केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि भारत में 500 गीगावाट का नेशनल ग्रिड है। बिजली की कोई कमी नहीं है, इसलिए देश डेटा सेंटर्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी हब के लिए विश्वसनीय जगह है।
New Delhi: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को स्पष्ट किया कि भारत डेटा सेंटर्स के लिए दुनिया में सबसे बेहतरीन लोकेशन है। उन्होंने कहा कि इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत में बिजली की कोई कमी नहीं है और देश का 500 गीगावाट का नेशनल ग्रिड अचानक बढ़ती मांग को भी आसानी से संभाल सकता है।
नेशनल ग्रिड और भारत की क्षमता
गोयल ने ऊर्जा क्षेत्र पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पहले वे बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में बिजली उत्पादन की क्षमता पूरी तरह पर्याप्त है। देश का 500 गीगावाट का ग्रिड दुनिया के सबसे बड़े ग्रिड्स में से एक है और यह देश की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है।
गोयल ने कहा, “यूरोप में कोई नेशनल ग्रिड नहीं है। अमेरिका में भी नहीं है। लेकिन भारत के पास है। इसलिए हम डेटा सेंटर्स के लिए बेहतरीन जगह हैं। आने वाले सालों में डेटा सेंटर्स की संख्या बढ़ेगी, लेकिन हमारे पास इतनी बिजली होगी कि लोगों, किसानों, उद्योगों और व्यावसायिक जगहों की जरूरतें पूरी होंगी। डेटा सेंटर्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) की मांग भी आसानी से पूरी कर लेंगे।”
बड़ी टेक कंपनियों का भरोसा
भारत में डेटा सेंटर्स और AI आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बड़ी टेक कंपनियों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। अक्टूबर में गूगल ने आंध्र प्रदेश में अदाणी ग्रुप के साथ मिलकर गीगावाट स्केल का डेटा सेंटर बनाने की घोषणा की। इसके लिए कंपनी 15 अरब डॉलर निवेश करेगी और इसे एआई इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाया जाएगा।
इसी महीने अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) ने तेलंगाना में डेटा सेंटर्स बढ़ाने के लिए 7 अरब डॉलर निवेश की योजना बनाई। यह निवेश अगले 14 वर्षों में पूरा किया जाएगा।

माइक्रोसॉफ्ट ने भी भारत में AI की मजबूत नींव बनाने के लिए 17.5 अरब डॉलर का निवेश करने की घोषणा की है। यह निवेश देश को AI आधारित भविष्य के लिए तैयार करने में मदद करेगा।
भारत की डेटा सेंटर्स बिजली जरूरत
राज्यसभा में बिजली राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने लिखित जवाब में बताया कि फिलहाल देश में डेटा सेंटर्स की कुल बिजली जरूरत लगभग 1 गीगावाट है। लेकिन आने वाले डेटा सेंटर्स के कारण यह आंकड़ा 2031-32 तक बढ़कर 13.56 गीगावाट हो जाएगा।
कोयला और संतुलित ऊर्जा नीति
गोयल ने कोयले आधारित बिजली उत्पादन बढ़ाने की योजनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि कोयले की नई उत्पादन क्षमता देश की जरूरतें पूरी करने के लिए जोड़ी जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा, “हम लोगों को बिजली से वंचित नहीं रख सकते। कोयला उत्पादन बढ़ने से आयात में कमी आएगी। हम पहले ही आयात घटा चुके हैं। साथ ही कोयले को सिंथेटिक गैस में बदलने जैसे विकल्प भी देख रहे हैं।”
गोयल ने बताया कि भारत विकासशील देश है और ऊर्जा के क्षेत्र में बदलाव के लिए समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा की कीमत कम रखते हुए साफ ऊर्जा की दिशा में भी काम करेगा। 2035 तक थर्मल पावर की जरूरत 307 गीगावाट तक बढ़ने का अनुमान है।
बिजली कंपनियों की स्थिति
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि चार साल पहले बिजली कंपनियों का कुल कर्ज 1.4 लाख करोड़ रुपये था। यह अब घटकर केवल 6,500 करोड़ रुपये रह गया है। यह सुधार दर्शाता है कि भारत की बिजली कंपनियां अब मजबूत वित्तीय स्थिति में हैं और देश के ऊर्जा सेक्टर का भविष्य सुरक्षित है।
भारत की वैश्विक भूमिका
गोयल ने कहा कि भारत विकसित देशों के लिए ऊर्जा क्षेत्र में एक उदाहरण बन सकता है। देश ने स्केल, स्पीड और सस्टेनेबिलिटी के साथ ऊर्जा विकास को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाया है। इसके चलते दुनिया के लिए भारत डेटा सेंटर्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प बन गया है।











