भागलपुर में पिछले कुछ दिनों से बारिश और बादलों के कारण बदला हुआ मौसम अब धीरे-धीरे सामान्य होने की ओर बढ़ रहा है। बंगाल की खाड़ी से उठे डीप डिप्रेशन के प्रभाव के कारण जिले में बुधवार से रुक-रुककर बारिश का दौर बना हुआ था। कभी हल्की फुहार तो कभी तेज बौछार के कारण लोगों को सितंबर के अंतिम सप्ताह में भी बारिश का सामना करना पड़ा। अब मौसमी सिस्टम के कमजोर पड़ने के साथ 26 सितंबर की दोपहर के बाद बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार इसके बाद आसमान में बादलों की मौजूदगी घट सकती है और मौसम धीरे-धीरे शुष्क होने की दिशा में बढ़ेगा।
बंगाल की खाड़ी से सक्रिय हुआ डीप डिप्रेशन उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश और उससे सटे दक्षिण ओडिशा के ऊपर बना था। यह सिस्टम उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर आगे बढ़ रहा है और लगातार कमजोर होने की प्रक्रिया में है। मौसम विज्ञानी के मुताबिक अगले कुछ समय में यह डीप डिप्रेशन से डिप्रेशन और फिर कमजोर चक्रवाती परिसंचरण में बदल सकता है। सिस्टम की ताकत कम होने के साथ भागलपुर और बिहार के दूसरे हिस्सों में बारिश कराने वाली नमी में भी कमी आने की उम्मीद है।
भागलपुर में इस मौसम प्रणाली का असर पिछले दो दिनों में साफ दिखाई दिया। लगातार बादल छाए रहने और रुक-रुककर बारिश होने के कारण दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। 25 सितंबर को भागलपुर में 24 घंटे के दौरान 38.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। इस दौरान न्यूनतम तापमान करीब 24.1 डिग्री सेल्सियस रहा। अधिक नमी और बारिश के कारण लोगों को उमस से कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन शहर के निचले इलाकों में जलजमाव की समस्या भी बनी रही।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 26 सितंबर को भी भागलपुर में बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। गरज-चमक के साथ बारिश भी हो सकती है। हालांकि दिन बढ़ने के साथ मौसम प्रणाली का असर कमजोर पड़ने की उम्मीद है। 26 सितंबर की दोपहर के बाद बारिश की तीव्रता में कमी आने की संभावना जताई गई है। इसके बाद मौसम में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है।
27 सितंबर को भी भागलपुर में कहीं-कहीं बारिश या गरज के साथ बौछार की संभावना बनी रहेगी, लेकिन लगातार बारिश की स्थिति कमजोर पड़ सकती है। इसके बाद 28 और 29 सितंबर को भी स्थानीय स्तर पर बादल और हल्की बारिश या गरज-चमक की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया गया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान में 30 सितंबर को मुख्य रूप से आंशिक बादल रहने की संभावना बताई गई है और किसी विशेष चेतावनी का उल्लेख नहीं है।
मौसम में बदलाव का असर तापमान पर भी दिखाई देगा। बारिश कम होने के साथ दिन का तापमान फिर से बढ़ने की संभावना है। 27 सितंबर को अधिकतम तापमान करीब 32 डिग्री, 28 सितंबर को 33 डिग्री और 29 सितंबर को 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच सकता है। 30 सितंबर को अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री रहने का पूर्वानुमान है। यानी बारिश की गतिविधि कम होने के साथ सितंबर के अंतिम दिनों में गर्मी और धूप का असर दोबारा बढ़ सकता है।
भागलपुर में बारिश थमने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए यह राहत की खबर है। लगातार बारिश के कारण शहर के कई निचले हिस्सों में पानी जमा हुआ था। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बारिश का असर खेतों और कच्चे रास्तों पर दिखाई दिया। अब अगर मौसम साफ होता है तो जलजमाव वाले इलाकों में पानी निकलने और सामान्य गतिविधियां बहाल होने में मदद मिल सकती है। हालांकि गंगा के जलस्तर और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति अलग-अलग रह सकती है।
भागलपुर जिले में गंगा से जुड़ी स्थिति भी इस समय महत्वपूर्ण बनी हुई है। 26 सितंबर को काहलगांव में गंगा का जलस्तर सामान्य से ऊपर बाढ़ की स्थिति में बताया गया। उपलब्ध मौसम संबंधी चेतावनी में नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर और खतरे के निशान से नीचे दर्ज किया गया था। इसलिए बारिश कम होने के बावजूद नदी किनारे और बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन तथा जल संसाधन विभाग की सूचनाओं पर नजर बनाए रखना जरूरी है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार डीप डिप्रेशन के कमजोर होने के बाद वातावरण में नमी की मात्रा धीरे-धीरे कम होगी। इसके साथ ही लगातार नए बादलों के बनने की प्रक्रिया भी कमजोर पड़ेगी। यही वजह है कि 26 सितंबर की दोपहर के बाद मौसम में सुधार की उम्मीद जताई गई है। इसके बाद धूप निकलने की संभावना बढ़ेगी और सितंबर के अंतिम दिनों में मौसम अपेक्षाकृत साफ रह सकता है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी भी अब अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। मौसम विभाग की मौसमी स्थिति के अनुसार मानसून की वापसी रेखा उत्तर-पश्चिम भारत के हिस्सों से गुजर रही है। बिहार में भी सितंबर के आखिरी दिनों में मानसून की गतिविधि कमजोर होने की उम्मीद है। भागलपुर में 30 सितंबर तक मौसम के काफी हद तक साफ होने के संकेत इसी बदलाव से जुड़े हैं। हालांकि किसी स्थान से मानसून की आधिकारिक विदाई की तारीख मौसम संबंधी निर्धारित मानकों के आधार पर ही तय होती है।
