भारत का REIT सेक्टर 6 साल में मुख्यधारा के निवेश विकल्प में बदल गया है। कुल पांच REITs ने 17.6 करोड़ वर्ग फुट संपत्ति संचालित की। SEBI के फैसले से 2026 में यह और अधिक इक्विटी निवेश का हिस्सा बनेगा।
Business News: भारत का रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) सेक्टर पिछले छह वर्षों में एक नीतिगत प्रयोग से निकलकर मुख्यधारा की निवेश श्रेणी बन चुका है। ANAROCK Capital की रिपोर्ट “India REITs–Taking a Stride” के अनुसार, भारत के REIT सेक्टर की ग्रॉस एसेट वैल्यू (GAV) अब लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। यह भारत को हांगकांग के REIT मार्केट से आगे ले गया है। सितंबर 2025 तक भारत के REIT सेक्टर का इक्विटी मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.66 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि केवल 32 प्रतिशत REIT-योग्य संपत्तियां ही सूचीबद्ध हैं।
पांच REITs के पास 17.6 करोड़ वर्ग फुट से अधिक संपत्ति
अगस्त 2025 में Knowledge Realty Trust के लिस्ट होने के बाद भारत में कुल पांच सूचीबद्ध REITs हैं। ये ट्रस्ट मिलकर लगभग 17.6 करोड़ वर्ग फुट Grade-A ऑफिस और रिटेल स्पेस संचालित कर रहे हैं। इसके अलावा, इनमें 2,000 से अधिक हॉस्पिटैलिटी रूम भी शामिल हैं। ANAROCK Capital के MD विशाल सिंह के अनुसार, 2019 में पहले REIT की लिस्टिंग के बाद से सेक्टर ने तेजी से विकास किया है। Embassy, Mindspace, Brookfield India, Nexus और Knowledge Realty Trust अब भारत के सबसे बड़े ऑफिस REIT बन गए हैं।
विशाल सिंह बताते हैं कि ये REIT निवेशकों को बेंगलुरु, एनसीआर, मुंबई, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई और प्रमुख टियर-II शहरों में विविध निवेश का अवसर दे रहे हैं। इसके अलावा, REIT से मिलने वाली आय लगभग 65 प्रतिशत तक टैक्स-फ्री होती है, जो इसे निवेशकों के लिए और आकर्षक बनाती है।
REIT से मजबूत रिटर्न
ANAROCK Capital के CEO शोभित अग्रवाल के अनुसार, Q2 FY26 के नतीजे दिखाते हैं कि REITs ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी और बाजार की अस्थिरता के बावजूद शानदार प्रदर्शन किया है। शुरुआती चार REITs की यूनिट कीमतों में 25 से 61 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। नया Knowledge REIT लिस्टिंग के बाद से ही लगभग 12 प्रतिशत चढ़ चुका है।
ट्रेलिंग 12 महीने की डिस्ट्रीब्यूशन यील्ड 5.1 से 6 प्रतिशत के बीच बनी हुई है। FY26 की दूसरी तिमाही में ही REITs ने 2,331 करोड़ रुपये का वितरण किया, जो साल-दर-साल लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। पिछले पांच वर्षों में भारतीय REIT सूचकांकों ने 8.9 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न दिया है, जो सिंगापुर, जापान और हांगकांग के REITs की तुलना में बेहतर है।
90 प्रतिशत से अधिक ऑक्यूपेंसी और मजबूत बैलेंस शीट
REIT ऑक्यूपेंसी के मामले में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। REIT पोर्टफोलियो की ऑक्यूपेंसी 90 से 96 प्रतिशत के बीच है। Q2 FY26 में देशभर की कुल ऑफिस लीजिंग का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा REITs के पास रहा। अकेले एम्बेसी और Knowledge ने लगभग 25 लाख वर्ग फुट लीज पर लिया।
सभी पांच REITs के पास मजबूत बैलेंस शीट है। सभी को क्रिसिल से AAA क्रेडिट रेटिंग प्राप्त है। इनका लोन-टू-वैल्यू रेशियो 18 से 31 प्रतिशत, औसत कर्ज लागत 7.4–7.5 प्रतिशत और इंटरेस्ट कवरेज रेशियो 2.2x–4.0x के बीच है। किराये में अनुमानित वृद्धि 15 से 24 प्रतिशत तक रही है। REITs ने ESG (Environmental, Social, Governance) में भी अपनी पहचान बनाई है और सभी को GRESB 5-स्टार रेटिंग मिली है।
SEBI के नए फैसले से REIT सेक्टर को नई रफ्तार
नवंबर 2025 में SEBI ने REIT यूनिट्स को ‘इक्विटी-संबंधित इंस्ट्रूमेंट’ के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया, जो 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा। इस बदलाव के बाद REIT निवेश अब डेट या हाइब्रिड कैटेगरी से निकलकर मुख्यधारा की इक्विटी में शामिल हो जाएगा।
विशाल सिंह के अनुसार, जनवरी 2026 से SEBI के फैसले लागू होते ही REITs केवल हाई-यील्ड विकल्प नहीं रहेंगे, बल्कि इक्विटी पोर्टफोलियो का एक अनिवार्य हिस्सा बन जाएंगे। इंडेक्स में शामिल होने और घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी के चलते यह सेक्टर निकट भविष्य में 20 बिलियन डॉलर के मार्केट कैप को पार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।











