लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब हर नागरिक अपने जीवन में संविधान के मूल्यों और आदर्शों को अपनाएगा।
नई दिल्ली: भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट और प्रेरक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि संविधान के मूल्यों को जीवन में उतारने से ही हासिल किया जा सकता है। संविधान दिवस के अवसर पर संविधान सदन (पुराना संसद भवन) के केंद्रीय कक्ष में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने यह बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा संविधान के मार्गदर्शन में आगे बढ़ी है और यही संविधान देश को सुशासन, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में निरंतर आगे ले जा रहा है।
संविधान निर्माताओं को किया नमन
अपने संबोधन की शुरुआत में लोकसभा अध्यक्ष ने संविधान सभा के सभी सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा, आज के इस पावन अवसर पर हम संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद, संविधान के शिल्पकार बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और सभी सदस्यों को आदरपूर्वक नमन करते हैं। उनके ज्ञान, दूरदृष्टि और अथक परिश्रम से हमें ऐसा महान संविधान मिला, जो आज भी हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूत नींव है।
ओम बिरला ने कहा कि भारत का संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि न्याय, समानता, बंधुत्व और मानव गरिमा की सशक्त गारंटी है। उन्होंने कहा कि संविधान सदन का केंद्रीय कक्ष वह ऐतिहासिक स्थल है, जहां गहन विचार-विमर्श के बाद जनता की आकांक्षाओं को संवैधानिक शब्दों में ढाला गया।उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संविधान ने हर नागरिक को सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार दिया है और यही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है।

70 वर्षों में संविधान के मार्गदर्शन में भारत की परिवर्तनकारी यात्रा
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि पिछले सात दशकों से अधिक समय में भारत ने अपने संविधान के मार्गदर्शन में अनेक महत्वपूर्ण नीतियां और कानून बनाए।
उन्होंने कहा, संविधान के आधार पर हमने सामाजिक न्याय, गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति की है। आज भारत विश्व का सबसे जीवंत और सफल लोकतंत्र माना जाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने सुशासन और सामाजिक-आर्थिक विकास की दिशा में एक परिवर्तनकारी यात्रा तय की है, जिसमें लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
2047 का लक्ष्य: केवल आर्थिक नहीं, नैतिक विकास भी जरूरी
ओम बिरला ने संविधान की प्रस्तावना में लिखे गए शब्दों “हम भारत के लोग” को राष्ट्रीय एकता की सबसे मजबूत अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि यह वाक्य हमारी सामूहिक शक्ति, लोकतांत्रिक चेतना और जनकल्याण के संकल्प को दर्शाता है। उनके अनुसार, भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी पहचान है और संविधान इस विविधता को एकता के सूत्र में पिरोता है।
लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का सपना तभी साकार होगा, जब हर नागरिक अपने आचरण में संवैधानिक मूल्यों को अपनाएगा। उन्होंने कहा, हमारा सामूहिक लक्ष्य भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है और यह लक्ष्य तभी पूरा होगा जब हम संविधान के मूल्यों और आदर्शों को अपने जीवन में उतारेंगे।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि केवल बुनियादी ढांचे, उद्योग और तकनीक से ही विकास संभव नहीं है, बल्कि नैतिकता, कर्तव्यबोध और राष्ट्रीय भावना भी उतनी ही आवश्यक है।