मौसम विभाग मानसून की वापसी को केवल बारिश रुकने के आधार पर घोषित नहीं करता। इसके लिए कई वायुमंडलीय परिस्थितियों को देखा जाता है। हवा की दिशा, नमी में कमी, लगातार कुछ दिनों तक बारिश की गतिविधि का कमजोर होना और वातावरण में बने दबाव के पैटर्न जैसे कई मानकों को ध्यान में रखा जाता है। इसलिए 30 सितंबर तक मौसम साफ होने की संभावना और मानसून की आधिकारिक विदाई में अंतर हो सकता है।
भागलपुर में पिछले दिनों हुई बारिश से तापमान में भी गिरावट आई थी। लगातार बादल और बारिश के कारण दिन में गर्मी अपेक्षाकृत कम महसूस हुई। 25 सितंबर को दर्ज आंकड़ों में न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे रहा। अब बारिश कम होने पर तापमान में दोबारा वृद्धि की संभावना है। इससे दिन में गर्मी बढ़ सकती है, जबकि सुबह और शाम के समय मौसम अपेक्षाकृत आरामदायक रहने की उम्मीद की जा सकती है।
शहर के लोगों के लिए मौसम में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सितंबर के अंतिम सप्ताह में बारिश से यातायात और रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ा। लगातार बारिश होने पर सड़कों पर जलजमाव, कीचड़ और यातायात की परेशानी बढ़ जाती है। बारिश कम होने के बाद नगर क्षेत्र में पानी की निकासी और सड़कों की स्थिति में सुधार की संभावना है। ग्रामीण इलाकों में भी खेतों और संपर्क मार्गों पर इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है।
हालांकि बारिश की गतिविधि कम होने का मतलब यह नहीं है कि पूरे जिले में तुरंत पूरी तरह सूखा मौसम शुरू हो जाएगा। स्थानीय स्तर पर बादल बनने या हल्की बारिश की संभावना कुछ दिनों तक बनी रह सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान में 27 से 29 सितंबर के बीच भी कहीं-कहीं बारिश या गरज-चमक की संभावना दिखाई गई है। इसलिए लोगों को मौसम में अचानक बदलाव के लिए तैयार रहना होगा।
26 सितंबर के बाद मौसम में सुधार के साथ धूप बढ़ने की संभावना है। तापमान बढ़ने पर बारिश के बाद जमा पानी भी धीरे-धीरे सूख सकता है। हालांकि अधिक नमी वाले इलाकों में जलजमाव और कीचड़ की समस्या कुछ समय तक बनी रह सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में पानी की स्थिति फसल के अनुसार अलग-अलग प्रभाव डाल सकती है।
गंगा के किनारे बसे इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए मौसम साफ होने के बावजूद नदी की स्थिति पर नजर रखना जरूरी रहेगा। काहलगांव में नदी का जलस्तर अभी चेतावनी स्तर से ऊपर बताया गया है। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों में जलस्तर में गिरावट का रुझान भी दर्ज किया गया था। इसका मतलब है कि बारिश कम होने से नदी की स्थिति में सुधार की संभावना बन सकती है, लेकिन निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को तत्काल राहत का आकलन स्थानीय जलस्तर के आधार पर ही करना चाहिए।
मौसम में बदलाव का असर कृषि गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। लगातार बारिश से खेतों में नमी बढ़ी है, लेकिन जिन क्षेत्रों में पानी अधिक जमा है वहां निकासी जरूरी होगी। बारिश रुकने और धूप निकलने से खेतों में अतिरिक्त पानी कम हो सकता है। किसानों के लिए अगले कुछ दिन मौसम की स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेंगे, क्योंकि सितंबर के अंत में होने वाली बारिश और उसके बाद धूप फसलों की स्थिति पर असर डाल सकती है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मौजूदा डीप डिप्रेशन के कमजोर पड़ने के साथ भागलपुर में लगातार बारिश की संभावना कम हो रही है। सिस्टम के आगे बढ़ने और कमजोर होने के बाद इसके कारण बनने वाले बादल भी कम प्रभावी होंगे। यही वजह है कि 26 सितंबर की दोपहर के बाद मौसम में राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है।
आने वाले दिनों में भागलपुर में तापमान बढ़ने के साथ मौसम में फिर से गर्मी महसूस हो सकती है। 30 सितंबर तक अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। अक्टूबर की शुरुआत में भी तापमान 35 डिग्री या उससे ऊपर पहुंच सकता है। इससे संकेत मिलता है कि बारिश के बाद मौसम अचानक गर्म और उमस भरा भी हो सकता है।
फिलहाल 26 सितंबर भागलपुर के मौसम के लिए बदलाव का दिन माना जा रहा है। दिन के पहले हिस्से में बारिश और बादलों का असर रह सकता है, जबकि दोपहर के बाद सिस्टम कमजोर होने से बारिश की गतिविधि घटने की उम्मीद है। इसके बाद अगले कुछ दिनों में मौसम धीरे-धीरे साफ होने की दिशा में बढ़ेगा।
कुल मिलाकर भागलपुर में सितंबर के अंतिम सप्ताह में बारिश का दौर अब कमजोर पड़ने के संकेत दे रहा है। बंगाल की खाड़ी का डीप डिप्रेशन कमजोर हो चुका है और इसके प्रभाव में लगातार बारिश की संभावना घट रही है। 26 सितंबर के बाद मौसम में सुधार और 30 सितंबर तक मानसून की विदाई की परिस्थितियां बनने की उम्मीद है। हालांकि गंगा के जलस्तर और कुछ इलाकों में स्थानीय बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहना होगा।











