भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (India-EU Free Trade Agreement) को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश की आलोचनाओं पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने तीखा जवाब दिया।
नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के आरोपों का सख्ती से खंडन किया है। गोयल ने रमेश के दावे को “खट्टे अंगूर” की कहानी करार देते हुए कहा कि जो लोग सत्ता में रहते हुए फैसले नहीं ले पाए, वे अब कुछ न करने को ही अपनी उपलब्धि बता रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 2013 से 2022 तक एफटीए वार्ता के ठप रहने से भारत को नौकरियों, आय और आर्थिक विकास के रूप में भारी नुकसान उठाना पड़ा। पीयूष गोयल ने इस समझौते को ऐतिहासिक और दोनों पक्षों के लिए लाभकारी बताते हुए कहा कि इससे भारत में विकास और रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे।
पीयूष गोयल का कांग्रेस पर हमला
पीयूष गोयल ने कहा कि 2013 से 2022 तक भारत-ईयू एफटीए वार्ता ठप रहने से देश को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस दौरान भारत ने नौकरियों, आय और आर्थिक विकास के बड़े अवसर गंवाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा समझौता न केवल ऐतिहासिक है, बल्कि दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद भी है।गोयल ने कांग्रेस की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, जब पूरी दुनिया इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कह रही है, तब कांग्रेस को यह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया लगता है। यह केवल राजनीतिक हताशा को दर्शाता है।
जयराम रमेश ने क्या सवाल उठाए?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए इस एफटीए को लेकर कई चिंताएं जताई थीं। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत की ओर से किसी भी व्यापारिक भागीदार को दिया गया अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक खुलापन है। उनकी मुख्य आपत्तियां इस प्रकार थीं:
- ईयू से आने वाले 96 प्रतिशत से अधिक उत्पादों पर टैरिफ में कटौती
- इससे आयात बढ़ने और व्यापार घाटा बढ़ने की आशंका
- कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) का भारत पर संभावित नकारात्मक असर
- ऑटोमोबाइल सेक्टर, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) और रिफाइंड फ्यूल एक्सपोर्ट से जुड़े मुद्दे
रमेश ने चेतावनी दी कि इस समझौते से भारत का व्यापार संतुलन बिगड़ सकता है।

CBAM और संवेदनशील मुद्दों पर सरकार का रुख
पीयूष गोयल ने कांग्रेस की इन चिंताओं को आर्थिक वास्तविकता से दूर बताते हुए कहा कि सरकार ने CBAM जैसे मुद्दों पर सक्रिय और गंभीर बातचीत की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने न तो इन मुद्दों को नजरअंदाज किया है और न ही आंख मूंदकर समझौता किया है। गोयल ने कहा, मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि सरकार ने CBAM के मुद्दे को मजबूती से उठाया है और इसके समाधान के रास्ते तलाशे गए हैं।
हमारा रुख टकराव का नहीं, बल्कि संवाद और सहयोग का है। पीयूष गोयल के मुताबिक, यह समझौता आर्थिक रूप से बेहद विशाल दायरे को कवर करता है:
- भारत और ईयू की संयुक्त GDP लगभग 25 ट्रिलियन डॉलर
- वैश्विक व्यापार में 11 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की हिस्सेदारी
- करीब 2 अरब लोगों का साझा बाजार
उनका कहना है कि इतने बड़े बाजार तक भारत की पहुंच से निर्यात बढ़ेगा, निवेश आएगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।










