुमायूं कबीर ने मतदान प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इलाके में वोटिंग सही तरीके से नहीं हो रही है और पुलिस आम मतदाताओं को परेशान कर रही है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ समय से मुस्लिम मतदाताओं को कथित तौर पर परेशान किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
नंदीग्राम में कांग्रेस का पोलिंग एजेंट्स को लेकर आरोप
नंदीग्राम से कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान ने मतदान के दौरान गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि हर मतदाता को बिना किसी दबाव के मतदान करने का अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन क्षेत्र में कथित तौर पर डर और दबाव का माहौल बनाया जा रहा है।
मिलन प्रधान के अनुसार, उनके पोलिंग एजेंट्स को मतदान से पहले ही कथित रूप से जबरन हटाया गया और धमकाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ एजेंट्स के जरूरी कागजात छीन लिए गए।
कांग्रेस उम्मीदवार ने इन घटनाओं को चुनावी प्रक्रिया के लिए गंभीर बताते हुए निष्पक्ष मतदान की मांग की है। इन आरोपों पर संबंधित प्रशासन और पुलिस की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
BJP का दावा- नंदीग्राम में बढ़ेगा जीत का अंतर
उपचुनाव को लेकर BJP ने नंदीग्राम में बड़ी जीत का दावा किया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि BJP इस बार नंदीग्राम में पिछली जीत की तुलना में करीब पांच गुना बड़े अंतर से जीत दर्ज कर सकती है।
BJP नेताओं का दावा है कि क्षेत्र में पार्टी का समर्थन मजबूत है। रेजीनगर को लेकर भी BJP का कहना है कि इस बार चुनाव परिणाम राजनीतिक समीकरणों में बदलाव का संकेत दे सकते हैं।
बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने भी नंदीग्राम में BJP की स्थिति मजबूत होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि नंदीग्राम पहले से BJP के प्रभाव वाली सीट है और इस बार जीत का अंतर और बढ़ सकता है।
रेजीनगर में बहुकोणीय मुकाबला
रेजीनगर विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। यहां BJP, कांग्रेस, TMC के अलग-अलग राजनीतिक धड़ों, CPI(M) और हुमायूं कबीर की AJUP के उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।
रेजीनगर मुस्लिम बहुल क्षेत्र है और यहां BJP उम्मीदवार शंकराव सरकार को छोड़कर प्रमुख दलों के कई उम्मीदवार मुस्लिम समुदाय से आते हैं। कांग्रेस ने मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफी, TMC ने रबीउल आलम चौधरी, जबकि AJUP ने हुमायूं कबीर के बेटे गोलाम नबी आजाद को मैदान में उतारा है।
इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी वजह से BJP और विपक्षी दलों के बीच चुनावी रणनीति को लेकर मुकाबला काफी अहम हो गया है।
नंदीग्राम में मतदान से पहले थाना प्रभारी बदला गया
नंदीग्राम उपचुनाव में मतदान से ठीक एक दिन पहले चुनाव आयोग ने स्थानीय थाने के प्रभारी को बदल दिया था। मौजूदा अधिकारी अजय कुमार मिश्रा को हटाकर देबाशीष सरकार को नया प्रभारी नियुक्त किया गया।
यह बदलाव विपक्षी दलों की शिकायतों के बाद हुआ। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन थाना प्रभारी सत्ताधारी पक्ष के करीबी थे। चुनाव आयोग की कार्रवाई को निष्पक्ष चुनाव कराने की दिशा में उठाया गया कदम माना गया। हालांकि, पुलिस अधिकारी को बदलने के फैसले और उससे जुड़े आरोपों पर संबंधित पक्षों के अलग-अलग दावे हैं।

ममता बनर्जी की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई नंदीग्राम की दिलचस्पी
इस उपचुनाव में पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक बड़ा पहलू यह भी है कि लंबे समय बाद ममता बनर्जी न तो मुख्यमंत्री हैं, न विधायक और न ही किसी सीट से उम्मीदवार हैं।
मई 2026 में हुए विधानसभा चुनाव में TMC सत्ता से बाहर हो गई थी और ममता बनर्जी को भी चुनावी हार का सामना करना पड़ा था। नंदीग्राम को लेकर शुरुआत में ऐसी अटकलें थीं कि ममता बनर्जी इस सीट से उपचुनाव लड़ सकती हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
TMC की ओर से नामित उम्मीदवार संचिता प्रधान ने बाद में अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का रुख अपनाया।
नंदीग्राम में BJP और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला
नंदीग्राम लंबे समय से पश्चिम बंगाल की राजनीति का प्रमुख केंद्र रहा है। 2007 का भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन इस क्षेत्र की राजनीति में निर्णायक मोड़ माना जाता है। इसी आंदोलन ने ममता बनर्जी और TMC को राज्य की सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
2021 में ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ा था, लेकिन BJP के शुभेंदु अधिकारी से हार गई थीं। इसके बाद से नंदीग्राम TMC और BJP के बीच राजनीतिक संघर्ष का प्रतीक बन गया। 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के अलावा भवानीपुर से भी चुनाव लड़ा और दोनों सीटों पर जीत हासिल की। भवानीपुर में उन्होंने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतर से हराया था।
चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद चुनाव और संवेदनशील
नंदीग्राम उपचुनाव में BJP ने शुभेंदु अधिकारी के पूर्व सहयोगी रहे चंद्रनाथ रथ की मां को उम्मीदवार बनाया है। चंद्रनाथ रथ की 6 मई 2026 को हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद नंदीग्राम का चुनाव और अधिक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
कांग्रेस और BJP दोनों इस सीट पर अपनी-अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। वहीं, TMC की प्रत्यक्ष चुनावी मौजूदगी कमजोर होने के बावजूद ममता बनर्जी का कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन मुकाबले को अलग राजनीतिक दिशा दे रहा है।
उपचुनाव में निष्पक्ष मतदान पर नजर
पश्चिम बंगाल की दोनों सीटों पर मतदान के दौरान सामने आए आरोपों ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर बहस तेज कर दी है। कांग्रेस ने जहां अपने पोलिंग एजेंट्स को कथित तौर पर धमकाने का आरोप लगाया है, वहीं हुमायूं कबीर ने पुलिस पर पक्षपात और मतदाताओं को परेशान करने के आरोप लगाए हैं।
दूसरी ओर, BJP ने इन राजनीतिक आरोपों के बीच नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों में बेहतर प्रदर्शन का दावा किया है। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मतदान का वास्तविक प्रतिशत कितना रहता है और मतदाताओं का रुझान किस दल के पक्ष में जाता है। चुनाव परिणाम ही यह तय करेंगे कि नंदीग्राम और रेजीनगर में मौजूदा राजनीतिक समीकरण कितने बदले हैं।













