कर्नाटक के Namma Metro का 73 किमी लंबा नया कॉरिडोर प्रस्तावित है, जिसमें 50 स्टेशन होंगे। यह कलना अग्रहरा से कडुगोडी तक जुड़ेगा और ट्रैफिक जाम कम करने के साथ शहर के तेजी से विकसित क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देगा।
बेंगलुरु: भारत के तेजी से बढ़ते महानगरों में शामिल बेंगलुरु अब अपने सार्वजनिक परिवहन ढांचे में एक और बड़ा कदम जोड़ने जा रहा है। बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) ने 73 किलोमीटर लंबे नए मेट्रो कॉरिडोर की फिज़िबिलिटी रिपोर्ट पूरी कर ली है। यह प्रस्तावित कॉरिडोर न केवल शहर की ट्रैफिक समस्या को कम करने में मदद करेगा, बल्कि बेंगलुरु के तेजी से विकसित हो रहे उपनगरों को भी मुख्य शहर से जोड़ने का काम करेगा।
यह परियोजना यदि स्वीकृत होती है तो यह नम्मा मेट्रो (Namma Metro) नेटवर्क का सबसे लंबा एकल कॉरिडोर बन जाएगा, जिसमें लगभग 50 स्टेशन शामिल होंगे।
कॉरिडोर का रूट: दक्षिण से पूर्व बेंगलुरु तक सीधा संपर्क
प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर दक्षिण बेंगलुरु के कल्लेना अग्रहारा (Kalena Agrahara) से शुरू होकर पूर्वी बेंगलुरु के कडुगोडी ट्री पार्क (Kadugodi Tree Park) तक जाएगा।
यह रूट लगभग 68 किलोमीटर मुख्य लाइन के रूप में विकसित होगा, जबकि इसके साथ लगभग 5 किलोमीटर का एक स्पर लाइन भी प्रस्तावित है, जो अनेकल तालुक में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम तक जाएगा।
इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह एलिवेटेड (Elevated) होगा, जिससे भूमि अधिग्रहण की जटिलताएँ कम होंगी और निर्माण प्रक्रिया तेज हो सकेगी।
प्रमुख क्षेत्र जो होंगे कवर
यह नया मेट्रो कॉरिडोर बेंगलुरु के कई तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों से होकर गुजरेगा, जिनमें शामिल हैं:
- बैनरघट्टा रोड (Bannerghatta Road)
- जिगनी (Jigani)
- अट्टिबेले (Attibele)
- सारजापुर (Sarjapur)
- डोम्मासंद्रा (Dommasandra)
- वर्थुर (Varthur)
- इन क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से शहरीकरण हुआ है। आईटी कंपनियों, रेजिडेंशियल टाउनशिप्स और औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार के कारण यहां यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
50 स्टेशनों वाला विशाल नेटवर्क
इस प्रस्तावित कॉरिडोर में लगभग 50 स्टेशन बनाए जाने की योजना है। यह इसे न केवल बेंगलुरु का बल्कि भारत के प्रमुख शहरों में से एक सबसे बड़ा मेट्रो कॉरिडोर बनाता है।

स्टेशनों का डिज़ाइन इस तरह से किया जाएगा कि वे रेजिडेंशियल, कमर्शियल और आईटी हब्स को समान रूप से कवर करें, जिससे अंतिम मील कनेक्टिविटी (Last Mile Connectivity) बेहतर हो सके।
स्पर लाइन और क्रिकेट स्टेडियम कनेक्टिविटी
इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 5 किलोमीटर लंबी स्पर लाइन है, जो जिगनी के बाद अलग होकर अनेकल क्षेत्र में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम तक जाएगी।
- इस रूट पर दो अतिरिक्त स्टेशन प्रस्तावित हैं:
- एक स्टेशन सीधे स्टेडियम के पास
- दूसरा इंडलवाड़ी गांव में, जो आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी सेवा देगा
यह कदम न केवल खेल सुविधाओं को बेहतर कनेक्टिविटी देगा, बल्कि ग्रामीण-शहरी क्षेत्र के बीच परिवहन अंतर को भी कम करेगा।
फिज़िबिलिटी रिपोर्ट और आगे की प्रक्रिया
यह फिज़िबिलिटी स्टडी Introsoft Solutions Private Limited द्वारा तैयार की गई है। रिपोर्ट जल्द ही कर्नाटक सरकार को सौंप दी जाएगी।
इसके बाद निम्नलिखित प्रक्रियाएँ होंगी:
- राज्य सरकार द्वारा प्रारंभिक मंजूरी
- डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करना
- केंद्रीय और राज्य स्तर पर अंतिम स्वीकृतियाँ
- भूमि अधिग्रहण और टेंडर प्रक्रिया
निर्माण कार्य की शुरुआत (संभावित रूप से 2029 के आसपास)
विशेषज्ञों का मानना है कि DPR तैयार करने में लगभग एक वर्ष का समय लग सकता है।
बेंगलुरु ट्रैफिक समस्या का समाधान
बेंगलुरु भारत के उन शहरों में शामिल है जहां ट्रैफिक जाम एक बड़ी समस्या बन चुका है। आईटी सेक्टर की तेज़ी से बढ़ती उपस्थिति और जनसंख्या वृद्धि ने सड़कों पर दबाव बढ़ा दिया है।
इस नए मेट्रो कॉरिडोर से:
- निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी
- यात्रा समय में भारी कमी आएगी
- प्रदूषण स्तर में गिरावट आएगी
- उपनगरों का विकास तेज़ होगा
- शहरी योजनाकारों की राय
शहरी योजनाकारों का मानना है कि यह कॉरिडोर विशेष रूप से उन क्षेत्रों को जोड़ने पर केंद्रित है जो अभी तेजी से विकसित हो रहे हैं। यह पारंपरिक रूप से जुड़े हुए शहरों जैसे तुमकुरु या बिदादी की बजाय नए विकास क्षेत्रों को प्राथमिकता देता है।
यह दृष्टिकोण भविष्य की शहरी जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
येलो लाइन विस्तार और अन्य योजनाएँ
BMRCL वर्तमान में येलो लाइन (Yellow Line) को बॉम्मासंद्रा से अट्टिबेले तक बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है। हालांकि, होसुर तक अंतरराज्यीय मेट्रो कनेक्शन पर अभी सीमित रुचि दिखाई गई है, जिसका कारण तकनीकी और विद्युत प्रणाली से जुड़ी जटिलताएँ हैं।









