भारत-इजरायल दोस्ती का नया अध्याय, खाद्य सुरक्षा पर बड़ा समझौता

भारत-इजरायल दोस्ती का नया अध्याय, खाद्य सुरक्षा पर बड़ा समझौता

भारत और इजरायल ने रक्षा सहयोग से आगे बढ़ते हुए खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास में साझेदारी मजबूत की है। दोनों देशों ने ब्लू इकोनॉमी, जल-कृषि और तकनीकी सहयोग को भविष्य की रणनीति बताया है।

येरूशलम: भारत और इजरायल की रणनीतिक साझेदारी एक बार फिर मजबूती के साथ आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। आतंकवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा रक्षा सहयोग के बाद अब दोनों देश खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। यह साझेदारी केवल कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों के जीवन से जुड़े मुद्दों तक पहुंच रही है।

इजरायल के कृषि और खाद्य सुरक्षा मंत्री एवी डिचर ने स्पष्ट कहा है कि भारत और इजरायल सतत खाद्य सुरक्षा को लेकर एक जैसी सोच रखते हैं। दोनों देशों का लक्ष्य कृषि को आधुनिक तकनीक से जोड़कर भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।

राष्ट्रीय सुरक्षा से आगे बढ़ता सहयोग

भारत और इजरायल की दोस्ती लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा के मजबूत स्तंभ पर टिकी रही है। आतंकवाद के खिलाफ रणनीति, रक्षा तकनीक और इंटेलिजेंस सहयोग में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर भरोसा कायम किया है। अब यही भरोसा खाद्य सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय तक पहुंच चुका है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि आज के समय में खाद्य सुरक्षा भी राष्ट्रीय सुरक्षा जितनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या वृद्धि और संसाधनों की कमी के बीच भारत और इजरायल का यह साझा कदम भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

कृषि सहयोग को नई दिशा

भारत और इजरायल के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग कोई नया विषय नहीं है, लेकिन अब इसे कहीं अधिक तकनीकी और व्यावसायिक रूप दिया जा रहा है। इजरायल अपनी जल-बचत तकनीकों और आधुनिक कृषि मॉडल के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। भारत के पास विशाल कृषि भूमि, मेहनतकश किसान और बढ़ता बाजार है।

इजरायल के मंत्री एवी डिचर ने कहा कि भूमि आधारित खेती से आगे बढ़ते हुए अब जल कृषि और ब्लू इकोनॉमी पर फोकस किया जा रहा है। उनका कहना है कि दोनों देश सतत खाद्य सुरक्षा के लिए सच्ची दृष्टि साझा करते हैं।

लेटर ऑफ इंटेंट से बनी मजबूत नींव

भारत और इजरायल के बीच कृषि, मत्स्य पालन और ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने के लिए हाल ही में एक महत्वपूर्ण Letter of Intent पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यावसायिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

इजरायल के कृषि और खाद्य सुरक्षा मंत्रालय के अनुसार यह LoI पिछले वर्ष अप्रैल में हुए समझौते का विस्तार है। इसका उद्देश्य कृषि साझेदारी को और मजबूत करना, नवाचार को बढ़ावा देना और खाद्य सुरक्षा को दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित करना है।

ब्लू इकोनॉमी पर केंद्रित रणनीति

इस नए सहयोग का एक अहम हिस्सा Blue Economy है। ब्लू फूड्स उन खाद्य उत्पादों को कहा जाता है जो मीठे पानी या समुद्री वातावरण से प्राप्त होते हैं। इसमें मछली, शैवाल, जलीय पौधे और अन्य समुद्री संसाधन शामिल हैं।

तीन दिवसीय Second Global Summit on Blue Food Security: See the Future 2026 के दौरान इस LoI पर हस्ताक्षर किए गए। यह कार्यक्रम इजरायल के तटीय शहर ईलात में आयोजित हुआ, जहां भारत की ओर से मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने भाग लिया।

मत्स्य पालन क्षेत्र में नई संभावनाएं

भारत दुनिया के सबसे बड़े मत्स्य उत्पादन देशों में शामिल है। इस क्षेत्र में तकनीक, स्टोरेज और मूल्य संवर्धन की बड़ी संभावनाएं हैं। इजरायल की उन्नत जल कृषि तकनीक भारत के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।

इस साझेदारी के तहत अनुसंधान, तकनीकी सहयोग और आर्थिक निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

जल संसाधन प्रबंधन की स्मार्ट योजना

इस पहल का एक महत्वपूर्ण स्तंभ जल संसाधनों का स्मार्ट प्रबंधन है। इजरायल दुनिया के उन देशों में शामिल है, जिसने कम पानी में अधिक उत्पादन की तकनीक विकसित की है। ड्रिप इरिगेशन और Water Recycling जैसे क्षेत्रों में इजरायल का अनुभव भारत के लिए बेहद उपयोगी है।

सूत्रों के अनुसार, इस सहयोग में उन्नत इजरायली जल-बचत तकनीकों को भारत में लागू करने की योजना है। इससे जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों को राहत मिल सकती है।

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