भारतनेट पर संसद की रिपोर्ट में सवाल, 7.19 लाख किमी केबल के बावजूद 78,899 पंचायतों में ही नेटवर्क

भारतनेट पर संसद की IT कमेटी ने चिंता जताई। 7.19 लाख किमी फाइबर बिछने के बावजूद सिर्फ 78,899 पंचायतों में PoP सक्रिय मिले।

भारतनेट योजना की प्रगति पर संसद की IT स्टैंडिंग कमेटी ने चिंता जताई है। 28 फरवरी 2026 तक 7.19 लाख किमी फाइबर बिछी, लेकिन 2.64 लाख ग्राम पंचायतों में सिर्फ 78,899 में नेटवर्क PoP सक्रिय पाए गए।

नई दिल्ली: गांवों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने वाली भारतनेट योजना की प्रगति पर संसद की IT स्टैंडिंग कमेटी ने सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 28 फरवरी 2026 तक देश में 7.19 लाख किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाई जा चुकी थी, लेकिन करीब 2.64 लाख ग्राम पंचायतों में केवल 78,899 पंचायतों के Points of Presence सक्रिय थे। कमेटी ने राज्यवार प्रदर्शन की समीक्षा की सिफारिश की है।

केबल बिछाने के बावजूद इंटरनेट कनेक्टिविटी में अंतर

भारतनेट का उद्देश्य देश की ग्राम पंचायतों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाना है। इसके लिए बड़े स्तर पर ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क तैयार किया गया है। हालांकि, संसद की कम्युनिकेशन और IT से जुड़ी स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में नेटवर्क के वास्तविक इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई गई है।

कमेटी के सामने रखे गए आंकड़ों के मुताबिक, 28 फरवरी 2026 तक 7.19 लाख किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी थी। इसके बावजूद देश की करीब 2.64 लाख ग्राम पंचायतों में से सिर्फ 78,899 पंचायतों में भारतनेट के Points of Presence यानी PoPs सक्रिय पाए गए।

इससे यह सवाल सामने आया है कि फाइबर नेटवर्क तैयार होने के बाद भी उसका अंतिम स्तर पर उपयोग और इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने में इतनी कमी क्यों बनी हुई है।

क्या होता है भारतनेट का PoP?

भारतनेट के तहत Point of Presence (PoP) एक स्थानीय नेटवर्क पॉइंट होता है। इसी के जरिए ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को आगे घरों, सरकारी संस्थानों, स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य यूजर्स तक पहुंचाया जा सकता है।

इसलिए केवल ऑप्टिकल फाइबर बिछा देना पर्याप्त नहीं है। नेटवर्क के प्रभावी इस्तेमाल के लिए संबंधित पंचायत में PoP का सक्रिय होना और उससे आगे कनेक्टिविटी उपलब्ध होना जरूरी है।

कमेटी के आंकड़ों से पता चलता है कि नेटवर्क का भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और वास्तविक इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के बीच अभी बड़ा अंतर मौजूद है।

संसद की कमेटी ने मांगी राज्यवार समीक्षा

स्टैंडिंग कमेटी ने भारतनेट के कामकाज में अलग-अलग राज्यों और कार्यान्वयन मॉडल के बीच अंतर को भी गंभीरता से लिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्राम पंचायतों को कनेक्टिविटी देने की गति हर जगह एक जैसी नहीं रही है।

कमेटी ने संबंधित विभाग से यह पता लगाने को कहा है कि योजना किस राज्य में और किस मॉडल के तहत कितनी आगे बढ़ी है। इसके साथ ही उन कारणों की पहचान करने की जरूरत बताई गई है, जिनकी वजह से नेटवर्क तैयार होने के बावजूद कनेक्टिविटी का विस्तार अपेक्षित गति से नहीं हो पाया।

राज्यों और संबंधित एजेंसियों के प्रदर्शन की समीक्षा से उन जगहों की पहचान की जा सकती है जहां काम तकनीकी, प्रशासनिक या क्रियान्वयन संबंधी कारणों से अटका हुआ है।

भारतनेट का मकसद क्या है?

भारतनेट को डिजिटल इंडिया विजन के तहत ग्रामीण भारत तक डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंचाने वाली प्रमुख योजनाओं में शामिल किया गया है। इसका लक्ष्य देश की ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर और हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ना है।

गांवों में तेज इंटरनेट पहुंचने से ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, ई-गवर्नेंस, डिजिटल बैंकिंग और अन्य ऑनलाइन सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान हो सकती है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कारोबार और रोजगार के नए अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं।

योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि तैयार किया गया फाइबर नेटवर्क वास्तव में कितनी पंचायतों और गांवों में सक्रिय इंटरनेट सेवा में बदल पाता है।

अब फोकस नेटवर्क को सक्रिय करने पर

संसदीय समिति की रिपोर्ट के बाद भारतनेट में केवल इंफ्रास्ट्रक्चर बिछाने के बजाय उसके प्रभावी संचालन पर ध्यान देने की जरूरत सामने आई है। 7.19 लाख किलोमीटर फाइबर का नेटवर्क तैयार होने के बावजूद सक्रिय PoPs की संख्या अपेक्षाकृत कम होना योजना के क्रियान्वयन में मौजूद अंतर को दिखाता है।

अब राज्यवार प्रदर्शन की समीक्षा, स्थानीय स्तर की समस्याओं की पहचान और अलग-अलग कार्यान्वयन एजेंसियों के काम का आकलन महत्वपूर्ण होगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि तैयार नेटवर्क को वास्तविक ग्रामीण इंटरनेट कनेक्टिविटी में बदलने में सबसे बड़ी बाधाएं कहां हैं।

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